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जब भारत ने पूरी दुनिया को कराया योग, संयुक्त राष्ट्र ने भी मानी योग की ताकत

Mon, 14 Aug 2017 11:14 AM IST
amarujala.com- Written by: हरेन्द्र सिंह मोरल
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international yoga day
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योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है। मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है, विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला है तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है।
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यह व्यायाम के बारे में नहीं है, लेकिन अपने भीतर एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है। हमारी बदलती जीवन- शैली में यह चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है। तो आएं एक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को गोद लेने की दिशा में काम करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के संयुक्त राष्ट्र महासभा में 27 सितम्बर 2014 को दिए इसी भाषण के बाद योग ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा।

पीएम मोदी के इसी भाषण के बाद तय हो गया ‌कि दुनिया योग को लेकर जल्द ही किसी बड़े निर्णय की ओर अग्रसर है, और इसकी परिणिति उस समय हुई जब संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून 2015 को पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा कर दी। जिसका पूरी दुनिया ने बाहें फैलाकर स्वागत किया। दुनियाभर में योग को स्‍थापित करने में भारतीय योग गुरुओं का विशेष योगदान रहा है। चाहे मौजूदा दौर में वाहे बाबा रामदेव रहे हों या पुराने समय में बीके अयंगर। 
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भारतीय संस्कृति का अभिन्‍न अंग रहे योग को आज पूरी दुनिया ने आत्मसात कर लिया है और इसका बड़ा श्रेय जाता है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों को। जिन्होंने योग के प्रति दुनिया को एकजुट किया और ये बताया कि कैसे योग से हम खुद को स्वस्‍थ तो रख ही सकते हैं इसके सहारे एकजुट भी रह सकते हैं। मोदी को गंभीरता से सुनने वाली पूरी दुनिया ने उनकी इस बात को भी माना और योग को लेकर उत्साह का प्रदर्शन किया।

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी जहां भी जाते योग और इससे होने वाले फायदे और भारतीय संस्कृति से इसके जुड़ाव का जिक्र जरूर करते, उनकी इस अलख का असर भी जल्द ही दिखने लगा। योग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसा माहौल बना कि हर कोई इसके बारे में जानने के लिए उत्सुक हो गया। इसके बाद सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने पहले भाषण में ही मोदी ने दुनियाभर से योग को अपनाने का आह्वान किया।

पीएम मोदी के संकल्प पर संयुक्त राष्ट्र ने भी अपनी सहमति जताई और 21 जून को हमेशा के लिए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया। शेख मुजीबुर्रहमान ने। इतिहास में इस घटना को भारत की बढ़ती ताकत और उसकी महानता के तौर पर दर्ज किया गया। 
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