लाल बत्ती एक्सप्रेस में भाग लेती मुंबई की बेटियां
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उन्होंने बचपन से सिर्फ यातनाएं ही देखी है। वो सेक्स वर्कर हैं और उनकी बेटियां भी हैं। लेकिन इन बेटियों ने अपने माथे पर लगे सेक्सवर्कर के दाग को अपनी कला से कुछ यूं मिटाया कि लंदन की आंखों से झरझर आसूं गिरने लगे। मुबंई के कमाठीपुरा की इन बेटियों को भले ही भारत ने न पहचाना हो लेकिन लंदन में ये बेटियां खूब तालियां बटोर रही हैं। ये बेटियां दुनिया के सबसे बड़े आर्ट फेस्टिवल ईडनबर्ग फ्रिंज में भाग लेने लंदन पहुंची हैं।
इनमें से ही एक हैं कविता होस्मानी। कविता हमेशा से सूफी गायक बनना चाहती थी लेकिन चार साल की उम्र में पिता को खोने के बाद कविता की पूरी जिंदगी ही बदल गई। कविता एक सेक्स वर्कर की बेटी है। बचपन से ही शोषण और क्रूरता का शिकार रहीं लेकिन यह त्रासदी सिर्फ कविता के हिस्से में ही नहीं आई है बल्कि ऐसी हजारों लड़कियां है जिन्होंने पल पल खुद को मारा है।
लंदन में हो रहे आर्ट फेस्टिवल ईडनबर्ग फ्रिंज फेस्टिवल में 15 से 22 साल की लड़कियां हिस्सा ले रही हैं। कविता कहती हैं कि हमारे इलाके में हर तरह के लोग आते है उनमें पुलिसवाले भी होते हैं जो सेक्स के लिए मुझसे इच्छा जाहिर करते है साथ ही पैसे भी देते है। इसछोटी सी जिंदगी में मैंने सबकुछ देखा है और मुझे इसे छिपाने की कोई जरूरत नहीं। ये हमारे जीवन का एक हिस्सा है।
लंदन पहुंची सेक्स वर्कर्स की बेटियां
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16 साल की रानी की कहानी रुला देने वाली है। रानी की मुस्कान बहुत खूबसूरत है। उसके मुस्कुराते ही लगता है जैसे अंधेरे में उजाला भर देना। रानी जब 16 साल की थी तब उसके पिता का निधन हो गया था। मां ने दूसरी शादी कर ली। लेकिन वो पिता के रूप में एक हैवान था न उसने मां को पत्नी समझा और न उसे बेटी। रानी की बातें किसी को भी मोह लेंने वाली थीं। उसने कहा मैंन 16 साल की उम्र में ही सीखा है कि जीवन में खुद के लिए आप ही सबसे बड़ा उपहार हैं।
मुंबई से निकली ये बेटियां 'लाल बत्ती एक्सप्रेस' के नाम से जानी जा रही हैं। ये बेटियां कमाठीपुरा की एनजीओ 'क्रांति' की मदद से लंदन पहुंची हैं। हर लड़की की कहानी आखों में आंसू भर देने के लिए काफी है। ये सभी लड़कियां यूके में एक सेक्स वर्कर के यहां ही रुकीं हुई हैं।
कविता बताती हैं कि यूके में उन्हें जिन लड़कियों से मिलाया गया वो हमारे जैसी ही हैं और ये मुलाकात बहुत खास है। सेक्स वर्कर होने की वजह से हम एक दूसरे को समझते हैं। क्योंकि हम एक जैसे हलात से गुजर रहे हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट में बताया गया है कि इन बेटियों की आपबीती सुनकर और परफॉरमेंस देख कर वहां लोगों की आंखों में आंसू थे। वो रो रहे हैं। लालबत्ती एक्सप्रेस' के अमेरिकन को-फाउंडर रॉबिन चौरसिया ने कहा इस परफॉर्मेंश के जरिए 'लाल बत्ती एक्सप्रेस' का मकसद सिर्फ एक कहानी नहीं बताना बल्कि सेक्स वर्करों के बारे में रूढ़िवादी सोच को चुनौती देना भी है।
उन्होंने बताया कि थियेटर लड़कियों के आत्मविश्वास को बढावा देने और उनके साथ हुए गलत व्यवहार से उबरने में उनकी मदद कर रहा है। थिएटर थेरेपी की वजह से इन लड़कियों में अगल सा आत्मविश्वास देखने को मिल रहा है।
मनोविज्ञान का अध्यन कर रही अश्विनी जल्द ही न्यूयॉर्क जाने वाली हैं उन्होंने बताया कि शो के दौरान इन लड़कियों जबरदस्त कान्फिडेंस देखने को मिला। उन्होंने बताया कि यहां मौजूद लड़कियों के साथ बहुत कुछ घटा है जिनसे वो बुरी तरह टूट चुकी थी। यहां जो कॉन्फीडेंस मैं इनमें देख रही हूं वह मुझे मुबंई में देखने को नहीं मिला। ये लड़कियां आने वाले दिनों में ग्लास गो और एल्गिन में परफॉर्म करेंगी।