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जहाज पर 'राजीव गांधी' और 'राहुल गांधी' के गुस्से में कितना अंतर है

Fri, 04 Jan 2019 02:35 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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rahul gandhi - फोटो : pti
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पूर्व प्रधानमंत्री स्व. 'राजीव गांधी' और कांग्रेस अध्यक्ष 'राहुल गांधी' की जहाज को लेकर आक्रामकता, गुस्सा और हड़बड़ाहट में बड़ा फर्क है। राहुल अपने पिता राजीव गांधी के मुकाबले ज्यादा गुस्से वाले और आक्रामक स्वभाव के हैं। राजीव गांधी कॉमरशियल पायलट रहे हैं, जबकि राहुल गांधी ने खुद को पायलट बताया है। उनका यह भी दावा है कि वे जहाज की तकनीकी बारीकियां समझते हैं। खैर, जब जहाज की बात आती है तो उस बाबत गुस्से को लेकर उनमें एक बड़ा अंतर देखने को मिलता है। विपरित परिस्थितियों में और वो भी 'जहाज' के मामले को किस सहज स्वभाव से लिया जाए, ये राजीव गांधी से सीखा जा सकता है।
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दूसरी ओर, जहाज यानी राफेल के मुद्दे पर राहुल गांधी न केवल गुस्से में आए, बल्कि आक्रामक भी हो गए। राहुल गांधी ने एक बार कहा था, पायलट कुछ नहीं करते। पूरा जहाज जीपीएस और सेटेलाइट से नियंत्रित होता है। पैसेंजर को सुकून रहे, पायलट तो केवल इसीलिए होता है।

बाद में उनका यह बयान पायलटों के बीच खासा चर्चा में रहा। कई पायलटों ने इसका बुरा भी माना तो दूसरों ने कहा, दरअसल राहुल का मतलब कुछ और था। पायलट 'रॉन बरोह' के मुताबिक, राहुल कहना चाहते थे कि पायलट सिस्टम मेनेजर होते 

मेरा नाम राजीव गांधी है, मैं इस प्लेन में सहायक पायलट हूं

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बात 1970 की है। एयर मार्शल पीसी लाल को इंडियन एयरलाइंस की कमान सौंपी गई थी। उन्होंने लिखा है, कोलकाता से दिल्ली के लिए एक 'फोक्कर फ्रेंडशिप' फ्लाइट रवाना हुई। फ्लाइट में खाना नहीं परोसा गया। वजह, प्लेन में खाने का सामान लोड ही नहीं किया गया था। उस वक्त जीपीएस भी नहीं था।

पायलट को हर क्षण चौकन्ना रहना पड़ता था। यहां तक कि उस फ्लाइट में पायलटों को भी चाय या नाश्ता नहीं मिला। इस बात पर एक यात्री गुस्सा भी हो गया। उसके पास बंगाली मिठाई यानी रसगुल्ले थे। उसने क्रू मेंबर को रसगुल्ले खाने को दिए। यंग पायलट ने उसका आभार जताया। दिल्ली में प्लेन उतरा तो उसी यंग पायलट ने एक बार फिर यात्रियों को उनके सहयोग के लिए शुक्रिया कहा।

इस बार यात्रियों ने भी कुछ महसूस किया। एक यात्री ने पूछा, क्या मैं आपको जानता हूं। क्या हम पहले कभी मिले हैं। आपका चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लगता है। उसने उतर दिया... ‘शायद’, मेरा नाम राजीव गांधी है। मैं इस प्लेन में सहायक पायलट हूं। जब दूसरे यात्रियों को यह बात मालूम हुई तो वे राजीव गांधी से मिलने चले आए।
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राजीव गांधी - फोटो : amar ujala

राफेल पर राहुल गांधी की आक्रामकता

24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस पार्टी के दफ्तर में बुधवार को राहुल गांधी ने जो प्रेसवार्ता की, उसमें राफेल जहाज की तकनीकी बारीकियों को लेकर सवाल जवाब हो रहे थे। राहुल गांधी से पूछा गया, जेटली कह रहे हैं कि आपको कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के बारे में नहीं पता, उनका जवाब था, मेरे पास अभी लाइसेंस नहीं है, लेकिन मैं पायलट हूं।

राफेल को लेकर मोदी और जेटली पर उनकी आक्रामकता देखने लायक थी। जब उन्होंने कहा, 'चौंकीदार चौर है, भ्रष्टाचार में लिप्त है, अगर हमारी सरकार आई तो राफेल मामले की सौ फीसदी जांच होगी, इस दौरान राहुल काफी गुस्से में दिख रहे थे। पीएम मोदी का इंटरव्यू लेने वाली पत्रकार पर भी उन्होंने टिप्पणी कर दी, जिसके चलते सोशल मीडिया पर उनकी खासी आलोचना भी हुई।

जेटली को लेकर राहुल में उतावलापन तो था, मगर गुस्सा भी

राहुल गांधी ने कहा, जेटली ने बोला कि 1600 करोड़ रुपए का नंबर कहां से आता है। उन्होंने स्वयं कहा कि 58,000 करोड़ रुपए की डील है। अब आप 58,000 को 36 से डिवाईड कीजिए, क्या नंबर आता है- 1600, तो अरुण जेटली जी हमें 1600 नंबर तो आपने ही दिया है, यही एक जहाज की कीमत है।

इन पंक्तियों में राहुल काफी आक्रामक दिखे

  • -हवाई जहाज फ्रांस में बनाया जाता है, अनिल अंबानी पर 45,000 करोड़ रुपए का कर्जा है, उसको 30,000 करोड़ रुपए का फायदा नरेन्द्र मोदी जी ने पर्सनली दिलवाया है। 
  • -संसद में राफेल की चर्चा हो रही है, डिफेंस मिनिस्टर नहीं खड़ी हो सकती, प्रधानमंत्री नहीं खड़े हो सकते,
  • -निर्णय लेने वाले, जिन्होंने फैसला लिया है, जो धूम धाम के साथ फ्रांस गए, बैंड बाजे के साथ फैसला लिया, अब वो सदन में खड़े नहीं हो सकते हैं। 
  • -126 हवाई जहाज चाहिए थे, 126 हवाई जहाज की जरुरत थी, देश जानता है कि नरेन्द्र मोदी जी ने कॉन्ट्रैक्ट बदला, 36 हवाई जहाज का नया कॉन्ट्रैक्ट तैयार किया। 
  • -नरेन्द्र मोदी जी छुप नहीं सकते हैं। डिबेट के समय जरुर वो दौड़ कर घर जा सकते हैं या सामने नहीं आ सकते, मगर सच्चाई कहीं नहीं जाने वाली है। सच्चाई, सच्चाई होती है।
  • -प्रधानमंत्री का इंटरव्यू देखा, डेढ़ घंटा, मूड कैसा था? वे कह रहे थे कि राफेल में मेरा तो कहीं नाम ही नहीं है, इस पर राहुल हंसे भी 
  • -लोकसभा में दाम बता दिया। सीतारमण जी कहती हैं, पहले दाम नहीं बताया जा सकता फिर कहती हैं, बताऊंगी, फिर कहती हैं, नहीं बताऊंगी। 
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