श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर देश की नजरें टिकी हुई हैं। इसरो ने इस साल के पहले बड़े ऑर्बिटल मिशन पीएसएलवी-सी62 को आज लॉन्च किया। यह मिशन सुबह 10:17 बजे प्रथम लॉन्च पैड से रवाना हुआ। हालांकि प्रक्षेपण के तीसरे चरण में तकनीकी खराबी आ गई। इसरो के अनुसार रॉकेट तय रास्ते से भटक गया।
यह सिर्फ एक नियमित प्रक्षेपण नहीं है। EOS-N1 और 15 उपग्रहों को सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित करने वाला यह मिशन वैश्विक स्मॉल-सैटेलाइट लॉन्च बाजार में भारत की बढ़ती पकड़ को दिखाता है। EOS-N1 के अलावा लॉन्च किए गए कुल 15 सैटेलाइट्स में 7 भारत के हैं, जबकि 8 विदेशी सैटेलाइट्स भी इस मिशन का हिस्सा हैं। विदेशी पेलोड में फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूनाइटेड किंगडम के सैटेलाइट शामिल हैं।
मिशन का प्रमुख उपग्रह EOS-N1, जिसे 'अन्वेषा' नाम दिया गया है। यह रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित एक उन्नत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है।
सैटेलाइट आधारित HRS (हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग) तकनीक को डिफेंस के लिए एक तरह का सीक्रेट वेपन माना जा रहा है। इसके इस्तेमाल से सेना को कई रणनीतिक फायदे मिलते हैं।
इस मिशन की बड़ी खासियत है आयुलसैट, जिसे बंगलूरू की स्टार्टअप ऑर्बिटएड एयरोस्पेस ने विकसित किया है। यह भारत के पहले ऑन-ऑर्बिट ईंधन भरने वाले मॉडल का टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर है। इसका लक्ष्य माइक्रोग्रैविटी में डॉकिंग और ईंधन ट्रांसफर सिस्टम का परीक्षण करना है, जिससे भविष्य में उपग्रहों की उम्र बढ़ाई जा सके और स्पेस डेब्रिस की समस्या कम हो।
PSLV-C62 के साथ MOI-1 उपग्रह भी भेजा जा रहा है। यह हैदराबाद की स्टार्टअप्स टेकमी2स्पेस और ईऑन स्पेस लैब्स का संयुक्त प्रयास है। MOI-1 भारत की पहली ऑर्बिटल एआई-इमेज लैब है, जो सैटेलाइट पर ही डेटा प्रोसेसिंग करती है। इससे रियल-टाइम एनालिसिस संभव होगा। खास बात यह है कि उपयोगकर्ता सिर्फ $2 (करीब ₹180) प्रति मिनट में प्रोसेसर का समय किराए पर ले सकेंगे। इसे 'दुनिया का पहला स्पेस साइबरकैफे' कहा जा रहा है।
MOI-1 के भीतर मौजूद है MIRA, दुनिया की सबसे हल्की स्पेस टेलीस्कोप। सिर्फ 502 ग्राम की यह टेलीस्कोप एक ही ठोस फ्यूज्ड सिलिका ब्लॉक से बनी है। इसकी सिंगल-पीस संरचना इसे लॉन्च के दौरान होने वाले तीव्र कंपन से सुरक्षित रखती है और फोकस को स्थिर बनाए रखती है।
अब तक छह से ज्यादा देश हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट (HySIS) लॉन्च कर चुके हैं। भारत के अलावा अमेरिका, चीन, जर्मनी, जापान, इटली और पाकिस्तान इस तकनीक वाले सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज चुके हैं। भारत ने अपनी पहली हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट 29 नवंबर 2018 को लॉन्च की थी।
HySIS नाम के उस सैटेलाइट का वजन करीब 380 किलोग्राम था और यह 55 स्पेक्ट्रल बैंड्स में रोशनी को डिटेक्ट करने में सक्षम था। नया सैटेलाइट अन्वेषा, HySIS का अपग्रेडेड संस्करण है, जिसकी हाइपरस्पेक्ट्रल क्षमता पहले से कहीं अधिक उन्नत है।
यह मिशन इसरो के भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल PSLV की 64वीं उड़ान है। अब तक PSLV 63 सफल मिशन पूरे कर चुका है। इसी रॉकेट के जरिए चंद्रयान-1, मार्स ऑर्बिटर मिशन (MOM) और आदित्य-L1 जैसे अहम मिशन लॉन्च किए गए हैं।
PSLV का पिछला मिशन PSLV-C61 था, जिसमें 18 मई 2025 को EOS-09 सैटेलाइट लॉन्च किया गया था। हालांकि, तीसरे चरण में आई तकनीकी खामी के कारण वह मिशन पूरी तरह सफल नहीं हो पाया था।
आज जब PSLV के इंजन बंगाल की खाड़ी के तट पर गूंजेंगे, भारत एक बार फिर खुद को एक भरोसेमंद और नवोन्मेषी स्पेस लॉन्च हब के रूप में स्थापित करेगा। आसमान तैयार है और इसरो भी।