प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी ने भुगतान सेवा शुरू करने की तारीख तय नहीं की है, लेकिन नियम व नीति में बदलाव से हम एक कदम आगे बढ़ गए हैं। बदली नीतियों के तहत व्हाट्सएप भुगतान सेवाओं का इस्तेमाल करने पर उपभोक्ता की अतिरिक्त जानकारियां भी अपने पास रख सकती है। इन सूचनाओं में दिन, समय और लेन-देन का रेफरेंस नंबर शामिल है। इसके अलावा जब कोई व्हाट्सएप उपभोक्ता भुगतान करेगा तब कंपनी भेजने व पाने वाले का नाम और उनका भीम-यूपीआई आईडी संग्रह कर सकती है।
संवेदनशील जानकारी का नहीं किया जाएगा संग्रह
पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने आरोप लगाया था कि व्हाट्सएप का यूपीआई भुगतान प्लेटफार्म सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा है। यह आरबीआई के दिशा-निर्देशों पर खरा नहीं उतर रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने सभी भुगतान सेवा प्रदाताओं को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि लेनदेन का डाटा भारत में ही संग्रह होना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एनपीसीआई को इसकी जांच का निर्देश दिया था।