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Shivaji Maharaj: जब औरंगाबाद आए थे छत्रपति शिवाजी महाराज, मराठा राजा को देखने के लिए उमड़ी थी भारी भीड़

Thu, 19 Feb 2026 09:49 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छत्रपति संभाजीनगर

सार

गुरुवार को देश छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मना रहा है। इस अवसर पर उस घटना का याद किया गया है, जब शिवाजी महाराज संभाजीनगर पहुंचे थे। उस समय शिवाजी महाराज की इतनी प्रतिष्ठा थी कि उनकी एक झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई थी। 
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छत्रपति शिवाजी महाराज - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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महाराष्ट्र का छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व नाम औरंगाबाद), जो एक समय हिंदवी स्वराज्य का हिस्सा नहीं था, इतिहास में एक खास जगह रखता है। अपने राज्याभिषेक से आठ वर्ष पहले अप्रैल 1666 में आगरा की यात्रा के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज यहां ठहरे थे। छत्रपति शिवाजी महाराज की औरंगाबाद यात्रा का कई इतिहासकारों ने उल्लेख किया है। गुरुवार को शिवाजी महाराज की जयंती मनाई जा रही है।
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क्या लिखा गया है किताब में
  • दस्तावेजों के अनुसार, तत्कालीन मुगल साम्राज्य के दक्कन प्रांत की राजधानी रहे औरंगाबाद शहर में छत्रपति शिवाजी के आगमन पर बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने उमड़ पड़े थे। यह उस समय मराठा राजा के बढ़ते प्रभाव और प्रतिष्ठा का प्रमाण था। औरंगाबाद का नाम मुगल सम्राट औरंगजेब के नाम पर पड़ा था।
  • मुगल प्रशासनिक अधिकारी भीमसेन सक्सेना ने अपनी आत्मकथा 'तारीख-ए-दिलकुशा' में शिवाजी महाराज की इस यात्रा का उल्लेख किया है। बाद में इतिहासकार जदुनाथ सरकार ने इसका अंग्रेजी अनुवाद किया। इस संस्मरण में शिवाजी महाराज के घुड़सवार दल और उन्हें मिले जनसमर्थन के बारे में लिखा गया है।
  • शिवाजी महाराज की यह यात्रा पुरंदर की संधि के बाद हुई थी, जो मुगल सूबेदार मिर्जा राजा जयसिंह के साथ हुई थी। इसी संधि के तहत शिवाजी महाराज को औरंगजेब से मिलने आगरा जाना था।
  • इसी दौरान अप्रैल 1666 में शिवाजी महाराज संभाजीनगर में रुके थे। इस दौरान उनके साथ करीब 500 सुसज्जित और सशस्त्र सैनिक भी यात्रा कर रहे थे। उन्हें देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी। उनके दल में सोने-चांदी जड़ी पालकी, दो हाथी, सामान ढोने के लिए कुछ ऊंट और सुनहरी सजावट वाला केसरिया-भगवा ध्वज शामिल था।
  • शिवाजी महाराज का वर्णन दुबले-पतले, गोरे रंग और प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में की गई है। उन्होंने उनके नौ वर्षीय पुत्र संभाजी महाराज के आकर्षक व्यक्तित्व का भी उल्लेख किया।
  • भीमसेन सक्सेना ने एक घटना का भी उल्लेख किया है, जिसमें मुगल अधिकारी सैफ शिकन खान ने शिवाजी महाराज का व्यक्तिगत रूप से स्वागत नहीं किया। उन्होंने अपने भतीजे को स्वागत के लिए भेजा, जिससे शिवाजी महाराज नाराज हो गए।
  • जब शिकन खान के भतीजे ने उन्हें बताया कि खान दरबार में उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो शिवाजी महाराज ने कहा, 'यह सैफ शिकन खान कौन है? वह मुझसे मिलने खुद क्यों नहीं आया? यहां उसका क्या काम है?'
  • बाद में खान और अन्य मुगल अधिकारियों ने शिवाजी महाराज से भेंट की। अगले दिन शिवाजी महाराज ने खान के निवास पर जाकर उससे मुलाकात की, जहां उनका उनके पद के अनुरूप सम्मान किया गया। इसके बाद शिवाजी महाराज आगरा के लिए रवाना हो गए। 
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