ताजमहल के संरक्षण को लेकर अथॉरिटी की अगंभीरता पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने आधे-अधूरे विजन डॉक्युमेंट्स (दृष्टि पत्र) लेकर आई उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि संरक्षण के नाम पर यहां कॉमेडी शो और तमाशा चल रहा है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि ऐसे में अगर यूनेस्को ने ताज से विश्व धरोहर का तमगा हटा लिया तो क्या करेंगे।
पीठ ने कहा, आखिर फाइनल डॉक्युमेंट्स क्यों नहीं पेश किया गया। क्या हमारे पास इसकी जांच करने का ही काम रह गया है? इस पर यूपी सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि दृष्टि पत्र चार महीने में पेश करने के लिए कहा गया था। स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किट्रेचर ने इसे तैयार किया है।
पीठ ने हैरानी जताई कि ताजमहल के संरक्षण की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की है लेकिन विजन डॉक्युमेंट्स का मसौदा तैयार करने में उससे संपर्क नहीं किया गया।
पीठ ने यूपी सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा कि क्या विजय डॉक्यूमेंट्स का ड्राफ्ट की प्रति यूनिस्को को दी गई है? विश्व धरोहर का तमगा हटाने के सवाल पर अटार्नी जनरल ने कहा कि ताजमहल विश्व के सात अजूबों में से एक है। अगर इससे यह टैग हटा लिया गया तो बहुत बड़ा झटका होगा। मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी।