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INDIA Bloc: कौन से 'उचित वक्त' का इंतजार कर रहा है विपक्ष, क्या पांच साल पूरे नहीं कर पाएगी एनडीए सरकार?

आशीष तिवारी
Updated Thu, 06 Jun 2024 01:58 PM IST

सार

लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद तय हो गया कि 'INDIA' अब विपक्ष में बैठेगा। इसके साथ ही केंद्र में नरेंद्र मोदी की एक बार फिर से सरकार बनेगी और वह प्रधानमंत्री बनेंगे।
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INDIA - फोटो : Amar Ujala


लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद तमाम तरह के सियासी झंझावातों के बीच तय हो गया कि INDIA गठबंधन अब विपक्ष में बैठेगा। इसके साथ ही केंद्र में नरेंद्र मोदी की एक बार फिर से सरकार बनेगी और वह प्रधानमंत्री बनेंगे। इस नतीजे के बीच महत्वपूर्ण बात यह रही कि कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा के फासीवादी शासन के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि देश की जनता भाजपा सरकार को नहीं चाहती है और इसलिए INDIA गठबंधन द्वारा जनता की इच्छा को साकार करने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। 


विपक्ष का यह बयान तमाम सवाल छोड़ गया कि ‘हम उचित समय पर उचित कदम उठाएंगे। राजनीतिक जानकार अरुण शर्मा कहते हैं कि इसका मतलब है कि विपक्ष अब केंद्र सरकार को ऐसी कोई भी फैसला नहीं लेने देगा, जिसे पिछली लोकसभा में कम संख्या बल के कारण तमाम कोशिशों के बावजूद भी सरेंडर करना पड़ता था। वह बताते हैं कि गठबंधन की सरकार में कोई भी एक दल बड़ा फैसला नहीं ले सकता। क्योंकि पिछली सरकार में भारतीय जनता पार्टी के पास पर्याप्त नंबर थे, इसलिए बड़े फैसले भी लिए गए। विपक्ष इस बार भारतीय जनता पार्टी की इसी कमजोर नस को अपनी बड़ी ताकत बनाने की फिराक में है।




वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक जानकार बीएस राव बताते हैं कि इस बात को बिल्कुल कमतर नहीं आंकना चाहिए कि भारतीय जनता पार्टी के साथ वाले कई दल पहले यूपीए के भी सहयोगी थे। क्योंकि अब यूपीए खत्म होकर INDIA हो गया है और उसमें अभी भी महागठबंधन के कई दल शामिल हैं। इन दलों के बड़े नेताओं की न सिर्फ तेलुगू देशम पार्टी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू से मजबूत संबंध हैं, बल्कि कई मामलों में विचारधारा के आधार पर एनडीए की तुलना में सीबी नायडू विपक्षी दलों के करीब भी बताए जाते हैं। 


राव कहते हैं कि चंद्रबाबू नायडू की जितनी निकटता एनसीपी के शरद पवार से है, उतनी ही निकटता समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव से है। विपक्षी दल इसको अपनी ताकत मान रहा है। हालांकि वह बताते हैं कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बंटवारे को लेकर राज्य की जनता अभी भी कांग्रेस से नाराज है। ऐसी दशा में टीडीपी का कांग्रेस वाले गठबंधन में जाने का सवाल ही नहीं उठता था। लेकिन विपक्ष के गठबंधन में अन्य राजनीतिक दलों की टीडीपी से निकटता और और विचारधारा में कुछ हद तक की समानताएं इस बयान को मजबूती देती है कि आने वाले वक्त में देश की सियासत कई और करवट बदल सकती है।


राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं इस बात की खूब हो रही हैं कि विपक्ष के आखिर 'उचित समय' के अल्टीमेटम के मायने क्या हैं। विपक्षी दलों के साथ जुड़े एक पार्टी के वरिष्ठ नेता बताते हैं कि जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी एक्सट्रीम लेवल पर जाकर हिंदुत्व की राजनीति करती रही है, उस पर उनके गठबंधन में शामिल राजनीतिक दल इस बार अंकुश लगा सकते हैं। उनका दावा है कि गठबंधन की अहम घटक दल टीडीपी अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानो को लेकर भारतीय जनता पार्टी से अलग राय रखती है। ऐसे में एनडीए की सरकार में लिए जाने वाले उन फैसलों पर टकराव की स्थिति आ सकती है, जो भाजपा के मुख्य एजेंडे में शामिल हैं।


राजनीतिक जानकार चंद्रप्रकाश त्रिपाठी कहते हैं कि जिस 'उचित समय' की बात विपक्ष ने सही है, वह ऐसे ही क्षण हो सकते हैं। यानी कि बड़े फैसलों के वक्त गठबंधन के प्रमुख राजनैतिक दलों पर विपक्ष की मजबूत नजर रहेगी। त्रिपाठी कहते हैं कि यह भी सच है कि चंद्रबाबू नायडू की जितनी निकटता भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से है, उतनी ही निकटता INDIA के नेताओं से भी है। इसको ही विपक्ष के नेता अपनी मजबूती के तौर पर देख रहे हैं।

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