देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक महिला आईपीएस आईजी के खिलाफ सीवीसी और फोर्स हेडक्वार्टर को बिना नाम से जो शिकायत मिली है, उनमें सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए महिला आईपीएस के खिलाफ शिकायतों की फेहरिस्त शीर्ष अफसरों तक पहुंची है। सीआरपीएफ के शीर्ष नेतृत्व ने भी माना है कि उनके ध्यान में शिकायत है। सीवीसी के नियमानुसार, मामले की जांच होगी।
पहली शिकायत में लिखा है कि महिला आईपीएस आईजी ने किस तरह से जम्मू कश्मीर में अपनी तैनाती के दौरान सीआरपीएफ में राशन खरीद के जरिए और सीक्रेट फंड का दुरुपयोग कर शेयर मार्केट में पैसा लगाया है। अब इस मामले की कड़ियां, 'टैक्स हेवन' देश सिंगापुर से जुड़ रही हैं। सीआरपीएफ की महिला आईपीएस आईजी का लिंक, कथित 14 मुखौटा कंपनियों के साथ बताया जा रहा है। इस केस में सीआरपीएफ मुख्यालय ने अपनी महिला आईपीएस आईजी पर मेहरबानी दिखाई है। अब मैडम आईपीएस आईजी को 'टैक्स हेवन' देश पुर्तगाल में 'आध्यात्मिक शरण' में जाने के लिए 49 दिन की छुट्टी दे दी गई है।
यह मामला सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में है। हालांकि शिकायतकर्ता ने अपना नाम नहीं बताया है, इसलिए उक्त पत्र पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। मामले की गंभीरता से जांच होगी, इस पर संशय बना हुआ है। केंद्र सरकार के नियमानुसार, अगर शिकायत गुमनाम है या उसे किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से दिया गया हो तो उस पर कार्रवाई नहीं हो सकती। अधिकांश मामलों में इस तरह की शिकायत को फाइल कर दिया जाता है।
दूसरी शिकायत में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने यह दावा किया है कि उसने सीआरपीएफ की महिला आईपीएस आईजी 'तेलंगाना कैडर', की आईटीआर फाइल की थी। महिला आईजी सात वर्ष से प्रतिनियुक्ति पर सीआरपीएफ में हैं। उसने अपनी शिकायत में कई ऐसी मुखौटा कंपनियों का जिक्र किया है, जिसमें महिला आईपीएस आईजी लाभार्थी हैं। कंपनी की एक निदेशक उनकी वह बहन है, जो खुद महिला आईजी पर निर्भर है। यह बात महिला आईपीएस ने अपनी आईटीआर में बताई है। फिलहाल तेलंगाना कैडर की महिला आईपीएस आईजी, सीआरपीएफ के साउथ सेक्टर में तैनात हैं।
सीआरपीएफ की महिला आईपीएस आईजी अब पुर्तगाल जा रही हैं। उनका 49 दिन का अवकाश मंजूर कर लिया गया है। यह अवकाश मार्च 29 से 16 मई तक रहेगा। खास बात है कि महिला आईपीएस को सीआरपीएफ की प्रतिनियुक्ति से अपने मूल कैडर में 2 अप्रैल 2025 तक वापस जाना है। महिला आईपीएस ने पुर्तगाल की यात्रा का मकसद 'आध्यात्मिक शरण' बताया है। इससे पहले वे सिंगापुर और मॉरीसस जैसे 'टैक्स हेवन' यानी देशों की यात्रा कर चुकी हैं।
टैक्स हेवन देश, ये ऐसे मुल्क होते हैं, जहां अन्य देशों की तुलना में टैक्स बहुत कम लगता है या बिलकुल नहीं लगता। ये ऐसे देश होते हैं, जो विदेशी नागरिकों, निवेशकों और उद्यमियों को यह सुविधा प्रदान करते हैं कि वे उस देश में रहकर जो भी कारोबार या निवेश करेंगे तो उसके लिए उन्हें 'टैक्स' नहीं देना होगा। कुछ देशों में टैक्स की दरें बहुत ही कम रखी गई हैं। 'टैक्स हेवन' देश, किसी दूसरे पक्ष के साथ कोई भी वित्तीय जानकारी साझा नहीं करते हैं। यही वजह है कि ये देश उन लोगों के लिये स्वर्ग (हेवन) के समान हैं, जो टैक्स चोरी कर अपना रुपया इन देशों में जमा कर देते हैं।
बिना नाम से सीवीसी व सीआरपीएफ मुख्यालय तक अपनी शिकायत पहुंचाने वाले एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने यह दावा किया है कि महिला आईपीएस का संबंध कई कंपनियों से रहा है। ये कंपनियां मुखौटा कंपनियां हैं, जहां काले धन को सफेद किया जाता है। मैसर्ज देविक अर्थ प्राइवेट लिमिटेड में चार निदेशक रहे हैं। इनमें परेश नानूभाई त्रिवेदी नोमिनेट डायरेक्टर, श्रीकांथ सोला डायरेक्टर के अलावा महिला आईपीएस की दो बहन शिवानी सिन्हा और शगुन सिन्हा शामिल हैं। श्रीकांथ सोला, शिवानी के पति हैं। शिकायतकर्ता अकाउंटेंट के मुताबिक, परेश नानूभाई 14 शैल कंपनियों का निदेशक है। ये कंपनियां एक ही पते पर बनी हैं। सभी कंपनियां दिसंबर 2018 में बनाई गई थी। कंपनी की पेडअप केपिटल 10 लाख रुपये थी।
कंपनियों में महिला आईपीएस की बहनों का सोर्स फंड नहीं है। तीनों निदेशकों को 60 लाख रुपये सालाना वेतन मिल रहा था। कंपनी नुकसान में चलती रही। वजह, ये कंपनियां रियल आपरेशन में नहीं रही। परेश नानूभाई, जिन 14 कंपनियों में निदेशक हैं, उनका पेडअप केपिटल दस हजार रुपये से एक लाख रुपये तक रहा है। इतनी राशि में बड़े फायदे का कारोबार होना मुश्किल है। ये शैल कंपनियां हैं। महिला आईपीएस आईजी, इन कंपनियों में लाभार्थी रही हैं।
शिकायत के अनुसार, इन कंपनियों में 10 करोड़ रुपये निवेश किए गए। इस बाबत अखबारों में खबरें भी छपी थीं। ब्लू अशवा केपिटल ने ब्लू अशवा संपदा को पैसा दिया। उसने देविक अर्थ का सौ रुपये वाला एक शेयर, 4462.30 रुपये में खरीदा। यानी ब्लू संपदा लिमिटेड कंपनी ने शेयर खरीदे और ब्लू अशवा केपिटल को बेच दिए। कुल 21819 शेयर बेचे गए। इस सौदे में 10 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। शिकायत में इस सौदे को हवाला लेनदेन बताया गया है। सिंगापुर की कंपनी ब्लू अशवा संपदा फंड, ब्लू अशवा केपिटल और ब्लू अशवा इनो लैब प्रा. लि. इसे मैनेज करती हैं।
इन्होंने इस सौदे में अपना 21 लाख रुपये कमीशन काट लिया। कंपनी ने इसके जरिए ग्लोबल मार्केट में निवेश की तैयारी की। शिकायत में ब्लू अशवा संपदा कंपनी का पंजीकृत एड्रेस सिंगापुर का है, जबकि ब्रांच दफ्तर मुंबई में है। आरोप है कि यह काले पैसे को सफेद करने का तंत्र है। शिकायत में लिखा है कि ब्लू अशवा संपदा कंपनी ने पैसा लिया था। उसे अपने रिकॉर्ड में भी दिखाया है। सवाल है कि वह पैसा ब्लू अशवा केपिटल के पास कहां से आया। वहीं से वह पैसा ब्लू अशवा संपदा में भेजा गया था। दोनों कंपनी एक ही व्यक्ति की हैं।
कहा गया कि कंपनी की ग्रोथ के लिए पैसे लिए हैं। इस पैसे से बैंक का म्यूचुअल फंड खरीदा गया। कुछ समय बाद उसे बेच दिया गया। थोड़ा बहुत लाभ हुआ। बाकी का पैसा वेतन देने में खर्च हो गया। इस तरह काला पैसा सफेद बन कर वापस कंपनी के पास आ गया। महिला आईपीएस आईजी खुद भी लाभार्थी हैं। जो भी व्यक्ति पेडअप केपिटल लगाते हैं तो वह खुद निदेशक नियुक्त करता है। कंपनी के पास कोई मैन पावर भी नहीं है। जो निदेशक है, वह दूसरी 14 अन्य मुखौटा कंपनियों का भी निदेशक है। ऐसे में कंपनी के कामकाज पर सवाल खड़े होते हैं।
पहली शिकायत में लिखा था कि महिला आईपीएस आईजी ने किस तरह से कश्मीर में अपनी तैनाती के दौरान सीआरपीएफ में राशन खरीद के जरिए और सीक्रेट फंड का दुरुपयोग कर शेयर मार्केट में पैसा लगाया है। इस बाबत बल मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, हां यह शिकायत तो है, मगर भेजने वाले का नाम नहीं है। शिकायत में महिला आईपीएस अधिकारी पर कई तरह के आरोप लगे हैं। सीआरपीएफ में प्रतिनियुक्ति पर आई अधिकारी ने शेयर और स्टॉक में करीब चार करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसके लिए फर्जी कंपनी बनाई गई। यह बात भी शिकायत में लिखी है कि वह महिला अधिकारी, छह-सात वर्ष पूर्व सीआरपीएफ में प्रतिनियुक्ति पर आई थीं।
वित्तीय वर्ष 2019-20 तक उक्त अधिकारी के आयकर रिटर्न में कोई भी लंबी अवधि या छोटी अवधि के दौरान शेयरों से कोई कमाई नहीं दिखाई गई है। म्यूचुअल फंड खरीदने की कोई वित्तीय क्षमता नजर नहीं आई। ये सब बातें शिकायत में कही गई हैं।
उग्रवाद ग्रस्त क्षेत्र में तैनाती के दौरान उक्त महिला अधिकारी के नियंत्रण में पर्याप्त मात्रा में सीक्रेट सर्विस फंड रहा था। यह भी आरोप है कि उस क्षेत्र में बल की सभी यूनिट, बटालियन व ग्रुप सेंटर के लिए राशन की सिंगल वेंडर से खरीददारी की गई। शिकायत में लिखा है कि 2020-21 के दौरान इस फंड से चालीस लाख रुपये म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए। चार लाख से ज्यादा डिविडेंट मिला। इसे आयकर रिटर्न में वेतन के अलावा अन्य स्त्रोत से हुई आय के तौर पर दिखाया गया है। एमएस डिवाइस अर्थ, नाम से बंगलुरु में कंपनी खोली गई। इसे लोन दिया गया।
करीब डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई। इसे भी आयकर रिटर्न में दिखाया गया है। कहा गया है कि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी वालों को अगर कर्ज लेना होता है तो वह निदेशक से लेंगे या निकटवर्ती रिश्तेदारों से। इसमें बहुत करीबी लोग भी शामिल हैं। शिकायत में यह आरोप लगा है कि यह एक मुखौटा कंपनी है। इस कंपनी की स्थापना दिसंबर 2018 में हुई। सोना बाथ, स्टीम बाथ, सलून से संबंधित सामग्री, मसाज रूम, एस्ट्रोलोजिकल, मेरिज ब्यूरो, शूज साइनर, कुली सप्लाई करने वाला, वेले कार पॉर्कर, सिक्का डालकर फोटो निकालने वाली मशीन, ये सब सेवाएं, इस कंपनी की सर्विस में दिखाई गई हैं। हालांकि इसके लिए बड़े पैमाने पर गोदाम की जरुरत होती है। वह कहां पर स्थित है, शिकायत में इसका कोई जिक्र नहीं किया गया है।
शिकायत के मुताबिक, दो नजदीकी रिश्तेदार इस कंपनी को चला रही हैं। वे आपस में बहन बताई गई हैं।
खास बात है कि दोनों बहनों में से एक बहन, उक्त महिला अधिकारी पर निर्भर है। दोनों ने मिलकर लगभग एक करोड़ चालीस लाख रुपये लगाए। दूसरी बहन की आय का स्त्रोत क्या है। ये पता नहीं चल सका है। कंपनी में दोनों बहनों का शेयर होल्डर बीस प्रतिशत है। इसका मतलब शेल कंपनी में उक्त महिला अधिकारी लाभकारी डायरेक्टर है। यह अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968, के खिलाफ है। कोई भी सरकारी अधिकारी, लाभ का पद नहीं ले सकता।
शिकायत में कहा गया है कि यह कंपनी, खुद को नुकसान में भी दिखाती है। वजह, ये धन शोधन कंपनी है। इसका न कॉरपोरेट आफिस है, न गोदाम है और न ही कोई रजिस्ट्रड एड्रेस है। 2022-23 का असेसमेंट ईयर आईटीआर जुलाई 2022 में फाइल किया गया है। इसमें लांग टर्म केपिटल गेन 31 लाख रुपये दिखाया है। लगभग 42 लाख रुपये के शेयर खरीदे गए, जिन्हें करीब 73 लाख रुपये में बेच दिया गया। शिकायत में लिखा है कि ऐसा लाभ कमाने वाली वे एकमात्र अधिकारी होंगी। पहले ही वर्ष में इतना कमा लेना आसान नहीं होता। ये काले धन को सफेद बनाने का एक तरीका है।
शिकायत में लिखा है कि 2020-21 और 2021-22 के दौरान लगभग दो करोड़ आठ लाख रुपये शेयर में निवेश किए गए। आईटीआर में लिखा है। इसमें से 42 लाख रुपये के शेयर बेच दिए गए। बाकी एक करोड़ 66 लाख रुपये बच गए। उक्त अधिकारी का वेतन तो इतना नहीं है। ऐसे में दो करोड़ आठ लाख रुपये कहां से आए। आय के स्त्रोत की सही व्याख्या नहीं की गई है। 2022-23 के वित्तीय वर्ष में लगभग एक करोड़ 30 लाख रुपये, शेयरों में निवेश किए गए। 2022-23 के वित्तीय वर्ष में ही लगभग एक करोड़ 30 लाख 82 हजार रुपये में बेच दिए गए। आईटीआर में इसे 2023-24 के असेसमेंट ईयर में दिखाया गया है।
शिकायत के मुताबिक, इन सभी का स्त्रोत कहां है, क्या है, ये किसी को नहीं पता। इसके बाद 2023-24 में लगभग 54 लाख रुपये के शेयर खरीदे गए, जिन्हें उसी वर्ष में करीब 61 लाख रुपये में बेच दिया गया। ये सब जानकारी आईटीआर में दी गई है। बाकायदा पेन नंबर भी लिखा है। शिकायत के अनुसार, 2023-24 में स्टेट बैंक में 35 लाख रुपये की एफडी कराई गई। दो लाख रुपये से ज्यादा ब्याज मिला। तीन बैंकों के साथ लेन देन बताया गया है। वित्त वर्ष 2021-22 से लेकर 2023-24 तक कुल 4 करोड़ रुपये शेयरों में निवेश किए गए। इसके अलावा 35 लाख रुपये की एफडी भी थी। यह सब, उक्त महिला आईपीएस के तय वेतन से बहुत ज्यादा था। करीब 99 लाख रुपये शेल कंपनी में निवेश होने का आरोप है।
दूसरी तरफ एक बैंक खाते में कोई खर्च भी नहीं दिख रहा। सरकारी नियमों के अनुसार, किसी अधिकारी द्वारा ऐसा करना, अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के खिलाफ है। शिकायत के अनुसार, महिला अधिकारी ने अपने वेतन से कोई निवेश नहीं किया है। आरोप है कि सारा पैसा राशन खरीद के कथित कमीशन और सीक्रेट फंड के दुरुपयोग से मिला है। ये सब कुछ रिकॉर्ड पर है।
महिला अधिकारी ने लव यू जिंदगी नाम से कोर्स शुरु कराया, जिसकी मंजूरी बल मुख्यालय से नहीं ली गई। इस कोर्स में कई प्रवक्ताओं को बुलाया गया। यहां पर फंड के दुरुपयोग के आरोप लगे। सिविक एक्शन फंड में दुरुपयोग की बात कही गई है। शिकायत के मुताबिक, सर्विस और ट्रेनिंग के लिए सामान वहीं से खरीदा जाता था, जहां से मैडम कहती थी। आईटीआर की कॉपी से सभी आरोपों का मिलान किया जा सकता है। कथित धन शोधन कंपनी की वित्तीय स्टेटमेंट की जांच की जा सकती है। इसके अलावा सीआरपीएफ की गाड़ियों में कश्मीर से तेलंगाना तक अवैध लकड़ी ले जाने का मामला भी सामने आया है। यह मामला, कथित तौर पर 2022-23 का बताया जा रहा है। अवैध इमारती लकड़ी को तेलंगाना तक ले जाया गया। बल के जवानों द्वारा देवदार के पेड़ काटे गए थे। बाद में उस लकड़ी को कथित तौर पर आधा दर्जन सरकारी ट्रकों में लादा गया। सशस्त्र बल के पहरे में उस लकड़ी को तेलंगाना तक पहुंचाया गया।