Article-370: BJP के घोषणापत्र में कब आया अनुच्छेद-370, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का 2024 चुनाव पर क्या होगा असर?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Tue, 12 Dec 2023 06:57 PM IST
सार
Article 370: 1980 में बनी भाजपा हमेशा से ही जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने के पक्ष में रही है। अनुच्छेद-370 पर पार्टी की असहमति का पहला उल्लेख उसके 1984 के घोषणापत्र में मिलता है।
अनुच्छेद-370
- फोटो : AMAR UJALA
सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद-370 को लेकर सोमवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायालय ने 5 अगस्त 2019 के केंद्र सरकार के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें उसने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को खत्म कर दिया था। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को खत्म करना और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण दो सबसे बड़े चुनावी वादे थे जो दशकों से भाजपा के घोषणापत्र में शामिल रहे।
अब जब फैसला भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के पक्ष में आया तो, पार्टी ने फैसले को ऐतिहासिक करार दिया है। इसके साथ ही पार्टी के तमाम नेताओं ने विपक्ष पर भी करारा प्रहार किया। इस मुद्दे पर संसद में बोलते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अभी भी मौका है सुधर जाओ, नहीं तो जितने बचे हो उतने भी नहीं रह पाओगे, वैसे भी 2024 दो-दो हाथ भी हो जाएगा।
अनुच्छेद-370
- फोटो : AMAR UJALA
सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद-370 को लेकर सोमवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायालय ने 5 अगस्त 2019 के केंद्र सरकार के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें उसने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को खत्म कर दिया था। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को खत्म करना और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण दो सबसे बड़े चुनावी वादे थे जो दशकों से भाजपा के घोषणापत्र में शामिल रहे।
अब जब फैसला भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के पक्ष में आया तो, पार्टी ने फैसले को ऐतिहासिक करार दिया है। इसके साथ ही पार्टी के तमाम नेताओं ने विपक्ष पर भी करारा प्रहार किया। इस मुद्दे पर संसद में बोलते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अभी भी मौका है सुधर जाओ, नहीं तो जितने बचे हो उतने भी नहीं रह पाओगे, वैसे भी 2024 दो-दो हाथ भी हो जाएगा।
article 370
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भाजपा के घोषणापत्र में अनुच्छेद-370 कब और कैसे शामिल हुआ?
1980 में बनी भाजपा हमेशा से ही जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 के हटाने के पक्ष में रही है। यही कारण है दशकों से पार्टी आम चुनावों में इस मुद्दे को शामिल करती आई है। अनुच्छेद-370 पर पार्टी के रुख का पहला सबूत उसके 1984 के घोषणापत्र में मिलता है। 1989 में भाजपा ने अनुच्छेद-370 को खत्म करने का अपना वादा दोहराया, जब आतंक की वजह से कश्मीर अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा था।
1991 में अगले आम चुनाव हुए और वह ऐसा वक्त था जब कश्मीर घाटी से हिंदुओं का पलायन हो चुका था। 1991 के चुनाव भाजपा के घोषणापत्र में अनुच्छेद-370 पर अपना रुख दोहराने के अलावा, घाटी से पाकिस्तानी तत्वों को बाहर निकालने का वादा किया गया था।
पार्टी के 1996 के चुनाव घोषणापत्र में कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर काफी व्यापक दृष्टिकोण था। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए पहली बार 1996 में सत्ता में आया लेकिन बहुमत से दूर रहने के कारण अटल बिहारी वाजपेयी सरकार 13 दिनों में गिर गई।
भाजपा ने 1999 के अपने घोषणापत्र में अनुच्छेद-370 पर कोई जिक्र नहीं किया था। भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के पांच वर्षों के बाद 2004 के लोकसभा चुनावों में अनुच्छेद-370 फिर से पार्टी के विजन दस्तावेज से गायब था।
2009 के बाद से अनुच्छेद-370 एक बार फिर भाजपा के विजन डॉक्यूमेंट में आ गया। भाजपा ने 2009 और 2014 में अपने घोषणापत्र में इस अनुच्छेद को निरस्त करने की वकालत की। 2009 में भाजपा के घोषणा पत्र में 12 बार 'कश्मीर' का उल्लेख किया गया। इसमें अनुच्छेद-370 को रद्द करने, पीओके शरणार्थियों को अधिकार प्रदान करने, कश्मीरी पंडितों को फिर से बसाने, आतंकवाद से निपटने आदि की बात कही गई।
अनुच्छेद-370 को लेकर घोषणापत्र में कहा गया, 'अनुच्छेद-370 जम्मू-कश्मीर के लोगों के राष्ट्रीय मुख्यधारा के साथ पूर्ण एकीकरण के लिए एक मनोवैज्ञानिक बाधा उत्पन्न करता है। भाजपा इस अनुच्छेद को निरस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।'
2014 में भाजपा राज्य पर अपने रुख पर कायम रही। इसने कहा, 'भाजपा अनुच्छेद-370 पर अपना रुख दोहराती है और सभी हितधारकों के साथ इस पर चर्चा करेगी और इस अनुच्छेद को निरस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।'
2019 में भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में छह बार 'कश्मीर' का उल्लेख किया। 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी के घोषणापत्र में कहा गया, 'हम जनसंघ के समय से अनुच्छेद-370 को निरस्त करने तक अपने रुख को दोहराते हैं।'
भाजपा ने वादा किया, वे जब 2019 में दूसरी बार सत्ता में आये तो वादे को पूरा किया। 5 अगस्त 2019 को नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा रद्द कर दिया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया।
अनुच्छेद 370
- फोटो : amarujala.com
अब सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को बरकरार रखा, भाजपा ने ऐतिहासिक बताया
देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायधीशों की पीठ ने सोमवार (11 दिसंबर 2023) को इस मामले में सरकार के निर्णय को सही ठहराया। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने के सरकार के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के फैसले को भाजपा ने ऐतिहासिक करार दिया है।
मंगलवार को अपने वेबसाइट पर लिखे एक लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'अनुच्छेद-370 और 35(A) पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना और मजबूत हुई है।'
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह
- फोटो : एजेंसी
2024 के चुनावों में भी भाजपा इस मुद्दे को सामने रखेगी?
अनुच्छेद-370 को निरस्त करना और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण दो सबसे महत्वपूर्ण चुनावी वादे थे जो भाजपा ने वर्षों से अपने मतदाताओं के सामने करती आई है। सोमवार का आया शीर्ष अदालत का फैसला पार्टी के इन दोनों प्रमुख वादों पर मुहर लगाता है। अयोध्य में बन रहे भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में होने वाले इस कार्यक्रम को यादगार बनाने के लिए व्यापक तैयारी शुरू हो चुकी है।
भाजपा को उम्मीद है कि इन दो ऐतिहासिक उपलब्धियों से पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़ा फायदा मिलेगा। हाल में तीन हिंदी भाषी राज्यों में मिली सफलता से उत्साहित भाजपा आगामी चुनाव में भी अनुच्छेद-370 के मुद्दे को बतौर अपनी उपलब्धि गिनाएगी जैसा कि गत चुनाव में भी वह करती आई है।
इससे पहले सोमवार को अमित शाह से लेकर तमाम भाजपा नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 'इंडिया' गठबंधन को आड़े हाथों लिया। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अनुच्छेद-370 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी आ गया है। फिर भी कांग्रेस के नेता कहते हैं कि वे इसे स्वीकार नहीं करते हैं। मैं अब भी कहता हूं, वापस आ जाओ नहीं तो अब कितने (सदन के लिए चुने गए सांसद) बचे हैं, वह भी नहीं रहेंगे। अगर आप आज भी इस फैसले पर कायम रहना चाहते हैं तो जनता देख रही है- 2024 में मुकाबला होगा और पीएम मोदी तीसरी बार पीएम बनेंगे।