न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Fri, 03 Nov 2023 05:39 PM IST
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
- फोटो : amar ujala
दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समन को नजरअंदाज करने पर सियासी शुरू हो गई है। ईडी ने केजरीवाल को समन भेजकर गुरुवार को दिल्ली शराब घोटाले में जांच के लिए पेश होने को कहा था। इस मामले में आम आदमी पार्टी ने कहा कि एजेंसी भाजपा के इशारे पर काम कार रही है, तो भाजपा ने पलटवार किया कि केजरीवाल जांच से भाग रहे हैं। अब खबर है कि ईडी दिल्ली के सीएम को फिर समन भेज सकती है।
आइये जानते हैं कि दिल्ली शराब घोटाले में अभी क्या हो रहा है? केजरीवाल ईडी के सामने क्यों पेश नहीं हुए? एजेंसी के पास अब क्या विकल्प हैं? क्या पेश नहीं होने पर केजरीवाल की गिरफ्तारी भी हो सकती है?
दिल्ली शराब नीति घोटाला
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दिल्ली शराब घोटाले में अभी क्या हो रहा है?
दिल्ली शराब घोटाले में मनी लांड्रिंग की जांच कर रही ईडी ने 31 अक्तूबर को अरविंद केजरीवाल को समन भेजा था। समन के जरिए गुरुवार (2 नवंबर) को एजेंसी ने मामले में जारी जांच में शामिल होने के लिए केजरीवाल को पेश होने को कहा था। हालांकि, अरविंद केजरीवाल प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश नहीं हुए और पंजाब के सीएम भगवंत मान के साथ मध्य प्रदेश के सिंगरौली में रोड शो करने चले गए।
इससे पहले इस मामले में सीबीआई ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अप्रैल 2023 में पूछताछ की थी। उस वक्त केजरीवाल को मामले में गवाह के तौर पर जांच के लिए बुलाया गया था। हालिया समन अब रद्द की जा चुकी दिल्ली की शराब नीति में मनी लांड्रिंग की जांच कर रही ईडी ने भेजा था।
दिल्ली शराब घोटाला
- फोटो : AMAR UJALA
ईडी ने केजरीवाल को समन क्यों भेजा था?
दरअसल, ईडी ने अपनी चार्जशीट में कई बार अरविंद केजरीवाल के नाम का जिक्र किया है। अदालत में दायर आरोप पत्र में ईडी ने बताया कि दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 आप के शीर्ष नेताओं द्वारा बनाई गई थी, ताकि लगातार अवैध धन कमा कर और उसे अपने पास लाया जा सके। ईडी ने दावा किया कि यह नीति अवैध और आपराधिक गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए जानबूझकर कमियों के साथ बनाई गई थी। एजेंसी ने आरोप पत्र में आरोपियों के साथ सीएम के घर पर बैठक से लेकर वीडियो कॉल तक की घटनाओं का उल्लेख किया है।
अरविंद केजरीवाल
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...तो केजरीवाल ईडी के सामने क्यों पेश नहीं हुए?
ईडी के समन को नजरअंदाज करने से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ईडी को एक जवाबी खत लिखा। इस पत्र में केजरीवाल ने कहा कि समन का नोटिस अवैध और राजनीति से प्रेरित है। नोटिस भाजपा के इशारे पर भेजा गया है।
सीएम केजरीवाल ने यह भी कहा कि नोटिस यह सुनिश्चित करने के लिए भेजा गया है कि मैं चार राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए जाने में असमर्थ रहूं। ईडी को तुरंत नोटिस वापस लेना चाहिए।
सांकेतिक फोटो
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एजेंसी का अगला कदम क्या हो सकता है?
ईडी के सामने केजरीवाल के पेश नहीं होने के कारण लोगों के मन में कई सवाल उठने लगा है कि एजेंसी अब क्या करेगी। दरअसल, धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) की धारा 50 ईडी को किसी भी व्यक्ति को समन जारी करने की शक्ति देती है। PMLA की धारा 50 के तहत किसी भी व्यक्ति को समन जारी करने और दस्तावेजों के प्रस्तुत करने और बयान दर्ज करने की आवश्यकता होती है।
दिल्ली शराब मामले में अगली कार्रवाई के लिए ईडी के सामने कई विकल्प हैं। एजेंसी चाहे तो केजरीवाल को जल्द एक नया समन जारी कर पूछताछ के लिए बुला सकती है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब लोगों ने अलग-अलग कारणों से ईडी के समन को नजरअंदाज किया है। इनमें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी, कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार जैसे कई विपक्षी नेता भी शामिल हैं। सोरेन को रांची जमीन घोटाले में पूछताछ के लिए ईडी पांच बार समन भेज चुकी है लेकिन वह एक बार भी उपस्थित नहीं हुए है। इसके बजाय सीएम सोरेन ने समन के खिलाफ उच्चतम न्यायालय और झारखंड उच्च न्यायालय का रुख किया लेकिन फैसला उनके खिलाफ आया।
अरविंद केजरीवाल के मामले में ईडी के सामने दूसरा विकल्प अदालत का है। जैसा कि केजरीवाल ने ईडी के समन को ही गैर कानूनी करार दिया है, तो एजेंसी संबंधित अदालत का रुख करके उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर सकती है। दरअसल, पीएमएलए कानून के मुताबिक कोई भी व्यक्ति ईडी के तीन ही समन को नजरअंदाज कर सकता है और उसके बाद जांच एजेंसी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी कर सकती है। उस स्थिति में, केजरीवाल को अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा। यदि केजरीवाल एनबीडब्ल्यू की अवहेलना करते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है और अदालत में पेश किया जा सकता है।
इस बीच, ईडी के पास यह भी अधिकार है कि वह केजरीवाल के आवास पर छापेमारी कर सकती है। अगर उनके खिलाफ आपत्तिजनक सबूत मिले तो उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है।