बरेली में हुई हिंसा को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कुछ लोग भारत में रहते हुए गजवा-ए-हिंद का नारा लगाकर दंगा कराने का काम करते हैं। ऐसे लोगों को नर्क में भेजने का काम सरकार करेगी।
बरेली हिंसा के बाद सीएम योगी लगातार दंगाइयों को अल्टीमेटम दे रहे हैं। अपने भाषण में मुख्यमंत्री दावा कर रहे हैं कि अराजकता और दंगा करने वालों को जहन्नुम का टिकट देंगे। इसके साथ ही जो लोग गजवा-ए-हिंद की कल्पना भी करते हैं तो उन्हें नरक का टिकट मिलेगा। आखिर ये गजवा-ए-हिंद क्या होता है? योगी ने अपने बयान में क्या कहा है? बरेली में हिंसा क्यों हुई?हिंसा के पीछे का क्या कारण है? क्या पहले भी मुख्यमंत्री ने गजवा-ए-हिंद का को लेकर कुछ कहा है? आइए जानते हैं…
बरेली में क्या हुआ?
इत्तेहाद-ए-मिल्लत कौंसिल (आईएमसी) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने 19 सितंबर को एलान किया कि वो 26 सिंतबर को इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान में विरोध-प्रदर्शन करेंगे। ये प्रदर्शन आई लव मोहम्मद के समर्थन में होना था। उनके आह्वान पर जुटी भीड़ मौलाना के नदारद रहने से अराजक हो गई। बवालियों ने खलील स्कूल तिराहे के पास दुकानों व वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की। नावल्टी चौराहा पर पुलिस टीम पर पथराव और श्यामगंज में फायरिंग की। डीआईजी अजय कुमार साहनी के मुताबिक, इसमें 22 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। लाठीचार्ज भी किया। साथ ही मौलाना तौकीर रजा को नजरबंद कर लिया गया।
सड़क पर क्यों उतरे लोग?
पुलिस प्रशासन के द्वारा इस प्रदर्शन की कोई अनुमति नहीं दी गई। 25 सितंबर की रात 12 बजे अधिकारियों ने आईएमसी की ओर से जारी पत्र को सार्वजनिक किया। इसमें कार्यक्रम स्थगित किए जाने की जानकारी दी गई थी। शुक्रवार सुबह मौलाना ने वीडियो जारी कर कार्यक्रम स्थगित होने वाले पत्र को फर्जी बताया। साथ ही कार्यक्रम को पहले अनुसार होने की बात कही। उनके बुलावे पर शहर में भीड़ जुटी, पर दोपहर साढ़े तीन बजे तक मौलाना का कोई पता न चला। तब मौलाना के समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया। आई लव मोहम्मद लिए हुए पोस्टर लिए कई लोग सड़कों पर निकल गए।
कहां से शुरू हुआ आई लव मोहम्मद का विवाद?
आई लव मोहम्मद का पूरा विवाद कानपुर के रावतपुर से शुरू हुआ था। जब सितंबर की शुरुआत में रावतपुर के सैयद नगर में बारावफात के जुलूस के दौरान कुछ लोग आई लव मोहम्मद का बैनर लेकर निकले। इसके बाद, माहौल बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने 25 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इस एफआईआर को रद्द करने के लिए कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए और आई लव मोहम्मद के पोस्टरों के साथ जुलूस निकाले गए। ये सिलसिला आगे बढ़ते-बढ़ते बरेली तक पहुंचा, जहां इसने हिंसक रूप ले लिया।
बरेली हिंसा पर सीएम योगी ने क्या-क्या कहा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। सीएम ने कहा कि अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो कि उपद्रवी दोबारा गलती करने के बारे में सोच भी न सकें। सीएम ने कानपुर नगर, वाराणसी, मुरादाबाद, बदायूं, महराजगंज, उन्नाव, संभल, आगरा और बरेली में आपत्तिजनक जुलूस और भड़काऊ नारेबाजी की घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए तत्काल एफआईआर कराने और उपद्रवियों की संपत्तियों की जांच के आदेश दिए।
शनिवार को सीएम ने श्रावस्ती में कहा कि आई लव मोहम्मद की आड़ में अराजकता करने वालों को 'चंड-मुंड' की तरह रौंदने का काम होगा। उन्होंने कहा, कुछ लोग हैं, जिन्हें शांति व कल्याण अच्छा नहीं लगता। जब भी कोई हिंदू पर्व-त्यौहार आता है, उन्हें गर्मी चढ़ने लगती है। उसे शांत करने के लिए हमें डेंटिंग-पेंटिंग का सहारा लेना पड़ता है। योगी ने कहा, जैसे मां भगवती चंड-मुंड को रौंदने का काम करती हैं, वैसे ही समाज के लिए संकट पैदा करने वालों पर ऐसी कार्रवाई की जाएगी, जो कई पीढ़ियों के लिए नजीर बन जाएगी। उन्होंने कहा, सनातन सभी का सम्मान करता है, मगर मूल्यों की अवहेलना करने वालों के लिए स्पष्ट संदेश है-न छूटोगे और न छूट पाओगे।
तीसरी बार बलरामपुर में इस हिंसा पर बोलते हुए सीएम योगी ने कहा, कुछ लोग भारत में रहते हुए 'गजवा-ए-हिंद' का नारा लगाकर दंगा कराने का काम करते हैं। ऐसे लोगों को नर्क में भेजने का काम सरकार करेगी। दंगाइयों को जहन्नुम का टिकट दिया जाएगा।
क्या होता है गजवा-ए-हिंद?
गजवा-ए-हिंद पुराना शब्द है। इसमें ‘गजवा’ का मतलब उस जंग से था, जो इस्लाम के विस्तार के लिए लड़ी जाती थी। यानी, ‘गजवा-ए-हिन्द’ के मायने ऐसी जंग से हैं, जिसके जरिए भारतीय उपमहाद्वीप के लोगों को इस्लाम में शामिल किया जा सके। जानकार बताते हैं कि जब इस्लाम को भारत वर्ष में विस्तार देने की कोशिश हुई थी, तब इस शब्द का इस्तेमाल हुआ था।
क्या इससे पहले भी सीएम योगी गजवा-ए-हिंद के बारे में बोल चुके हैं?
हां, इससे पहले 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान सीएम इसकी कड़े शब्दों में निंदा कर रहे थे। उस समय न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए अपने इंटरव्यू में योगी ने कहा कि नए भारत में विकास सबका होगा, लेकिन तुष्टीकरण किसी का नहीं। सरकार सबका साथ, सबका विकास की भावना के साथ कार्य कर रही है। नया भारत संविधान के अनुरूप चलेगा, शरीयत के अनुरूप नहीं। मैं स्पष्टता से कह सकता हूं कि गजवा-ए-हिंद का सपना कयामत के दिन तक भी साकार नहीं होगा। चुनावी मौसम में दिए गए उनके इस बयान पर जमकर सियासत हुई थी।