फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

What issue in Kerala SIR: एसआईआर पर राजनीतिक दलों ने क्यों जताई आपत्ति? चुनाव आयोग ने मतभेद के बीच कही ये बात

Sat, 27 Dec 2025 10:04 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

Special Intensive Revision Kerala: केरल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान राजनीतिक दलों ने मतदाताओं की सुनवाई कम करने की मांग की है। दलों का कहना है कि सुनवाई से आम लोगों को परेशानी हो सकती है। इस पर चुनाव आयोग ने कई बाते कहीं। आइए विस्तार से समझते हैं।
विज्ञापन
चुनाव आयोग - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केरल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान राजनीतिक दलों और चुनाव प्रशासन के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। शनिवार को हुई बैठक में कई दलों ने मतदाताओं की सुनवाई कम से कम करने की मांग उठाई। दलों का कहना है कि सुनवाई की प्रक्रिया से आम मतदाताओं को परेशानी हो सकती है, इसलिए इसमें छूट दी जाए।

विज्ञापन


यह मुद्दा मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर द्वारा बुलाई गई बैठक में उठा। एसआईआर के तहत वर्ष 2002 की मतदाता सूची को आधार बनाया गया है। इसके चलते राज्य में 19.32 लाख से अधिक मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने को कहा गया है। राजनीतिक दलों ने आशंका जताई कि यदि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी नोटिस जारी कर सुनवाई करेंगे, तो बड़ी संख्या में मतदाता परेशान होंगे।

ऑनलाइन दस्तावेज और वर्चुअल सुनवाई की मांग
बैठक में दलों ने सुझाव दिया कि मतदाताओं को पहचान से जुड़े दस्तावेज ऑनलाइन जमा करने की अनुमति दी जाए। साथ ही सुनवाई की जरूरत पड़ने पर वर्चुअल माध्यम अपनाया जाए। दलों ने यह भी आपत्ति जताई कि सुनवाई के दौरान जाति प्रमाण पत्र को पहचान के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जो उचित नहीं है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- Assam Special Revision: मतदाता सूची में विशेष संशोधन के बाद असम में 10.56 लाख नाम कटे; ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी

भाजपा की अलग राय
जहां अधिकतर दल सुनवाई से राहत चाहते दिखे, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने अलग रुख अपनाया। भाजपा ने साफ कहा कि एसआईआर का उद्देश्य पूरा करने के लिए मतदाताओं की सुनवाई जरूरी है। पार्टी की ओर से कहा गया कि बिना सुनवाई के मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं बनाया जा सकता।

चुनाव अधिकारी का स्पष्ट रुख
मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर ने कहा कि सभी मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाना जरूरी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नोटिस पाने वाले मतदाताओं के दस्तावेज संतोषजनक पाए जाते हैं, तो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी सुनवाई न करने का फैसला ले सकते हैं। यानी अंतिम निर्णय अधिकारियों के विवेक पर निर्भर करेगा।

बैठक पर उठे सवाल, फिर भी जारी रहेगा संवाद
बैठक में सत्तारूढ़ माकपा की ओर से एम विजयकुमार और भाजपा की ओर से जे आर पद्मकुमार शामिल हुए। कांग्रेस प्रतिनिधि एम के रहमान ने हाल ही में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की ओर इशारा किया। यूडीएफ नेताओं ने आरोप लगाया कि बैठकों में दलों के सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। इस पर केलकर ने कहा कि यदि दलों को बैठकें बेकार लगती हैं, तो इन्हें अगले सप्ताह से बंद किया जा सकता है। हालांकि, सभी दल अगले सप्ताह फिर बैठक करने पर सहमत हो गए।
विज्ञापन


ड्राफ्ट सूची में कुल 2 करोड़ 54 लाख 42 हजार 352 मतदाता शामिल किए गए हैं। वहीं, गणना चरण पूरा होने के बाद 24 लाख 8 हजार 503 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। मतदाता 22 जनवरी 2026 तक ड्राफ्ट सूची पर दावा और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।


अन्य वीडियो-

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें