केरल में चुनाव के बाद शांति के बीच मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की अचानक गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई है। मोतियाबिंद सर्जरी के बाद उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति से अटकलें तेज हैं। विपक्ष इसे स्वास्थ्य दावों से जोड़कर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार इसे सामान्य रिकवरी बता रही है।
केरल में 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव के बाद अब राजनीतिक माहौल शांत जरूर है, लेकिन एक नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पिछले कुछ समय से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सरकार की ओर से आखिरी जानकारी यह दी गई थी कि मुख्यमंत्री ने चेन्नई के एक निजी अस्पताल में आंख का ऑपरेशन (मोतियाबिंद सर्जरी) कराया है और अभी आराम कर रहे हैं।
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इसके बाद से उनकी कोई सार्वजनिक उपस्थिति नहीं हुई, जिससे राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री ने केरल की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की काफी तारीफ की थी, लेकिन इलाज के लिए राज्य के बाहर जाना विरोधाभास दिखाता है।
कामकाज पर नजर बनाए रखने का दावा
हालांकि, सरकार की ओर से किसी गंभीर बीमारी की पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने हाल ही में ऑनलाइन कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता भी की, जिससे यह साफ है कि वे कामकाज पर नजर बनाए हुए हैं। बता दें कि करीब 81 साल के पिनराई विजयन राज्य की राजनीति में बेहद अहम चेहरा हैं।
अब समझिए केरल में सत्ता का समीकरण
गौर करने वाली बात यह है कि विजयन की अगुवाई में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रहे हैं, जो राज्य के इतिहास में पहली बार होगा। दूसरी ओर, विपक्षी कांग्रेस भी अंदरूनी चुनौतियों से जूझ रहा है और मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर स्पष्टता नहीं है।
ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी ने सियासी हलचल और बढ़ा दी है और अब सबकी नजर चुनाव नतीजों पर है, जिनसे यह साफ हो जाएगा कि केरल की राजनीति किस दिशा में जाएगी और मुख्यमंत्री विजयन की अगली भूमिका क्या होगी।