जम्मू-कश्मीर, पंजाब से लेकर राजस्थान और गुजरात तक पाकिस्तान से सटे सीमावर्ती जिलों में भारतीय सैनिक पाकिस्तान के हर हमले को नाकाम कर रहे हैं। हमले से हालात विकट जरूर हुए हैं, मगर लोग डरे हुए नहीं हैं। वे सतर्क हैं। चाहते हैं कि दुश्मन को सबक सिखाया जाए। हर रोज सरहदों के हालात हम आप तक पहुंचाएंगे...आज पहली रिपोर्ट
पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी के बाद क्षतिग्रस्त घर
- फोटो : अमर उजाला
जम्मू जागा और काम पर जुट गया, पर सतर्कता के साथ
रोली खन्ना, जम्मू से
मंदिरों की घंटियों, गुरुद्वारों में शबद कीर्तन और मस्जिदों में अजान के साथ जागने वाला शहर जम्मू शुक्रवार की सुबह भी उठा। पर... सन्नाटे को चीर रहे थे रातभर से जारी धमाके, सायरन की आवाजें। बीच-बीच में जब चंद मिनटों के लिए धमाके थमते तो कोयलों की कुहुक एहसास कराती कि सुबह हो चुकी है।
इधर, सूरज की किरणों ने दस्तक दी, उधर ब्लैकआउट खत्म हुआ। तभी घर से न निकलने की ताकीद करती पुलिस की गाड़ियां गुजरने लगी थीं। घंटे दो घंटे के इंतजार के बाद बाहर निकलने की छटपटाहट लोगों में नजर आई और कुछ देर से ही सही, रात भर धमाकों के डर को मानो ठेंगा दिखाता जम्मू फिर से जीवंत होने की कोशिश में जुट गया। इस बीच रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड पर बाहर जाने वाले लोगों की संख्या जरूर बढ़ी, पर स्टेशन पर दुकान लगाने वाले विजय मनहास कहते हैं कि यह शहर हार नहीं मानता है, डर यहां अस्थायी है। पाकिस्तान की ओर से बृहस्पतिवार की रात हुए धमाकों का टारगेट जम्मू का वो इलाका रहा, जो भारतीय सेना का एक अति महत्वपूर्ण पाॅइंट है। हमने सुबह उन्हीं इलाकों की ओर रुख किया। लोग दफ्तर निकलने के लिए मेटाडोर का इंतजार करते, रोजमर्रा की खरीदारी करते नजर आए। एक पल तो लगा कि मानो कुछ हुआ ही नहीं है। मुख्य बाजार में रहने वाले हरबंश चौधरी कहते हैं, शहर में बंकर जैसी सुविधाएं नहीं। पर, हम अपने घरों में रहेंगे और हमारा हौसला ही हमें जिंदा रखेगा।
तनाव है, पर डर नहीं...
सतवारी-गांधीनगर होकर हम पुराने शहर की ओर रुख करते हैं। रघुनाथ बाजार भी रोज की तरह खुल चुका है। रेजीडेंसी रोड से होते हुए हम पीरखो, पीर मिट्ठा तक पहुंचते हैं। वहीं, मौजूद नरोत्तम शर्मा कहते हैं कि टेंशन तो है, पर डरने की कोई बात नहीं, सतर्कता की जरूरत है। जैन बाजार में मिले सराफा कारोबारी आशुतोष कपूर कहते हैं कि आप खुद देख लीजिए बाजार खुले हैं, लोग काम पर आना चाहते हैं, इसलिए आए हैं। डर कर हम दुश्मनों को जीतने नहीं दे सकते। हमने तय किया है कि अंधेरा होने से पहले बाजार बंद कर देंगे कुछ दिन तक, ताकि अफरातफरी न रहे।
सीमावर्ती लोगों में धमाकों का डर नहीं...पर सतर्क
कुलवीर सिंह , छंब ज्यौड़ियां से
भारत-पाकिस्तान में तनातनी के बीच सीमावर्ती गांवों के लोग सतर्क हैं। लोग बृहस्पतिवार शाम को घरों को ताला लगा सुरक्षित ठाैर पर पहुंच गए। सुबह घर लौटे पलांवाला के नवीन सिंह और निधि चौधरी ने बताया कि वे रिश्तेदार के घर चले गए थे। घर में मवेशी भी हैं, उनको भी चारा-पानी डालना है। शाम ढलने से पहले फिर सुरक्षित स्थान पर निकल जाएंगे। सीमावर्ती सभी गांवों के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए खौड़ प्रशासन की तरफ से 18 केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर शाम को लोग पहुंच जाते हैं। बीती रात पाकिस्तानी हमले के बाद भी खौड़ और ज्यौड़ियां के बाजार खुले देखे गए। यह बात अलग है कि रौनक नहीं थी। खौड़ बाजार के दुकानदार बिल्लू शाह और दीपक सिंह बताते हैं कि सुरक्षा जरूरी है। इसलिए सभी अपने परिवारों को सुरक्षित ठिकानों पर भेज रहे हैं।
सुरक्षाबल चौकस...गश्त बढ़ी
सुरक्षाबलों को उच्च सतर्कता पर रखा गया है। सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए मांग की है कि जब तक सीमा क्षेत्र में पूर्ण शांति स्थापित नहीं हो जाती, तब तक इन सुरक्षा उपायों को जारी रखा जाए।
पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी के बाद का हाल
- फोटो : अमर उजाला
युवाओं में जज्बा, नहीं छोड़ेंगे गांव, फौजियों का देंगे साथ
जितेंद्र सिंह, परगवाल से
परगवाल सेक्टर के साथ लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा हालांकि खामोश है, लेकिन लोगों के दिलों में दहशत बरकरार है। वैसे तो प्रशासन ने ज्यादातर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है, उसके बावजूद बहुत सारे ग्रामीण, खासकर युवा अब भी गांवों में ही डटे हुए हैं और वे हरगिज अपना घर छोड़कर नहीं जाना चाहते। सरहद का आखिरी गांव हमीरपुर कोना, जिसके दो तरफ पाकिस्तान की सीमा और एक तरफ दरिया चिनाब है, वहां खड़े कुछ युवाओं ने बताया कि वे अपना गांव छोड़कर नहीं जाएंगे, बल्कि सीमा सुरक्षा बल के जवानों के साथ डटकर पाकिस्तान को मजा चखाना चाहते हैं। एक पूर्व सैनिक, काली मन्हास ने बताया कि प्रशासन के अधिकारियों ने उनको कई बार गांव छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा है, लेकिन वे ऐसा करके अपने जवानों का मनोबल नहीं गिराना चाहते। वे भी एक फौजी हैं और इस बार मौका है पाकिस्तान को सबक सिखा देना चाहिए। पूर्व सैनिक बलवीर सिंह का कहना था कि पाकिस्तान की तरफ से बार-बार फायरिंग की अब आदत सी हो गई है। उन्होंने कहा कि जंग के हालात होने के बावजूद वे अपने घर पर डटे हुए हैं और वे अपना घर छोड़कर कहीं भी नहीं जाना चाहते। उनका कहना था कि हमें अपनी सेना पर पूरा भरोसा है, वे पाकिस्तान को मजा चखाकर ही रहेंगे।
महीनों बंकरों में रह लेंगे, पर पाकिस्तान को सबक सिखा दो
राजीव सिंह लंगेह, अरनिया से
जम्मू के अरनिया सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच भारतीय सेना की मुस्तैदी से हमले नाकाम कर दिए गए हैं। इन हालातों के बावजूद सीमावर्ती ग्रामीणों के हौसले बुलंद हैं। हर गांव से एक ही आवाज उठ रही है, इस बार पाकिस्तान को सबक सिखा दो, हम महीनों बंकरों में रह लेंगे। गांव पिंडी कुदवाल के राजवंत सिंह ने कहा कि पाकिस्तान की नापाक हरकतों को अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। काकू दे कोठें के विक्की चौधरी ने बताया कि अधिकांश ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पहुंच चुके हैं, लेकिन हर घर में एक सदस्य मौजूद है, जो डटे हुए हैं।
डीसी जम्मू सचिन कुमार वैश्य और एसएसपी जोगिंदर सिंह ने तरेबा गांव का दौरा कर बंकरों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। पूर्व सरपंच बलबीर कौर के साथ बैठक कर सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा की गई। चंगिया गांव के रघुवीर सिंह ने बताया कि रात को आसमान में तेज़ रोशनी दिखाई दी, जो बाद में ड्रोन और मिसाइल हमले निकले। भारतीय सुरक्षा बलों ने पूरे सेक्टर को सुरक्षित बनाए रखा है, जिससे लोगों का आत्मविश्वास और जज्बा बना हुआ है।
बच्चों के लिए लगाया ट्यूशन
ग्रामीण बच्चों की शिक्षा के लिए अभिभावक मोहल्लों में ट्यूशन की व्यवस्था कर रहे हैं। 10 से 15 बच्चों का समूह बनाकर शिक्षक को घर बुलाया जा रहा है। गृहिणी अनीता देवी ने कहा, हम हर तकलीफ सहने को तैयार हैं, लेकिन अब पाकिस्तान को जवाब जरूरी है।
पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी के बाद क्षतिग्रस्त घर
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12 घंटे भारी गोलाबारी, कई घरों को नुकसान, ग्रामीण अब भी डटे
अमृतपाल सिंह बाली, उड़ी सेक्टर से
बारामुला के उड़ी सेक्टर में पाकिस्तान ने गुरुवार को 15 गांवों में भारी गोलाबारी की। 12 घंटे चली इस गोलाबारी में भले ही कोई जान का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन घरों को भारी क्षति पहुंची। मोहरा, सलामबाद और गिंगल समेत कई गांवों में रातभर दहशत का माहौल रहा। मोहरा के गुलाम मोहम्मद भट ने बताया कि पहली बार इतने अंदर तक गोलाबारी हुई है। उनका घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। वहीं, चरणजीत सिंह ने बताया कि गांव में लगातार गोलों की बारिश होती रही। गांव के 4-5 मकान पूरी तरह टूट चुके हैं।
कोठी के साथ सरकारी जमीन पर बना बंकर।
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आधे से ज्यादा लोग सुरक्षित ठिकानों पर, बाकी की रातें बंकरों में कट रहीं
अजीम यूसुफ, कुपवाड़ा के तंगधार से
सामरिक क्षेत्रों में हमले विफल हो रहे हैं तो पाकिस्तानी सेना नागरिक इलाकों को निशाना बना रही है। लगातार तीसरे दिन बृहस्पतिवार रात भी तंगधार के त्रिबुनि, शमसपोरा, बागबेला, दिलदार, भटपोरा, नवगाबरा आदि गांवों में पाकिस्तानी सेना ने भारी गोलाबारी की। इससे मकानों, दुकानों, संपत्तियों और वाहनों को काफी नुकसान पहुंचा है। हमले के कारण आधे से अधिक लोग पहले ही घर खाली कर चले गए हैं। बाकी बचे लोगों की रात बंकरों में कट रही है।
आदिल भट ने बताया, पहलगाम हमले के बाद से ही छुटपुट गोलीबारी चल रही थी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद मंगलवार रात से भारी गोलाबारी हर रात की जा रही है। बंकर में रह रहीं शबनम ने बताया कि बड़ी मेहनत से अपने सपनों का घर बनाया था। पाकिस्तानी सेना कायरों की तरह लोगों पर हमले कर रही हैै। हमले से चंद मिनटों में ही उनका आशियाना बर्बाद हो गया।
अनिश्चितता को लेकर माथे पर शिकन, राशन जुटाते दिखे लोग
अतुल सूदन , अखनूर से
अखनूर में शुक्रवार को जनजीवन सामान्य जरूर दिखा, लेकिन अनिश्चितता को लेकर माथे पर शिकन जरूर नजर आई। बाजार खुले रहे। लोग महीने भर का राशन जमा करते नजर आए। माहौल को लेकर सवाल पर राकेश कुमार कहते हैं कि हालात बिगड़ सकते हैं, इसलिए तैयारी जरूरी है। शिव शर्मा कहते हैं, पहले गोलाबारी के समय खोड़ से अपने रिश्तेदारों को अखनूर बुला लिया करता था, पर अब ऐसा नहीं कर पा रहा हूं। कहते हैं, पहले अखनूर सुरक्षित था, अब यहां भी खतरा है। हथियार अब बेहद आधुनिक हो गए हैं, दूर तक उनकी रेंज है। बहरहाल, मां वैष्णो देवी सहारा है। गढ़खाल में इक्का-दुक्का बुजुर्ग या युवा नजर आए। कई ने बताया कि जरूरी काम निपटाकर, शाम को सुरक्षित स्थानों की ओर लौट जाएंगे। प्रशासन सतर्क है और सुरक्षाबलों की गश्त बढ़ा दी गई है।
रामगढ़ शांत रहा...
राजन चौधरी, रामगढ़ से
पिछले दो दिनों से प्रशासन सीमा पर रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज रहा है। रामगढ़ क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि जम्मू में फायरिंग हुई, लेकिन हमारे रामगढ़ क्षेत्र में नहीं। पहले जब भी ऐसा माहौल बनता था, तो हमारे क्षेत्र में पहले गोलाबारी शुरू होती थी। प्रेमपाल चौधरी ने कहा कि गांव में फायरिंग बिल्कुल नहीं हुई है, हालांकि पूरी रात सीमा से फायरिंग की आवाज सुनाई देती रही। परिवार को रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है। मैं अकेला घर में हूं। गोलीबारी शुरू होने पर डर रहा था, लेकिन मजबूरी मवेशियों की थी। सीमा पर बसे हर गांव में एक-एक आदमी मवेशियों की देखभाल के लिए घरों में रह गया है। सीमा से सटे सभी गांवों को प्रशासन शाम होते ही खाली करवा दे रहा है। ग्रामीणों को बसों से सुरक्षित शिविरों में भेजा जा रहा है।
पाकिस्तान से नहीं सुनी जुमे का अजान
सीमा से सटे पाकिस्तान के गांवों में शुक्रवार को पहले मस्जिदों में अजान सुनाई देती थी, लेकिन इस बार जुमे पर सुबह से ही कोई आवाज सुनाई नहीं दी और न ही खेतों में कोई पाकिस्तानी किसान दिखा। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जाकर उस पार कैमरे से गांव की हरकत देखी तो गांव के गांव सुनसान थे। सड़कों पर कोई गाड़ी नहीं थी, ऐसा लग रहा था कि पाकिस्तान के लोग दिन में भी घरों में वापस नहीं आ रहे हैं।
पुंछ के नियंत्रण रेखा पर गगडियां गाँव में बंकर न होने पर पशुशाला में ही बैठ परिवार
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15 गांवों को बनाया निशाना
सुभाष चंद्र, आरएस पुरा से
यहां ग्रामीणों ने राहत शिविरों व सुरक्षित ठिकानों में शरण ले रखी है। सीमांत गांव अब्दुल्लिया, चंदू चक लाइयां, सुचेतगढ़ के ग्रामीण शुक्रवार को अपने-अपने घर पहुंचे और पशुओं के लिए चारे का प्रबंध किया और शाम को फिर शिविर में लौट गए। ग्रामीण रतन लाल ने बताया कि बीती रात क्षेत्र में धमाकों की बड़ी आवाज आई। सरदारी लाल ने बताया कि परिवार को तो रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है, मगर मवेशी घर पर ही हैं। उन्हें साथ रख पाना मुश्किल बना हुआ है। फिर भी हम मुश्किल झेल लेंगे, मगर पाकिस्तान को अच्छे से सबक सिखाना जरूरी है।
गोले दगते रहे...हनुमान चालीसा का पाठ करते रहे...ऐसे बीती रात
रवि वर्मा, राजोरी से
राजोेरी में ठंडीकस्सी, मनकोट, पलूलिया, गंभीर ब्रह्मण, इरा दा खेत्र के रिहायशी इलाकों में पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार रात भारी गोलाबारी की। गोलाबारी से मकानों का काफी क्षति पहुंची है। भारतीय सेना ने भी पाकिस्तानी गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब दिया। दोनों और से रुक-रुक कर भारी गोलाबारी का सिलसिला सुबह करीब साढ़े छह बजे तक जारी रहा। मनकोट निवासी संजय कुमार बताते हैं कि रात करीब 1:30 बजे उनके घर पर पाकिस्तानी गोले गिरने शुरू हुए जिससे उनके घर को काफी क्षति पहुंची है। आसपास के गांवोे में कुछ लोगोे की दुकानों के शटर टूटे और कुछ घरों की खिड़कियां आदि टूटी हैं। ग्रामीण कहते हैं गोलाबारी से दहशत तो है, पर सरकार पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाए कि वह फिर दुस्साहस न कर सके। ग्रामीण बताते हैं कि रात में लोग जाप करते रहे। हनुमान चालीसा का पाठ होता रहा। रात ऐसे ही कटी।
पाकिस्तान हमले के बाद का हाल।
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सूरज की किरण बंकर पर पड़े तो सबकुछ मंगल हो
सूरज की पहली किरण बंकर पर पड़े तो सब कुछ मंगल हो... यह शब्द सीमावर्ती लोगों के जज्बे को दर्शाते हैं, जिन्होंने बृहस्पतिवार रात पाकिस्तान की गोलाबारी के बीच बंकरों में बैठकर गुजारी। दशकों से ये लोग पाकिस्तान की गोलाबारी का दंश झेल झेलते आए हैं।
सीमावर्ती गांवों के लोग ब्लैकआउट के चलते भीषण गर्मी व हवा की सुविधा न होने के बावजूद बंकरों में डटे रहे, लेकिन प्रशासन की ओर से बनाए गए विस्थापित शिविरों में नहीं गए। करीब 50 से 60 लोगों ने ही इन शिविरों में रात गुजारी और सुबह फिर गांव लौट गए। बंकरों में रात गुजरने वाले लोगों ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि रात बेहद डरावनी थी, लेकिन परिवार के सदस्य आपस में एक दूसरे का हौसला बढ़ाते रहे और यही दुआ करते रहे कि सुबह सूरज की पहली किरण जब उनके बंकर के भीतर पड़े तो सब कुशल मंगल हो। इसी हौसले के साथ लगातार सीमावर्ती लोग अपने गांवों में डटे हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक सांस है, वह अपने गांव में ही रहेंगे। गांव और घर छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।
तीसरे दिन भी पुंछ में गोलाबारी, एक की मौत, पांच लोग जख्मी
मुनीश शर्मा, पुंछ से
ऑपरेशन सिंदूर की गूंज से बौखलाया पाकिस्तान अब बेकसूरों पर वार कर रहा है। बृहस्पतिवार रात साढ़े आठ बजे जब पुंछ ब्लैक आउट के कारण अंधेरे में डूबा, तभी पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी कायरता दिखाई। रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर दर्जनों गोले बरसाए। सुबह आठ बजे तक धमाकों की आवाज गूंजती रही। इस गोलाबारी एक जिंदगी हमेशा के लिए खामोश हो गई।
35 वर्षीय मोहम्मद अबरार पुत्र मोहम्मद शरीफ मलिक निवासी लोअल बेला मंडी घर में ही मौजूद थे। तभी एक पाकिस्तानी गोले का शिकार बन गए। पाकिस्तान की इस दुस्साहस ने अबरार के परिजनों को जिंदगी भर का गहरा दुख दे दिया है। वहीं, मोहम्मद अशरफ पुत्र वजीर मोहम्मद निवासी बेला मंडी, सात साल के सुरन शर्मा पुत्र अजय शर्मा, लियाकत हुसैन पुत्र गुलाम दीन निवासी गांव मंधा और सुजल सिंह (16) पुत्र बलविंद्र सिंह और एक अन्य घायल हुए हैं।
बिजली, पानी, संचार सेवा ठप
गोलाबारी के साथ-साथ बिजली, पानी और संचार सेवाएं भी ठप हैं। 33 केवी लाइन क्षतिग्रस्त है, बिजली विभाग दिन में उसे दुरुस्त करता है, लेकिन रात को गोलीबारी में फिर क्षतिग्रस्त हो जाती है।
मोहल्ला कांमसर में एक के बाद एक छह गोलों ने तबाही मचाई। चार घर खंडहर में बदल गए। पाकिस्तान यहां तीन दिनों से भारी गोलाबारी कर रहा है। युद्ध जैसे हालात हैं। हर शाम गोलियों की आवाज गूंजने लगती है। लोग कहते हैं, सुबह कुछ सामान्य लगती है, लेकिन शाम होते ही डर लौट आता है। ऐसे में पाकिस्तान का नामोनिशान मिटाना अब जरूरी हो गया है।
पाकिस्तान हमले के बाद घायल।
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नौशेरा में सुबह तक बरसे गोले
विनोद शर्मा, नाैशेरा से
नौशेरा के बाॅर्डर इलाकों में पाकिस्तान की ओर से बृहस्पतिवार रात नौ बजे शेर, मकडी, नंब, कडाली, सरया, खंबा (झांगड) कलसिया, भवानी, रजवा (लाम) लडोका, पुखरनी आदि इलाकों में बमबारी की गई, जो शुक्रवार सुबह तक जारी रही। नौशेरा समेत सभी ग्रामीण क्षेत्रों में देर शाम को ब्लैक आउट कर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने बंकरों में और अन्य सुरक्षित जगहों पर शरण ली। धमाकों की आवाज के साथ-साथ आसमान में लाल रंग की मिसाइल जाती देखी गई। पाकिस्तानी गोलाबारी को देखते हुए प्रशासन ने सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों को शरणार्थी शिविरों में सुरक्षित पहुंचाया। अशोक कुमार और मिंटू शर्मा ने बताया कि भारतीय सेना की ओर से पहले से ही ग्रामीणों को अपील की गई थी कि वे सुरक्षित जगह पर पहुंच जाएं। रात भर सभी ग्रामीण बंकरों में रहे। वहीं, पाकिस्तान की ओर से की गई गोलीबारी का भारतीय सेना के जवानों ने मुंहतोड़ जवाब दिया।
रात उनींदे कटी...सुबह प्रवासी मजदूर घरों की ओर लौटने लगे
प्रीत चौधरी, सांबा से
धमाकों के बीच सांबा में लोगों की रात उनींदे ही कटी। खामोशी की चादर में लिपटा रहा पूरा इलाका सुबह चल पड़ा। रोजी-रोटी की तलाश में आए प्रवासी श्रमिकों में अलबत्ता डर और अनिश्चितता का भाव दिखा। कारखानों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिक सुबह ही अपने प्रदेशों की ओर लौटते दिखे। ये श्रमिक पंजाब की ओर जाने वाली यात्री बसों में बैठने के लिए मुख्य चौक पर इकट्ठा हुए। मुख्य चौक पर मिले कानपुर के सतीश कुमार, कन्नौज के प्रदीप कुमार, पंकज, और हरदोई के कृष्ण कुमार ने बताया कि वे काफी समय से सांबा में निजी कारखाने में काम कर रहे हैं। यहां उनका परिवार भी साथ है। वे कहते हैं, ऐसी गोलाबारी हमने पहले कभी नहीं देखी थी। धमाकों की आवाज से रात बड़ी मुश्किल से गुजरी। अभी माहौल खराब है, ऐसे में अपने गांव जा रहे हैं।
सुरक्षित स्थानों पर रुके लोग
सांबा के रहने वाले लोग अपने परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले गए हैं। स्थानीय निवासी कमल भट्टी बताते हैं कि हम अपने परिवार को पहाड़ी क्षेत्र में छोड़ने जा रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्र मावा की पूर्व सरपंच अनीता देवी ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार पहले ही भेज दिए थे और अब सोच रही हूं कि जिनके पास बंकर है, वहीं रहें अन्य सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
मिसाइलों के शोर से पलक तक नहीं झपकी...बस यही कह रहे- सबक ऐसा मिले कि आंख न उठा सके
सूरज प्रकाश, पठानकोट के चिकली करौली से
भारत-पाकिस्तान सीमा से 45 किमी दूर पठानकोट के गांव चिकली करौली में तीन दिन से धमाके सुनाई दे रहे हैं। छह हजार की आबादी वाला गांव हिंदू बहुल है। यहां ज्यादातर किसान हैं या सेना से रिटायर्ड। दहशत है, पर जोश कम नहीं। महिलाओं तक का कहना है, पाकिस्तान को माकूल जवाब देना चाहिए। ग्रामीणों ने बताया, शुक्रवार अल सुबह साढ़े चार बजे धमाकों से आंखें खुलीं। कुछ समझ पाते, इससे पहले फायरिंग होने लगी। दहशत बढ़ गई। बाद में पता चला, चार ड्रोन आए थे, जिन्हें सेना ने नष्ट कर दिया। एक जब्त कर लिया। सेना ने दस राउंड फायर किए। पंच केवल शर्मा ने बताया, गांव खाली करवाया जा रहा है। सोलर लाइटों के तार काट दिए हैं। बुजुर्ग बताते हैं, 1965 व 71 के युद्ध में बंकरों में छिपे थे, अब बंकर नहीं है, तो गांव खाली करना पड़ेगा।
पाकिस्तान हमले के बाद जम्मू में छतिग्रस्त घर।
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राशन जमा करने की होड़
मनन सैनी, गुरदासपुर के दोरांगला से
दोरांगला में भी दहशत व अनिश्चितता है। पाकिस्तान के जवाबी हमले की आशंका से ग्रामीण घरों में ताला लगा सुरक्षित ठिकानों पर निकल रहे हैं। महिलाओं-बच्चों को पहले ही रिश्तेदारों के यहां भेज दिया। स्कूल अगले आदेश तक बंद हैं। बृहस्पतिवार रात पाकिस्तान के ड्रोन हमले की खबर फैलते ही लोगों ने आटा, चीनी, तेल, दूध, दवा जैसे जरूरी सामान घरों में जमा करना शुरू कर दिया। तनाव के चलते बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि प्रशासन लाउडस्पीकर से मुनादी कर रहा है कि अफवाहों पर ध्यान न दें, न जरूरत से ज्यादा सामान इकट्ठा करें। रात 9 बजे के बाद सीमावर्ती इलाकों में ब्लैकआउट रखने के निर्देश हैं।
ग्रामीण बोले-65 और 71 से ज्यादा खतरनाक है जंग
जोगिंदर सिंह, ममदोट के सीमांत गांव हजारा सिंह से
फिरोजपुर के ममदोट के हजारा सिंह में बुजुर्ग महेंद्र सिंह कहते हैं कि उन्होंने 1965 और 1971 की जंग देखी है, लेकिन इस बार तो जंग ज्यादा खतरनाक है। इसके बावजूद उनका कहना है कि वह गांव नहीं छोड़ेंगे और फौजियों का पूरा साथ देंगे। ग्रामीण बोहड़ सिंह कहते हैं कि गांव में राशन पानी पूरा मिल रहा है। युद्ध के समय हम फौजियों को चाय पानी पिलाएंगे, पर गांव नहीं छोड़ेंगे। दहशत के बीच बुजुर्ग सोहन सिंह बताते हैं कि बृहस्पतिवार रात यहां बहुत से लोग सोए नहीं, क्योंकि पंजाब में अलग-अलग जगह पर ड्रोन मिसाइल से हमले हो रहे थे। हालांकि इससे हमारा जोश कम नहीं हुआ है। हमें अपने देश के लिए जागना है। चाहे जो हो जाए, गांव नहीं छोड़ेंगे और आर्मी के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने बताया कि रात नौ बजे से गांव में बिजली गुल रही है। ग्रामीण चन्नन सिंह, बलवीर सिंह, सुरजीत सिंह, महिंदर सिंह व वीर सिंह ने भारत की कार्रवाई को सही बताया है।
दो दिन से ब्लैकआउट...तनाव के बावजूद दहशत में नहीं
प्रवीण कथूरिया, अबोहर के डंगरखेड़ा से
करीब 54 वर्ष के बाद अबोहर के सीमावर्ती इलाके के लोग जंग के माहौल को देख रहे हैं। गांव डंगरखेड़ा के युवा जो पहली बार जंग के माहौल से रूबरू हो रहे हैं, जरा भी दहशत में नहीं है, लेकिन रिश्तेदारों के फोन घनघना रहे हैं। यहां दो दिन से ब्लैकआउट हो रहा है। गांव में चारों तरफ नजर दौड़ाएं तो सन्नाटे के सिवा कुछ भी महसूस नहीं होता। अबोहर से पाकिस्तान की दूरी करीब 27 किमी है। भारत का आखिरी गांव हिंदूमलकोट जो राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले का हिस्सा है, अबोहर से रेल मार्ग से 27 किमी की दूरी पर है। अबोहर के युवाओं कर्ण, राहुल, सचिन, तुषार ने हालात को मद्देनजर रखते हुए कहा कि हम शहर छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले। वहीं, अबोहर में टहलने निकले सीनियर सिटीजन राज कुमार बजाज, मदन लाल छाबड़ा, देसराज कंबोज, गुरांदित्ता कंबाेज, अशोक मगन ने कहा कि बरसों से जिस धरती ने हमें संभाला है, उसे इस अवस्था में छोड़कर जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
कहीं से बम तो नहीं गिर रहा
अनिल कुमार, हुसैनीवाला सीमा के गांव टेंडी वाला से
गांव टेंडी वाला सीमा की फेंसिंग से लगभग 500 मीटर की दूरी पर है। ग्रामीणाें का कहना है, इस बार पाकिस्तान का नाम ही मिटा देना चाहिए। हर बार उन्हें घर से बेघर होना पड़ता है। ग्रामीण बागीचा सिंह व मुख्तियार सिंह बताते हैं, युद्ध जैसा माहौल है। रात जागकर गुजारी है। आंखें आसमान की तरफ देखती रहीं कि कोई बम का गोला तो नहीं आ रहा। अजीत सिंह व जरनैल सिंह ने कहा, दिनभर खेतों में काम करते हैं और रात-भर जागते रहते हैं।
ट्रैक्टर-ट्रालियों से सुरक्षित ठिकानों पर जा रहे लोग
जलेश ठठई, फाजिल्का के गांव पक्का चिश्ती से
सीमा पर बसे गांव में माहौल तनावपूर्ण जरूर है, लेकिन लोगों में जोश भी भरपूर है। धमाकों की आवाज के साथ ही भारत माता की जय के नारे भी गूंजने लगते हैं। लोगों का कहना है कि सेना दुश्मनों को माकूल जवाब दे रही है। वे हर तरह से सेना के साथ हैं। दूसरी तरफ लोगों को जानमाल की चिंता भी सता रही है। लोग ट्रैक्टर-ट्रालियों में सामान भरकर सुरक्षित ठिकानों की ओर निकल रहे हैं। वे कहते हैं कि गांव नहीं छोड़ा है। कुछ दिन सुरक्षित ठिकानों में रहेंगे। फिर लौट कर यहीं आना है। गांव के लोग 1965-71 के युद्ध के भी साक्षी रहे हैं। गांव पक्का चिश्ती के कुलदीप सिंह, गुरजिंदर सिंह, बलबीर सिंह और प्रभचरण सिंह ने बताया कि माहौल काफी तनावपूर्ण है। यही कारण है कि लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश कर रहे हैं। अभी कई दिन तक ऐसा ही माहौल रह सकता है। हम घबराने वाले नहीं हैं। नारों के जोश से सेना का हौसला बढ़ाते रहेंगे।
गांव खाली करने की तैयारी में लोग, सुरक्षाबलों की गश्त बढ़ी
हरमनबीर सिंह, खेमकरण से
खेमकरण भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्धों का गवाह रहा है। सीमा पर जारी तनाव के बावजूद यहां जनजीवन सामान्य बना हुआ है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो वे गांव खाली करने के बारे में सोच सकते हैं। फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है। बाजारों में सामान्य दिनचर्या है। अधिकांश दुकानें खुली रहीं, लेकिन ग्राहकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। दुकानदारों का कहना है कि लोग जरूरी सामान तो खरीद रहे हैं, लेकिन सामान्य दिनों की तरह चहल-पहल नहीं दिख रही। वहीं, किराना दुकानों पर लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। लोगों ने राशन और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। व्यापारियों के अनुसार, यह हलचल एहतियातन भंडारण के लिए है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है।
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पाकिस्तानी ड्रोन हवा में ही मार गिराने से हौसले बुलंद
आदित्य पांडेय, जैसलमेर से
राजस्थान के जैसलमेर में बृहस्पतिवार रात पाकिस्तान की तरफ से दागे गए कई ड्रोन हवा में ही मार गिराए जाने से सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को हौसले बुलंद हैं। लोगों का कहना है कि अचानक हमले से पहले तो घबराहट हुई, पर दुश्मन के मंसूबे नाकाम होने से अब डरने की बात नहीं है। पाकिस्तान कभी भी भारत का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। एक स्थानीय निवासी ने कहा, हमने कई विस्फोटों की आवाज सुनी, लेकिन कोई भी विस्फोट जमीन पर नहीं हुआ। हमारी सेना और वायुसेना ने सभी पाकिस्तानी ड्रोन बेअसर कर दिए। अन्य व्यक्ति ने कहा िक भारतीय वायु रक्षा प्रणाली की ताकत देखकर हम सबने राहत की सांस ली।
ब्लैकआउट के बीच बरत रहे सावधानी
भास्कर शर्मा, कच्छ से
गुजरात के कच्छ और बनासकांठा जिले पाकिस्तान के साथ सीमा साझा करते हैं। ड्रोन हमले तेज होने की आशंका को देखते हुए विशेष एहतियात बरती जा रही है। तनाव के बीच दोनों जिलों के बड़े हिस्सों में बृहस्पतिवार रात ब्लैकआउट रहा। स्थानीय लोगों ने इसमें सक्रिय भागीदारी दिखाई और हरसंभव सावधानी बरती। भुज, नलिया, नखत्राणा और गांधीधाम कस्बों सहित कच्छ के कई हिस्सों में लोग घंटों अपने घरों में कैद रहे। बनासकांठा जिले के सुईगाम तालुका के कई सीमावर्ती गांवों में भी यही स्थिति रही।
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