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क्या होगा कोर्ट में मौजूद जयललिता की साड़ी, चप्पलें और शराब के गिलासों का

Fri, 09 Dec 2016 01:32 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला दिल्ली
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तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद, उन पर चल रहे आय से अधिक केस भी खत्म हो गया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि कर्नाटक कोर्ट में जब्त उनकी 10,500 साड़ियां, 750 चप्पलें और 500 शराब के गिलासों क्या होगा।
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जयललिता के निधन के बाद उनकी पार्टी चाहती है कि जयललिता से जुड़ी इन सभी सामानों को पार्टी को वापस कर दिया जाए, ताकि पार्टी उसका इस्तेमाल म्यूजियम में कर सके। इसको लेकर एआईएडीएमके के नेताओं को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस फैसले पर सुनवाई करेगा।

साथ ही कोर्ट द्वारा जब्त सभी संपत्ति और सामन को वापस करेगा, ताकि एआईएडीएमके के नेता उन्हें जयललिता की याद को तौर पर संग्रहालय में रख सके। उम्मीद है कि अवैध संपत्ति के इस मामले पर फैसला जून 2017 तक आ जाएगा। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री की मौत के बाद तमिलनाडु सरकार ने फैसला किया है कि वह फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में ज्ञापन भी देगी, जिससे मामले की सुनवाई जल्दी हो सकते।
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कर्नाटक कोर्ट के वकील का कहना है कि अगर कोर्ट जयललिता को दोषी पाता है तो उनकी सारी संपत्ति कोर्ट में जब्त रहेगी, और अगर वह दोषमुक्त होती है तो अदालत उनके उत्ताधिकारी को इनका सामान सौंप देगी।

गौरतलब हो कि 1996 से जयललिता पर आय से अधिक संपत्ती का मामला चल रहा है। आयकर विभाग की छापेमारी में 10,500 साड़ियां, 750 चप्पलें और 500 शराब के गिलास के साथ लगभग 21.28 किलो सोने की ज्वैलरी बरामद की,

जिनकी कीमत लगभग 3.5 करोड़ रूपये है, इसके अलावा 1,250 किलों चांदी के सामान भी मिला जिनकी कीमत लगभग 2 करोड़ रूपये है। इन सभी सामान की निगरानी कर्नाटक पुलिस की सुरक्षा में कर्नाटक के सिविल कोर्ट में की जा रही है।
 
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बताया जा रहा है कि इस केस की सुनवाई के लिए जयललिता ने तमिलनाडु कोर्ट से अनुरोध किया था कि डीएमके की सत्ता के दौरान उनके केस की सुनवाई तमिलनाडु कोर्ट में न हो। जिसको लेकर बीजेपी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने अदालत में एक ज्ञापन सौंपा था और उसके बाद उनका केस कर्नाटक की विशेष अदालत में चला गया।

विशेष कोर्ट ने उन्हें 2014 में दोषी माना था, वहीं कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2015 में विशेष अदालत के फैसला को बदल दिया था। जिसके बाद कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जब से फैसला विचाराधीन है। एआईएडीएमके के नेताओं को उम्मीद है कि इस पर जून 2017 तक कोर्ट अपना फैसला सुना देगा। 
 
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