आईएनएस विराट को 1986 में भारतीय नौसेना के लिए खरीदा गया और इसने 29 साल तक देश को अपनी सेवा दी। इससे पहले इस विमान वाहक पोत ने 27 साल ब्रिटेन की रॉयल नेवी के साथ गुजारे। इस विमान वाहक की नींव 1944 में रखी गई।
ब्रिटेन ने 1959 में इस विमान वाहक को अपनी रॉयल नेवी में शामिल किया। उसने इसे एचएमएस हरमीज नाम दिया। इस जहाज पर साल 1944 में काम शुरू किया गया, उस दौरान दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था। वहीं, इसने ब्रिटेन की रॉयल नेवी के साथ फॉकलैंड युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। करीब 100 दिनों तक यह विषम परिस्थितियों में समुद्र में डटा रहा।
आईएनएस विराट की लंबाई 226 मीटर और चौड़ाई 49 मीटर है। भारतीय नौसेना में शामिल होने के बाद इसे जुलाई 1989 में ऑपरेशन जूपिटर के तहत श्रीलंका में शांति स्थापना के लिए भेजा गया। वहीं, जब 2001 में संसद पर हमला किया गया, तब इसे ऑपरेशन पराक्रम के तहत समुद्र में तैनात किया गया।
आईएनएस विराट ने 29 साल की अपनी सेवा के दौरान 10 लाख किलोमीटर (7,00,000 मील) से अधिक की दूरी को कवर किया, जो पृथ्वी के 28 बार चक्कर लगाने के बराबर है। ये जहाज अपने आप में एक छोटे शहर की तरह था।
ये जहाज एक पुस्तकालय, जिम, एटीएम, टीवी और वीडियो स्टूडियो, अस्पताल, दांतों के इलाज का सेंटर और मीठे पानी का डिस्टिलेशन प्लांट जैसी सुविधाओं से लैस था। इस जहाज का वजन 28,700 टन था। इस पर 150 अफसर और 1500 नाविकों की तैनाती की जा सकती थी।
अगस्त 1990 से दिसंबर 1991 तक रिटायर्ड एडमिरल अरुण प्रकाश आईएनएस विराट के कमांडिंग अफसर रहे। उन्होंने बताया कि जून 1983 में उन्हें आदेश दिया गया कि वो लैंडिंग और टेक-ऑफ की प्रैक्टिस करें।
इसके बाद वो इंग्लिश चैनल पोर्ट्समथ के पास पहुंचे। यहां पहुंचने पर उन्हें एचएमएस हरमीज दिखाया गया। प्रकाश को इस विमान वाहक से पहली मुलाकात बेहद रोमांचक लगी। हालांकि, उन्होंने इससे पहले आईएनएस विक्रांत का सफर किया था, लेकिन आईएनएस विक्रांत की तुलना में ये जहाज काफी भारी था। विक्रांत का वजन 18,000 टन था।
वो हवाई जहाज से विमान में बैठे और टेक ऑफ किया। इस दौरान उन्होंने एक घंटे की उड़ान भरी और डेक पर वर्टिकल लैंडिंग की। 1986 में जब जहाज मुंबई पहुंचा तो एडमिरल अरुण प्रकाश एक छोटी फ्रिगेट को कमांड कर रहे थे।
रिटायर्ड एडमिरल अरुण प्रकाश ने आईएनएस विराट को याद करते हुए बताया कि हमें बोला गया कि सब जाकर विराट का स्वागत करो। वो मॉनसून का बहुत ही तूफानी दिन था। हम मुंबई के बाहर पहुंचे। उस दौरान लगातार बारिश हो रही थी, तेज हवा चल रही थी। उन्होंने बताया कि सभी लोगों ने दूर से ही जहाज को देखा, वो एक बेहद की शानदार दृश्य था। इसके बाद मुझे अगस्त 1990 (दिसंबर 1991 तक) में जहाज की कमान सौंपी गई।
प्रकाश ने बताया कि आईएनएस विराट ने तटरक्षा के अलावा नौसेना की दो पीढ़ियों के पायलटों, इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञों को बहुत कुछ सिखाया। उन्होंने बताया कि जहाज पर तैनात सभी कर्मी इसकी व्यवस्थाओं से खासा खुश थे। इसमें रहने और खाने का अच्छा बंदोबस्त था।