बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने 2023-24 में अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया था कि भारत में बीमा सेवाओं की पहुंच केवल 3.7 प्रतिशत आबादी तक सिमट गई है। यह इसके पिछले वर्ष के चार प्रतिशत की तुलना में काफी कम था। यह कमी इस कारण अधिक चिंताजनक थी क्योंकि बीमा सेवाओं में लगातार दूसरे वर्ष गिरावट दर्ज की गई थी। यदि जीवन बीमा सेवाओं की बात करें तो इसमें भी गिरावट दर्ज की गई थी। 2022-23 में जीवन बीमा सेवाओं की पहुंच तीन प्रतिशत लोगों तक थी, जो कि इसके अगले वित्त वर्ष यानी 2023-24 में घटकर 2.8 प्रतिशत लोगों तक ही रह गई थी।
भारत में बीमा उत्पादों की पहुंच अभी तक 2021-22 में सर्वाधिक 4.2 प्रतिशत तक रही है। इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट ही देखी जा रही है। वैश्विक स्तर पर बीमा सेवाओं की औसत पहुंच दर सात प्रतिशत दुनिया के करीब है। इसे देखते हुए समझा जा सकता है कि भारत में बीमा सेवाओं की पहुंच बहुत सीमित है।
देश में बीमा सेवाओं की लोगों तक कम पहुंच को देखते हुए सरकार लगातार ऐसे उपाय कर रही थी जिससे इसकी पहुंच लोगों तक हो सके और लोगों को इसका फायदा मिल सके। इसके लिए पहले घरेलू निजी क्षेत्र को इसमें प्रवेश दिया गया था जिससे इसमें कुछ सुधार हुआ था, लेकिन इसके बाद भी इस सेक्टर में बड़े सुधार की गुंजाइश थी।
कब कितने निवेश की अनुमति
बीमा उत्पादों की पहुंच लोगों तक बढ़ाने के लिए सरकार ने 2000 में इस सेक्टर में पहले 26 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति दी। 2015 में इसे बढ़ाकर 49 प्रतिशत कर दिया गया। 2021 में सरकार ने इसे इससे भी आगे बढ़ाते हुए 74 प्रतिशत कर दिया था और अब 2025 में इसे 100 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे शहरी क्षेत्रों के उच्च आय वर्ग के लोगों के बीच बीमा उत्पादों को पहुंचाने में सहायता मिलेगी। विदेशी पूंजी निवेश के कारण इस सेक्टर में लाखों युवाओं को नौकरियां भी मिलेंगी।
वित्त मंत्री ने क्या कहा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीमा सेक्टर में सौ फीसदी विदेशी पूंजी निवेश को अनुमति देने के समय कहा है कि इससे इस सेक्टर में पूंजी निवेश बढ़ेगा और इस सेक्टर में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा। इससे उच्च और मध्यम वर्ग के लोगों के बीच बीमा सेवाओं को लोकप्रिय बनाने में सहायता मिलेगी। बीमा सेवाओं को लेकर जेन जी के अंदर बहुत कम उत्साह है। अंतरराष्ट्रीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों की आक्रामक और लोकप्रिय बाजार रणनीति को देखते हुए माना जा रहा है कि वे युवाओं के बीच भी बीमा सेवाओं को लेकर एक जागरूकता पैदा कर सकेंगी।
कितने लोग उठा रहे स्वास्थ्य बीमा का लाभ
लैंसेट की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में केवल 29.8 प्रतिशत महिलाएं और 33.3 प्रतिशत पुरुष ही किसी न किसी प्रकार की हेल्थ इंश्योरेंस सेवा का लाभ उठा रहे हैं। यह आंकड़ा भी 15 से 49 वर्ष के बीच के लोगों का है। इस आंकड़े की एक सच्चाई यह है कि इस आयु वर्ग के ज्यादातर पुरुष और महिलाएं किसी न किसी संगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं जहां कंपनियों की ओर से उन्हें कम कीमत पर और लगभग अनिवार्य स्वास्थ्य सेवा दी जाती है। लेकिन व्यक्तिगत तौर पर स्वास्थ्य बीमा लेने वाले लोगों की संख्या अभी भी काफी कम है।
इस संख्या में बड़ी हिस्सेदारी आयुष्मान योजना का लाभ उठाने वाले लोगों की है। इस योजना में केंद्र सरकार और कुछ राज्य सरकारों के सहयोग से पांच लाख रुपये से लेकर दस लाख रूपये तक का मुफ्त इलाज कराने की सुविधा दी जाती है। लेकिन यदि संगठित कंपनियों और आयुष्मान योजना को छोड़ दें तो स्वतंत्र कंपनियों से स्वास्थ्य बीमा लेने वाले लोगों की संख्या अभी भी बहुत कम है। सरकार लगातार इसे बढ़ाने के लिए विभिन्न उपाय कर रही है।
शहरों में ज्यादा, ग्रामीण क्षेत्र में कम
भारत में अभी भी स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार मुख्य तौर पर शहरी क्षेत्रों तक सीमित है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बहुत कम संख्या में लोग बीमा सेवाओं का उपयोग करते हैं। केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना के कारण बीमा सेवा के दायरे में आने वाले लोगों का प्रतिशत अप्रत्याशित तौर पर बढ़ा है, लेकिन अभी भी शहरी लोग ही बीमा सेवाओं के दायरे में हैं। देश की एक बड़ी आबादी बीमा और विशेषकर स्वास्थ्य सेवा बीमा से बहुत दूर है। सरकार विदेशी निवेश बढ़ाकर इस सेवा का लाभ लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।