साल 2017 में जब चीन के साथ डोकलाम विवाद सुलझने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मिलने वाले थे। तब उस वक्त के तत्कालीन सेना प्रमुख बिपिन रावत ने चेतावनी देते सलामी स्लाइसिंग स्ट्रैटजी का जिक्र किया था। आज जब एक बार फिर से दोनों देशों बीच सीमा विवाद के चलते तनाव चरम पर है, तो एक बार फिर से चीन की इस रणनीति के बारे में चर्चा होने लगी है। आखिर सलामी स्लाइसिंग स्ट्रैटजी है क्या, जिसके जरिए चीन हमेशा भारतीय जीमन पर कब्जा करने की फिराक में जुटा रहता है।
विदेशी मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के साथ सीमा विवाद को चीन कभी सुलझाना ही नहीं चाहता है। चीन की कोशिश हमेशा यही रही है कि वो भारत को डरा कर उसपर दबाव बनाए रखे। सलामी स्लाइसिंग एक तरह की टुकड़े-टुकड़े नीति है। इस नीति का इस्तेमाल कर चीन पहले किसी क्षेत्र में अपना दावा करता है, फिर वो लगातार अपनी बात दोहरता है। जब उसके इस कदम को लेकर विरोध होता है, तब वो खुलकर अपना रवैया जाहिर कर देता। कई जगहों पर उसने इसी नीति से विस्तार बढ़ाया है।
सलामी स्लाइसिंग को और आसान भाषा में समझने की कोशिश करें, तो कोई भी देश अपने पड़ोसी देशों के खिलाफ छोटे-छोटे सैन्य ऑपरेशन से धीरे-धीरे किसी बड़े इलाके पर अपना कब्जा जमाना शुरू करता है। ये ऑपरेशन इतने टुकड़ों में होते हैं कि इनसे किसी भी तरह के बड़े खतरे का अंदेशा नहीं होता है। मगर इस नीति से पड़ोसी देश यह समझ नहीं पाता है कि ऐसे सैन्य ऑपरेशन का कैसे और किस स्तर पर जवाब दिया जाए। चीन इसी नीति के जरिए पड़ोसी देशों की जमीन पर कब्जा जमाने की फिराक में जुटा रहता है।
साल 1962 में भी चीन ने कुछ इसी तरह की कोशिश की थी। पहले चीन ने हमला बोलते हुए भारतीय सीमाओं में सैकड़ों किलोमीटर तक घुसपैठ की। जब भारतीय सेना ने विरोध किया तो चीन ने पूर्वी क्षेत्र से अपनी सेना को वापस बुला लिया। इसके उसने सलामी स्लाइसिंग नीति अपनाई और अक्साई चिन को अपने क्षेत्र में होने का दावा कर दिया। कभी अक्साई चिन जम्मू कश्मीर राज्य का हिस्सा था। तिब्बत और भारत के क्षेत्र में कामयाबी मिलने के बाद चीन ने सलामी स्लाइसिंग की अपनी रणनीति को दोहराते हुए 1974 में वियतनाम से पैरोसेल द्वीप पर कब्जा कर लिया था।
साल 1933 की शुरूआत में जर्मनी में पूर्ण शक्ति हासिल करने के लिए नाजी पार्टी की नीतियों को भी सलामी रणनीति या टुकड़े- टुकड़े करके अधिकार जताने की नीति के रूप में जाना जाता है। इसमें रेइचस्ताग फायर ने जर्मन आबादी को दबा दिया। कम्युनिस्ट पार्टी और सोशल डेमोक्रेट्स को बंदी बना दिया, उसके बाद हिटलर को पूर्ण शक्ति प्राप्त हुई थी।