फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुंबई हमले के वक्त पाक की दावत का लुत्फ उठा रहे थे कुछ भारतीय अधिकारी

Sat, 11 Jun 2016 04:28 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
विज्ञापन
पूर्व गृह सचिव मधुकर गुप्ता - फोटो : ANI
विज्ञापन
26/11 मुंबई हमले के वक्त पाकिस्तान में दावत का लुफ्त उठाने की खबरों का पूर्व गृह सचिव मधुकर गुप्ता ने खंडन किया है। उन्होंने कहा यह सभी खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं कि हम मुर्रे में ऐशो आराम से समय बीता रहे थे। 
विज्ञापन


मधुकर ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में बताया कि यह बात भी पूरी तरह से बेबुनियाद है कि वहां कोई सिग्नल नहीं था। मुझे भारत से एक फोन आया था, जिससे मुझे मुंबई हमले के बारे में पता चला। उन्होंने मुझे टीवी ऑन करने के लिए भी कहा। गौरतलब है कि 26/11 हमले से ठीक पहले मधुकर की अगुवाई में ही गृह मंत्रालय के अधिकारियों की एक टीम पाकिस्तान से बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंची थी।

उन्होंने बताया कि जब उन्हें मुंबई हमले के बारे में पता चला तो उनकी टीम ने भारत में वरिष्ठ नेतृत्व से संपर्क स्थापित किया। उन्होंने बताया, 'हमें जैसे ही आतंकी हमले की सूचना मिली, हमने भारत में सभी संबंधित लोगों से बात की जिनसे हमें बात करनी चाहिए थी। किसी को नहीं पता था कि 26/11 जैसा हमला होगा।'
विज्ञापन


 

क्यों देनी पड़ी पूर्व गृह सचिव को सफाई?

दरअसल, मीडिया में इस बात की चर्चाएं तेज हो रही थी कि 26/11 हमले के दौरान पाकिस्तान पहुंचे भारतीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के इस्लामाबाद से सटे मुर्रे में पाक मेहमान नवाजी का लुफ्त उठा रहे थे। इन खबरों के सामने आने के बाद यह जरूरी हो गया था कि लोगों के सामने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का पक्ष आए जिसके लिए खुद तात्कालीन गृह सचिव ने मीडिया में आकर इन सभी दावों का खंडन किया। 

मामला इस लिए भी ज्यादा गंभीर था क्योंकि खबरों के मुताबिक तत्कालीन गृह सचिव मधुकर गुप्ता समेत कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर पाकिस्तान के मुर्रे में स्थित रिजॉर्ट में मौज-मस्ती करने की बातें हो रही थीं। कहा रहा है कि पाक अधिकारियों ने ही भारतीय अधिकारियों को वहां एक और दिन रुकने के लिए कहा था और मुर्रे के रिजॉर्ट में उनके लिए इंतजाम किया गया था। इसके पीछे वजह बताई जा रही है कि पाकिस्तान के इंटीरियर मिनिस्टर यात्रा पर थे। जिनसे मिलने के लिए भारतीय अधिकारियों को रोका गया था। उनसे कहा गया था कि अगले दिन यानी 27 नवंबर 2008 को इंटीरियर मिनिस्टर से बात हो सकती है। 

27 नवंबर की दोपहर को ही भारतीय अधिकारियों के दल स्वदेश लौटा था। तब तक आतंकी मुंबई में फाइव स्टार ताज होटल, ओबेरॉय और ट्राइडेंट में खून की नदियां बहा चुके थे। नेशनल सिक्यॉरिटी फोर्स के कमांडो आतंकियों से निपट रहे थे। चारों तरफ सिर्फ मौत का तांडव था और देश दहशत में था। ऐसे हालातों में पाकिस्तान के रिजॉर्ट में भारतीय अधिकारियों का एक दिन ज्यादा रुकना गले से नीचे नहीं उतर रहा है।
विज्ञापन

पूर्व नौकरशाह ने भी जताया अंदेशा

हालांकि अपनी सफाई में पूर्व नौकरशाह ने इतना कहा है हम लोग इस्लामाबाद में दो दिन रुके, मेजबान देश ने हम लोगों के लिए पास के हिल स्टेशन मुर्रे स्थित रिजॉर्ट में विशेष इंतजाम किया, इस पर संदेह हो रहा कि कहीं पाकिस्तान ने जानबूझकर तो ऐसा नहीं किया, ताकि 26/11 हमले के वक्त भारतीय सुरक्षा पुख्ता न रह सके।

पाकिस्तान का जो भी उद्देश्य रहा हो, लेकिन भारतीय शिष्ट मंडल का वहां रुकना और आतंकी आकाओं द्वारा निर्देशित लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों का उसी रात मुंबई में घुसना महज इत्तेफाक नहीं हो सकता।

गुप्ता के साथ बॉर्डर मैनेजमेंट के अपर सचिव अनवर अहसान अहमद, आंतरिक सुरक्षा की संयुक्त सचिव दीप्तीविलासा और भारतीय आंतरिक सुरक्षा प्रतिष्ठान के कुछ अन्य अधिकारियों ने मुरी में वो मनहूस रात गुजारी थी। गृहमंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी बताते हैं कि उस रात फोन सिग्नल ठीक नहीं थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें