बता दें कि पिछले गुरुवार को सैम पित्रोदा ने भी एक बयान देकर कांग्रेस पार्टी को संकट में डाल दिया था। खुद राहुल गांधी को पित्रोदा के बयान पर सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी। राहुल ने इस पर काफी नाराजगी भी जताई थी। सैम पित्रोदा ने कहा था कि अब क्या है 1984 का। आपने (नरेंद्र मोदी) पांच साल में क्या किया, अब उसकी बात करिए। 1984 में जो हुआ, वो हुआ।
उनके इस बयान को भुनाने में भाजपा ने कोई कसर नहीं छोड़ी। पीएम नरेंद्र मोदी ने उनके इस बयान पर कहा, कांग्रेस पार्टी आजकल न्याय की बात करने लगी है। इस पार्टी को 1984 के दंगों का हिसाब देना होगा। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा था, पित्रोदा का बयान हैरान करने वाला है। कोई भी इसकी उम्मीद नहीं कर सकता।
जावड़ेकर ने कहा कि पित्रोदा कहते हैं कि 1984 में नरसंहार हुआ तो क्या हुआ। देश में इस तरह का बयान स्वीकार्य नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने पहले कहा कि यह पित्रोदा का निजी बयान है। पार्टी का इससे कोई लेना देना नहीं है। इससे भी जब बात नहीं बनी तो पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को सामने आना पड़ा। उन्होंने लोगों से पित्रोदा के बयान पर खेद प्रकट किया।
अब मणिशंकर अय्यर ने दो साल पहले पीएम मोदी को नीच बताने वाले अपने बयान को सही ठहरा कर एक बार फिर कांग्रेस पार्टी को संकट में डाल दिया है। उनके इस बयान के बाद भाजपा दोबारा से कांग्रेस पर हमलावर हो गई है। मंगलवार सुबह कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा, यह मणिशंकर अय्यर का निजी बयान है। उन्होंने अपने लेख के नीचे लिखा भी है।
कांग्रेस की इस सफाई से जब बात नहीं बनी तो शाम को एक प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, कांग्रेस पार्टी इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने का समर्थन नहीं करती। हम किसी भी नेता पर व्यक्तिगत तौर पर ऐसी किसी भी टिप्पणी के खिलाफ हैं। कांग्रेस मुद्दों की राजनीति करती है। मणिशंकर अय्यर के बयान को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने इशारा किया कि इस बार यह मामला ऊपर तक जा रहा है। जब यह मामला उचित प्लेटफॉर्म पर पहुंचेगा तो कार्रवाई भी तय है।