मामला : राज्य के पहले विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा को अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में 81 में से 30 सीटें मिलीं। 17 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर झामुमो के शीबू सोरेन थे।
विवाद : राज्यपाल ने सोरेन को सरकार बनाने बुलाया, दो मार्च को शपथ दिलाई। मुंडा सुप्रीम कोर्ट गए।
परिणाम : कोर्ट के आदेश पर शक्तिपरीक्षण हुआ। एनडीए के अर्जुन मुंडा को बहुमत मिला। 10 दिन सीएम रहे सोरेन का इस्तीफा।
उत्तर प्रदेश 1998 : कल्याण सरकार का संकट टला
मामला : यूपी के सीएम कल्याण सिंह को राज्यपाल रोमेश भंडारी ने रातों-रात हटाकर कांग्रेस के जगदंबिका पाल को नियुक्ति किया
विवाद : कल्याण ने शक्ति परीक्षण की मांग राज्यपाल से की, जो नकार दी गई। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। यहां शक्ति परीक्षण के आदेश हुए।
परिणाम : कल्याण शक्ति परीक्षण में 225 वोट पाकर सीएम बने रहे। जगदंबिका पाल को 196 वोट मिले।
मामला : 1988 में जनता पार्टी और लोक दल के विलय के बाद जनता दल बना, जिसे विधानसभा चुनाव में बहुमत मिला। एसआर बोम्मई सीएम बने।
विवाद : 1989 में राज्यपाल पी वेंकटसुभैया ने बोम्मई सरकार को अल्पमत बताया, केंद्र ने राष्ट्रपति शासन लगाया। बोम्मई हाईकोर्ट गए, लेकिन हार गए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई।
परिणाम : 1994 में नौ जजों की पीठ ने सात निर्णय दिए। जजों ने 5-4 के बहुमत से बोम्मई सरकार की बर्खास्तगी को असांविधानिक करार दिया। साथ ही साफ किया कि सरकार के बहुमत में होने या न होने का निर्णय केवल सदन में शक्ति परीक्षण से हो सकता है। राज्यपाल यह निर्णय नहीं कर सकते। यह आदेश अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग को रोकने में मील का पत्थर माना गया।