भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के निवर्तमान न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा वह न केवल एक न्यायाधीश के रूप में न्यायपालिका की भूमिका निभाई, बल्कि संस्थागत कार्यों का भी ईमानदारी से किया। उनके निपटाए गए मामलों की दर बेजोड़ थी।
न्यायमूर्ति बिंदल की सेवानिवृत्ति के साथ, शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों के 34 स्वीकृत पदों में से कुल रिक्तियों की संख्या दो हो गई है। न्यायमूर्ति बिंदल और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की अध्यक्षता करते हुए, मुख्य न्यायाधीश ने निवर्तमान न्यायाधीश के साथ अपने वकालत के दिनों से चले आ रहे दशकों पुराने जुड़ाव को याद किया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'जैसा कि आपने रिकॉर्ड से देखा है, हमने साथ में काफी समय बिताया है। मुझे अपने शुरुआती पेशेवर जीवन में भी उन्हें बहुत करीब से जानने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। समय बीतने के साथ, हम दोनों अक्सर कर संबंधी मामलों और बाद में, अधिक विशिष्ट मामलों से निपटने में लगे रहे, जबकि मैं अन्य न्यायक्षेत्रों को संभाल रहा था... वे अपनी ईमानदारी और कड़ी मेहनत के लिए जाने जाते थे।'
मामले तेजी से निपटाने के लिए प्रसिद्ध
न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि उन्हें और न्यायमूर्ति बिंदल को इस पक्ष में एक साथ काम करने का अवसर मिला था। उन्होंने आगे कहा कि जैसा कि माननीय अटॉर्नी जनरल ने सही कहा है, हम दोनों ही मामलों के निपटारे की अपनी तीव्र गति के लिए जाने जाते थे। मैं उनसे कभी प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता था, और उनके रिकॉर्ड को तोड़ने का तो सवाल ही नहीं उठता था। वे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रसिद्ध थे। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायमूर्ति बिंदल ने न केवल "न्यायपालिका की भूमिका निभाई, बल्कि एक न्यायाधीश को जो संस्थागत भूमिका निभानी चाहिए, वह भी निभाई।