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क्या होता है 'बीएस' मानक, 2020 तक बीएस6 के लागू होने से 80 फीसदी कम होगा प्रदूषण

Sat, 04 May 2019 05:08 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media
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सुप्रीम कोर्ट का वो आदेश के अनुसार देश में एक अप्रैल 2020 से बीएस4 वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन नहीं होंगे। जिसके कारण हाल में ही भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियों में से एक मारूति सुजुकी इंडिया ने घोषणा की है कि साल 2020 से वह देश में डीजल कारों के निर्माण और बिक्री को बंद करने जा रहा है। भारत सरकार भी बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए यह घोषणा कर चुकी है कि देश में 2020 तक बीएस6 मानक को लागू कर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे प्रदूषण में 80 फीसदी की कमी आएगी।
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कुछ महीने पहले जारी विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में 14 भारत के हैं। ऐसे में केंद्र का यह फैसला कि वह 2020 तक बीएस6 मानक को लागू कर देगी यह निश्चित ही प्रदूषण में कमी लाएगा। 

ऐसा माना जा रहा है कि बीएस6 मानक के लागू होने से मारूति के अलावा अन्य कार निर्माता कंपनियां भी प्रभावित होंगी। इससे कार की कीमतों में बढ़ोत्तरी के भी आसार हैं। डीजल मॉडल की कारों के मुकाबले पेट्रोल मॉडल की कारें ज्यादा महंगी होती हैं। पहले चरण में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता सहित जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिमी यूपी के अलावा कुछ शहरों में बीएस-6 मानक लागू होंगे। 
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क्या होता है बीएस मानक

भारत सरकार ने साल 2000 में स्टैंडर्ड यूरोपीय मानदंडों को देखकर भारत के अनुसार ‘भारत स्टेज’ की शुरुआत की। जिसे बोलचाल की भाषा में 'बीएस' बोला जाता है। यह गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण के उत्सर्जन का मानक है। इसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वाहनों के लिए तय करता है।

वायु प्रदूषण से भारत में हर साल 12 लाख लोगों की मौत

एक रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में दुनिया भर में गंभीर बीमारियों से लगभग 50 लाख लोगों की मौत हुई। जिसमें भारत के 12 लाख लोगों की मौत शामिल थी। यूएस हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट की वायु प्रदूषण पर एक वैश्विक रिपोर्ट 'स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2019' में भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण के बारे में चेताया गया है।

बच्चों की औसत आयु में 20 महीनों की कमी

शोध में इस बात पर ज्यादा जोर दिया गया है कि प्रदूषण के कारण पैदा हो रहे स्वास्थ्य संबंधी खतरों से वर्तमान में पैदा होने वाले बच्चों की औसत आयु में 20 महीने की कमी होगी। इसका सबसे बड़ा कारक प्रदूषण और धुम्रपान है। भारत में अभी भी 60 फीसदी से ज्यादा लोग खाना बनाने के लिए लकड़ी और कोयला जैसे ठोस ईंधन का प्रयोग कर रहे हैं।

बीएस6 मानक लागू होने से यह होगा असर

सुधरेगी हवा की सेहत

बीएस6 मानक के प्रयोग में आने के बाद से हवा में प्रदूषण की मात्रा 80 फीसदी तक कम हो जाएगी।  बीएस4 और बीएस3 फ्यूल में सल्फर की मात्रा 50पीपीएम होती है। यह बीएस 6 स्टैंडर्ड आने के बाद घटकर 10पीपीएम रह जाएगा।

तेल के दाम छूएंगे आसमान

बीएस-6 मानक के ईंधन की सप्लाई के लिए सरकारी तेल कंपनियां रिफाइनरियों में लगभग 28 हजार करोड़ रुपए का निवेश करेंगी। इससे ईंधन की कीमतों में वृद्धि के आसार हैं।

वाहनों का माइलेज भी बढ़ेगा 

बीएस-6 से वाहनों की इंजन की क्षमता बढ़ेगी। जिससे कारें 4.1 लीटर में 100 किलोमीटर से अधिक का माइलेज देंगी। इससे सबसे बड़ा फायद यह होगा कि वाहन निर्माता कंपनियां गाड़ियों की माइलेज में फर्जीवाड़ा नहीं कर पाएंगी। क्योंकि कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिसमें वाहन निर्माता कंपनियां जो दावा करती हैं जमीनी स्तर पर हकीकत उससे अलग होती है।
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मानक अपग्रेड करने से क्या अंतर आएगा? 

बीएस मानक को अपग्रेड किए जाने का मकसद ही प्रदूषण को कम करना होता है। इससे वाहनों से धुएं के रूप में होने वाले प्रदूषण पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी। अकेले दिल्ली की हवा इतनी खराब है कि अगर बीएस6 मानक को लागू नहीं किया जाता है तो लोगों का खुली हवा में सांस लेना मुश्किल हो जाएगा।

वर्तमान में बीएस3 और 4 से हो रहे हैं ये बड़े नुकसान 

देश की सड़कों पर चल रहे मौजूदा वाहनों में बीएस-3 वाहनों से निकलने वाला धुआं हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक है। इसी तरह बीएस4 भी इससे कुछ कम नहीं है। इनसे निकलने वाला धुआं कई बीमारियों को जन्म देता है।
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