तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा में नेता अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से से मुलाकात कर टीएमसी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की है। टीएमसी का आरोप है कि इन सांसदों ने पार्टी छोड़कर एनसीपीआई का समर्थन किया है और उनका यह कदम संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत दल-बदल के दायरे में आता है। बनर्जी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि समयसीमा में फैसला नहीं हुआ तो वह सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। साथ ही उन्होंने बागी सांसदों को अलग समूह की औपचारिक मान्यता न मिलने और इसके बावजूद उन्हें अलग तरीके से सदन में अवसर मिलने पर भी सवाल उठाया है।
जून से लंबित है मामला
बनर्जी ने कहा कि उन्होंने सबसे पहले जून में ही स्पीकर ओम बिरला के सामने यह मुद्दा उठाया था। उस समय इन सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की गई थीं। लेकिन करीब दो महीने बीत जाने के बावजूद उन्हें अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। उन्होंने संसद के बाहर पत्रकारों से कहा, 'मैंने जून में ही स्पीकर के सामने यह मुद्दा उठाया था, जब उनमें से हर एक के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दायर की गई थीं। तब से लगभग दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन मुझे अभी तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। आज भी मुझे लगभग वही जवाब मिला है, जबकि याचिकाएं अभी भी लंबित हैं।'
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का दिया हवाला
बनर्जी ने कहा कि वह स्पीकर द्वारा अयोग्यता याचिकाओं के समयबद्ध निपटारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर भरोसा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर स्पीकर कानून और लागू न्यायिक निर्देशों के तहत तय समय में इन याचिकाओं पर फैसला नहीं लेते हैं, तो मैं सुप्रीम कोर्ट जाने और उसके हस्तक्षेप की मांग करने के लिए मजबूर हो जाऊंगा। क्योंकि वह और TMC के अन्य सांसद कई बार लोकसभा अध्यक्ष के सामने यह मामला उठा चुके हैं।
26 जुलाई तक जमा किया गया था पत्र
टीएमसी नेता ने बताया कि सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद, करीब 23 या 24 जुलाई को उन्होंने स्पीकर के सामने यह मुद्दा फिर उठाया था। उनसे एक विशेष पत्र जमा करने के लिए कहा गया था, जिसे 26 जुलाई तक विधिवत जमा कर दिया गया। उन्होंने कहा, 'मैं सौगत रॉय, कीर्ति आजाद और प्रतिमा मंडल के साथ इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए गया था। इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।' बनर्जी ने कहा कि उन्होंने सौगत रॉय और अन्य टीएमसी नेताओं के साथ एक बार फिर स्पीकर से मुलाकात की और 20 सांसदों के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिकाओं का मुद्दा उठाया।
'टीएमसी के चुनाव चिह्न पर जीते थे सांसद'
बनर्जी ने दावा किया कि ये 20 सांसद TMC के 'ट्विन-फ्लावर' यानी दो फूल वाले चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि इन सांसदों ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी की तस्वीर के साथ चुनाव लड़ा था। उन्होंने कहा कि मैं यह साफ करना चाहता हूं कि ये सांसद तृणमूल कांग्रेस के 'ट्विन-फ्लावर' (दो फूलों वाले) चुनाव चिह्न पर चुने गए थे और मतदाताओं के सामने ममता बनर्जी की छवि के साथ चुनाव लड़ा था। अब वे संसद में आए हैं और खुले तौर पर कह रहे हैं कि वे एनडीए का समर्थन करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे हालात में मेरा मानना है कि संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों की जांच की जानी चाहिए और उनकी अयोग्यता के सवाल को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
क्या कहती है संविधान की 10वीं अनुसूची?
संविधान की 10वीं अनुसूची में दल-बदल के आधार पर सांसदों, विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों को अयोग्य ठहराने से जुड़े प्रावधान हैं। टीएमसी ने 19 जून को लोकसभा अध्यक्ष को 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपी थीं। इनमें इन सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी। पार्टी के मुताबिक, इन सांसदों ने घोषणा की थी कि वे 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' में शामिल हो गए हैं।
'दूसरी पार्टी में शामिल होना सदस्यता छोड़ने के बराबर'
टीएमसी का तर्क है कि इन सांसदों ने दूसरे राजनीतिक संगठन में शामिल होकर स्वेच्छा से TMC की सदस्यता छोड़ दी है। पार्टी का कहना है कि सांसदों का विलय संबंधी दावा दल-बदल विरोधी कानून के तहत उन्हें संरक्षण नहीं देता।
अलग समूह की मान्यता पर भी सवाल
स्पीकर के सामने उठाए गए एक अन्य मुद्दे में अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों को बिना औपचारिक मान्यता के एक अलग समूह के तौर पर देखे जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मैं यह भी सवाल उठा रहा हूं कि इन सांसदों को न तो आधिकारिक तौर पर एक अलग समूह के रूप में मान्यता दी गई है और न ही उनके साथ वैसा व्यवहार किया जा रहा है। अगर उन्हें एनसीपीआई के रूप में मान्यता दी जानी है, तो वह फैसला लिया जाना चाहिए। लेकिन मान्यता रोकी नहीं जा सकती, जबकि साथ ही उनके बोलने का समय हमारे आवंटित समय से काटा जा रहा है। जब वे सदन में बोलते हैं, तो उनके नाम 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के तहत ही दिखाई देते हैं।"
27 जुलाई को भी बिरला से मिले थे बनर्जी
बनर्जी ने इससे पहले 27 जुलाई को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी और उन्हें दो पत्र सौंपे थे। इन पत्रों में 20 अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने और लोकसभा में टीएमसी सांसदों के डिवीजन तथा सीट नंबरों में किए गए बदलाव वापस लेने की मांग की गई थी। संविधान की 10वीं अनुसूची और 'लोकसभा सदस्य (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1985' के तहत दायर ये याचिकाएं उस समय पांच सप्ताह से अधिक समय से लंबित थीं। टीएमसी का कहना था कि न तो कोई नोटिस जारी किया गया था और न ही सुनवाई की तारीख तय की गई थी।
28 टीएमसी सांसदों की सीट और डिवीजन में बदलाव पर भी विवाद
टीएमसी ने लोकसभा सचिवालय के 18 जुलाई के उस सर्कुलर पर भी आपत्ति जताई थी, जिसमें उसके 28 सांसदों के डिवीजन और सीट नंबरों में बदलाव किया गया था। पार्टी ने सवाल उठाया कि उसी दिन जारी एक अन्य सर्कुलर में टीएमसी को 28 सांसदों वाली एक ही संसदीय पार्टी के रूप में मान्यता दी गई थी और अभिषेक बनर्जी को उसका नेता बताया गया था। ऐसे में सीट और डिवीजन व्यवस्था में बदलाव को लेकर पार्टी ने आपत्ति दर्ज कराई।
ये भी पढ़ें:
झारखंड के CIP घोटाले में एक्शन: पूर्व डायरेक्टर दयाराम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज; सरेंडर करने का आदेश
मानसून सत्र से पहले बागी सांसदों ने भी की थी मुलाकात
मानसून सत्र शुरू होने से पहले बागी सांसदों ने भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था, एनसीपीआई संसदीय समूह को मान्यता देने और सुदीप बंद्योपाध्याय को फ्लोर लीडर तथा काकोली घोष दस्तीदार को चीफ व्हिप बनाए जाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की थी। इसके बाद 19 जुलाई को हुई सर्वदलीय बैठक में एनसीपीआई को अलग से आमंत्रित किया गया था। इस कदम के विरोध में विपक्षी दलों ने बैठक से वॉकआउट किया था।