जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के भारत दौरे के बीच विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को मीडिया को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अरिहा शाह मामला, यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौता, ईरान की स्थिति और भारत-जर्मनी सुरक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि अरिहा की भारतीय परिवेश में परवरिश के लिए प्रयास जारी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एफटीए वार्ता में प्रगति हुई है।
अरिहा शाह मामले पर क्या कहा?
अरिहा बीते चालीस महीनों से माता-पिता और परिवार से दूर जर्मनी सरकार के देखभाल में है। इसे फोस्टर केयर कहा जाता है। इस मामले को लेकर विदेश सचिव ने कहा, यह एक बहुत ही संवेदनशील विषय है। इसको लेकर हमारी काफी समय से जर्मन सरकार, जर्मनी के अधिकारियों, दिल्ली में उनके दूतावास और इससे जुड़ी उनकी एजेंसियों से बातचीत चल रही है। जैसा कि आपको ध्यान है..यह एक समय पर एक तरह से कानूनी मामला था। लेकिन हमारा मानना है कि मानवता को ध्यान में रखकर इस मामले को हल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, जो परिवार की व्यथा है..जो उनकी मुश्किलें हैं..हम उनको समझते हैं। लेकिन हमें इसके बारे में पूरी जानकारी है। हर समय पर हमसे जितना बन पड़ रहा है, हम पूरी कोशिश कर रहे हैं। हम यह भी कोशिश कर रहे हैं कि उनकी परवरिश भारतीय माहौल में हो सके। चाहे वह भारतीय लोगों के साथ उठना-बैठना हो, जर्मनी में मनाए जा रहे भारतीय त्योहारों भाग लेना हो या उसे हिंदी सिखाने का इंतजाम करना हो..इन सभी चीजों पर हमारी कोशिश चल रही है।
मिस्री ने कहा, कुछ और चीजों को लेकर भी अभी हाल में हमने कोशिश की है। अभी इस समय मैं उसके बारे में विस्तार से नहीं बता पाऊंगा। लेकिन आपको यह आश्वासन देना चाहता हूं कि इसको लेकर हम जर्मन सरकार के साथ पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) ने भी चांसलर (फ्रेडरिक) मर्ज से इस चीज का जिक्र किया। हम जर्मन सरकार के साथ इस मामले को आगे भी देखते रहेंगे। हमेशा हर कदम पर परिवार के साथ रहेंगे। आप यह मानकर चलिए कि यह जो हमारा मुद्दा है और जर्मनी के साथ जो बाकी मुद्दे हैं, हम इसे उनसे अलग हटकर नहीं देखते हैं, इसकी भी उतनी ही प्राथमिकता है, जितनी अन्य मुद्दों की है।
फोस्टर केयर का मतलब क्या है?
किसी बच्चे को उसके माता-पिता या परिवार से दूर रखखर किसी दूसरे परिवार या व्यक्ति के साथ अस्थायी रूप से रहने दिया जाता है। यह तब किया जाता है जब बच्चे का परिवार में रहना संभव नहीं होता है। ऐसा उसकी सुरक्षा या भलाई के लिए किया जाता है। फोस्टर केयर में बच्चे को नया माहौल मिलता है, जहां उसकी देखभाल की जाती है। लेकिन यह अस्थायी होता है। उम्मीद की जाती है कि एक दिन बच्चा अपने परिवार के पास लौट सके।
अरिहा शाह कौन हैं और यह मामला क्या है?
अरिहा शाह गुजरात के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर भावेश शाह और उनकी पत्नी धारा शाह की बेटी हैं। दोनों 2018 में बर्लिन रहने के लिए चले गए। 2021 में इस जोड़े ने अरिहा को जन्म दिया। परिवार के मुताबिक, अरिहा जब सात महीने की थी, तब उसके एक प्राइवेट पार्ट पर एक आकस्मिक चोट लगी। जब अरिहा को अस्पताल ले जाया गया, तो जर्मन अधिकारियों ने इसे यौन हमले का मामला समझ लिया। इसके बाद जर्मनी के युवा कल्याण कार्यालय की निगरानी में रखा गया। जहां उसके माता-पिता को हर हफ्ते केवल दो बार मिलने की अनुमति थी। परिवार के आग्रह पर भारत सरकार ने लगातार जर्मन अधिकारियों के सामने कई बार इस मुद्दे को उठाया। बच्ची का फोस्टर केयर में रहना द्विपक्षीय संबंधों में तनाव का कारण भी बना।
माता-पिता पर लगे आरोप हटे, लेकिन वापस नहीं की बच्ची
इसके बाद जर्मन अधिकारियों ने यौन हमले के आरोप हटा दिए। लेकिन लापरवाही के लिए उसके माता-पिता को जिम्मेदार ठहराया। माता-पिता के खिलाफ 2022 में सभी आरोप बंद कर दिए गए और औपचारिक तरीके से कोई आरोप नहीं लगाए गए। हालांकि, अरिहा को अभी भी उसके माता-पिता को वापस नहीं दिया गया है। बच्चों के कल्याण को बढ़ावा देने वाली एजेंसी जगेनडाम्प्ट ने अरिहा की देखभाल के लिए मामला दायर किया था। भारत सरकार ने कई बार यह कहते हुए बच्ची की जल्द वापसी के लिए जोर दिया है कि बच्ची का उसके भाषाई, धार्मिक, सांस्कृति और सामाजिक वातावरण में रहना महत्वपूर्ण है।
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