'मिसाइल मैन' के नाम से मशहूर भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम अब हमारे बीच नहीं रहे। पूरा देश उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उनके जीवन और उनकी बातों और उपलब्धियों को याद कर रहा है। बीबीसी संवाददाता रेहान फजल भी पाकिस्तान के जनरल परवेज मुशर्रफ से अब्दुल कलाम की वो चर्चित मुलाकात, कूटनीतिक शैली, और दूसरी कई दिलचस्प बातें याद कर रहे हैं।
पढ़ें कलाम और उनकी बातें
जब साल 2005 में जनरल परवेज मुशर्रफ भारत आए तो वो तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ-साथ राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से भी मिले। मुलाकात से एक दिन पहले कलाम के सचिव पीके नायर उनके पास ब्रीफिंग के लिए गए।
पीके नायर ने बताया, ''सर कल मुशर्ऱफ आपसे मिलने आ रहे हैं।'' उन्होंने जवाब दिया, ''हां मुझे पता है।'' नायर ने कहा, ''वो जरूर कश्मीर का मुद्दा उठाएंगे। आपको इसके लिए तैयार रहना चाहिए।'' कलाम एक क्षण के लिए ठिठके, उनकी तरफ देखा और कहा, ''उसकी चिंता मत करो। मैं सब संभाल लूंगा।''
तीस मिनट की मुलाकात
अगले दिन ठीक सात बज कर तीस मिनट पर परवेज मुशर्रफ अपने काफिले के साथ राष्ट्रपति भवन पहुंचे। उन्हें पहली मंजिल पर नॉर्थ ड्राइंग रूम में ले जाया गया। कलाम ने उनका स्वागत किया। उनकी कुर्सी तक गए और उनकी बगल में बैठे। मुलाकात का वक्त तीस मिनट तय था। कलाम ने बोलना शुरू किया, ''राष्ट्रपति महोदय, भारत की तरह आपके यहाँ भी बहुत से ग्रामीण इलाके होंगे। आपको नहीं लगता कि हमें उनके विकास के लिए जो कुछ संभव हो करना चाहिए?'' जनरल मुशर्रफ हाँ के अलावा और क्या कह सकते थे।
वैज्ञानिक भी कूटनीतिक भी
कलाम ने कहना शुरू किया, ''मैं आपको संक्षेप में ‘पूरा’ के बारे में बताउंगा। पूरा का मतलब है प्रोवाइंडिंग अर्बन फैसेलिटीज टू रूरल एरियाज।'' पीछे लगी प्लाजमा स्क्रीन पर हरकत हुई और कलाम ने अगले 26 मिनट तक मुशर्रफ को लेक्चर दिया कि ‘पूरा’ का क्या मतलब है और अगले 20 सालों में दोनों देश इसे किस तरह हासिल कर सकते हैं।
तीस मिनट बाद मुशर्रफ ने कहा, ''धन्यवाद राष्ट्रपति महोदय। भारत भाग्यशाली है कि उसके पास आप जैसा एक वैज्ञानिक राष्ट्रपति है।'' हाथ मिलाए गए और नायर ने अपनी डायरी में लिखा, ''कलाम ने आज दिखाया कि वैज्ञानिक भी कूटनीतिक हो सकते हैं।''