कुश्ती संघ के अखाड़े में पहलवानों के हाथों लगातार मात खा रहे बृजभूषण शरण सिंह अयोध्या में 5 जून को बड़ी रैली कर अपना शक्ति प्रदर्शन करने वाले थे। फिर प्रशासन ने उन्हें रैली की अनुमति नहीं दी। अब उसी अयोध्या में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 15 जून को बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे। इस रैली को भगवान राम के छोटे भाई भरत की तपस्थली नंदीग्राम (भरतकुंड) में आयोजित किया जा रहा है।
माना जा रहा है कि इसके जरिए भी सरकार बड़े संदेश देना चाह रही है। चूंकि, महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर कार्रवाई किए जाने के लिए 15 जून तक का ही अल्टीमेटम दिया है, ऐसे में इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि अयोध्या रैली के लिए 15 जून की ही तारीख क्यों चुनी गई? क्या इसके जरिए भाजपा कोई संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं?
भाजपा सूत्रों के अनुसार, अयोध्या में बृजभूषण शरण सिंह की रैली रद्द कराने के 10 दिन बाद ही उसी शहर में दूसरी बड़ी रैली आयोजित कर पार्टी उन्हें बड़े संकेत दे रही है। इससे पहले बृजभूषण शरण सिंह खेमा बार-बार यह संकेत देने की कोशिश कर रहा है कि उन पर कोई कार्रवाई होने से यूपी में भाजपा का सियासी समीकरण खराब हो जाएगा और राजपूत वोटर उससे छिटक सकता है। बीच में वे समाजवादी पार्टी से भी संपर्क करने की कोशिश करते हुए बताए जा रहे थे। इसे उनकी भाजपा पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा था। बृजभूषण शरण सिंह पहले समाजवादी पार्टी से सांसद रह भी चुके हैं। इसलिए इन चर्चाओं को ज्यादा बल मिल रहा था। लेकिन, कथित तौर पर अखिलेश यादव की ओर से कोई सकारात्मक रुख न मिलने से उन्हें अपनी इच्छाओं को मारकर रह जाना पड़ा।
राजपूत मतों के लिए बृजभूषण सिंह पर निर्भर नहीं भाजपा
उसी अयोध्या में दूसरे राजपूत नेता फैजाबाद के सांसद लल्लू सिंह के द्वारा बड़ी रैली आयोजित कर भाजपा उन्हें यह बताना चाह रही है कि राजपूत मतदाताओं के लिए वह बृजभूषण शरण सिंह पर निर्भर नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इसी समाज से आते हैं और राजपूत समाज के सबसे बड़े लोकप्रिय चेहरे के तौर पर देखे जाते हैं। ऐसे में भाजपा यह संकेत देने की कोशिश कर रही है कि राजपूत मतदाताओं के लिए वह बृजभूषण शरण सिंह पर निर्भर नहीं है।
15 जून को रैली क्यों?
माना जा रहा है कि बृजभूषण शरण सिंह के लिए संकेत यह भी है कि यदि महिला खिलाड़ियों के मामले में वे किसी कानूनी पचड़े में फंसते हैं तो पार्टी उन्हें केस की मेरिट के आधार पर आगे बढ़ने के लिए कह सकती है।
भरतकुंड में रैली क्यों?
अयोध्या में अभी तक जितने भी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम होते हैं, वे जीआईसी ग्राउंड में आयोजित किए जाते हैं। मुख्य शहर के बीचोबीच स्थित होने के कारण यह ग्राउंड राजनीतिक दलों को खूब पसंद आता है। यहां तक राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं का पहुंचना और पूरे शहर के लोगों के बीच अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना राजनीतिक संदेश देने की दृष्टि से बहुत अच्छा रहता है। यह पहली बार हो रहा है कि किसी राजनीतिक दल ने शहर के सबसे लोकप्रिय स्थल को छोड़कर दूर अपनी सभा का आयोजन किया है।
अयोध्या में भगवान राम के मंदिर से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल नंदीग्राम या भरतकुंड के नाम से जाना जाता है। इसके बारे में मान्यता है कि जब माता कैकेयी के कारण भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ था, तब उनके छोटे भाई भरत ने इसी तपोस्थली पर उनकी चरण पादुका रखकर एक तपस्वी के रूप में 14 वर्ष तक का जीवन व्यतीत किया था। इसी कारण इस स्थान को भरत कुंड के नाम से जाना जाता है।
केंद्र में भाजपा सरकार के नौ साल पूरे हो चुके हैं। इस अवसर पर पूरे देश में कार्यक्रम कर भाजपा जनता को यह बता रही है कि पिछले नौ सालों में भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने जनता के लिए क्या-क्या किया है। इस रैली से भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनता को केंद्र के द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देंगे। माना जा रहा है कि भरतकुंड में रैली कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यह संकेत देना चाहते हैं कि जिस प्रकार भरत ने एक तपस्वी की भांति नंदीग्राम में रहकर भगवान राम की ओर से जनता के लिए राजकार्य किया था, ठीक उसी तरह वे एक तपस्वी के रूप में उत्तर प्रदेश की सत्ता में हैं और जनता की सेवा कर रहे हैं।