केंद्रीय कैबिनेट ने सरोगेसी को कानूनों को सख्त बनाने की दिशा में बड़ी पहल की दी है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने सरोगेसी बिल के नए ड्राफ्ट को मंजूरी दी है। इससे किराए की कोख के व्यापार पर रोक लगेगी। नए बिल में कॉमर्शियल सरोगेसी को गैरकानूनी किया गया है और 'परोपकारी सरोगेसी' को मान्यता दी गई है। पढ़ें आखिर क्या है सरोगेसी और जरूरत पड़ी इस पर नए कानून बनाने की...
क्या है सरोगेसी?
सरोगेसी एक ऐसी प्रैक्टिस है जिसमें एक महिला किसी अन्य जोड़े के लिए बच्चे को अपनी कोख से जन्म देती है और जन्म के उस बच्चे पर उसके सभी अधिकार समाप्त हो जाते हैं। सरोगेसी मोटे तौर पर दो तरह ही होती है- परोपकारी सरोगेसी और कॉमर्शियल सरोगेसी। परोपकारी सरोगेसी में मेडिकल और इंश्योरेंस के खर्च को छोड़कर किसी भी तरह से आर्थिक फायदा नहीं उठाया जाता। वहीं, कॉमर्शियल सरोगेसी कोख को किराए पर लिया जाता है, इस तरह किसी के लिए बच्चे को जन्म देने के बदले सरोगेट मदर मेडिकल और अन्य संबंधित खर्च के अलावा आर्थिक लाभ की हकदार होती है। भारत में कॉमर्शियल सरोगेसी का बाजार बेहद बड़ा है।
नए कानून के बाद कौन ले सकेंगे किराए की कोख?
सिर्फ शादीशुदा जोड़े ही सरोगेसी के जरिए बच्चा प्राप्त कर सकेंगे। विदेशियों और एनआरआई के लिए भारत में सरोगेसी पूरी तरह प्रतिबंधित होगी। कोई जोड़ा शादी के 5 साल बाद ही सरोगेसी के जरिए बच्चा पाने का पात्र होगा। इसके लिए उन्हें पहले मेडिकल प्रमाण पत्र देना होगी कि जोड़ा बच्चे को जन्म नहीं दे सकता।
कौन बन सकेंगी सरोगेट मदर?
परिवार या नजदीकी रिश्तेदार महिला की सरोगेट मदर बन सकती हैं। इनसे पैदा हुआ बच्चा अगर विकलांग, मंदबुद्धि या लड़की या चाहे जो हो, उसे स्वीकार करना ही होगा। कोई महिला जीवन में एक बार से अधिक सरोगेट मदर नही बन सकेगी।