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गांधीजी की हत्या के बाद अदालत में क्या कहा था नाथूराम गोडसे ने...

Mon, 13 May 2019 01:42 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Nathuram godse
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लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान फिल्म अभिनेता से नेता बने कमल हासन के बयान से विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने नाथूराम गोडसे को आजाद भारत का पहला आतंकवादी बता दिया। कमल हासन अरवाकुरिची विधानसभा क्षेत्र में प्रचार कर रहे थे, जहां 19 मई को उपचुनाव होना है। उन्होंने फरवरी 2018 में मक्कल निधि मय्यम पार्टी का गठन किया था।
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कमल हासन ने कहा, 'मैं ये इसलिए नहीं कह रहा कि यहां काफी संख्या में मुसलमान हैं। मैं ये महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने कह रहा हूं। आजाद भारत में पहला आतंकवादी एक हिंदू था। उसका नाम था- नाथूराम गोडसे'

इस दौरान हासन ने कहा है कि वो खुद को गौरवान्वित भारतीय मानते हैं जो भारत में एकता चाहता है। जो मानता है कि तिरंगे के तीन रंगों का एक मतलब हर धर्म को साथ रहने का संदेश भी है। हासन के मुताबिक वो 1948 में महात्मा गांधी की हत्या को लेकर जवाब मांगने पहुंचे हैं। 
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जानिए नाथूराम गोडसे ने अदालत में क्या दी थी गवाही

nathuram godse
नाथूराम ने एक बार जेल में ही गांधी-हत्या का ज़िक्र करते हुए गोपाल गोडसे को बताया था, “30 जनवरी को मैंने छह गोलियों से लोड अपने रिवॉल्वर को लेकर बिड़ला हाऊस में शाम 4.55 बजे प्रवेश किया। रक्षकों ने मेरी तलाशी नहीं ली। 5.10 बजे गांधीजी मनु गांधी और आभा गांधी के कंधे पर हाथ रखे बाहर निकले। जैसे ही मेरे सामने आए सबसे पहले मैंने देश की शानदार और महान सेवा के लिए उनका ‘नमस्ते’ कहकर उनका अभिवादन किया और देश का नुकसान करने के लिए उन्हें ख़त्म करने के उद्देश्य से दोनों कन्याओं को उनसे दूर किया और फिर 5.17 बजे 3 गोलियां गांधीजी के सीने में उतार दी।”

नाथूराम ने आगे बताया- “दरअसल, मेरी गोली जैसे ही चली, गांधीजी के साथ चल रहे 10-12 लोग दूर भाग गए। मुझे लगा था कि जैसे ही मैं गांधीजी को मारूंगा, मेरी हत्या कर दी जाएगी, लेकिन सब लोग आतंकित होकर दूर भाग गए। मैंने गांधीजी की हत्या करने के बाद रिवॉल्वर समेत हाथ ऊपर उठा लिया। मैं चाहते था, कोई मुझे गिरफ़्तार कर ले। लेकिन कोई मेरे पास आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। मैं पुलिस-पुलिस चिल्लाया। फिर मैंने एक सिपाही को आंखों से संकेत किया कि मेरी रिवॉल्वर ले लो। उसे विश्वास हो गया कि मैं उसे नहीं मारूंगा और वह हिम्मत जुटाकर मेरे पास आया और मेरा हाथ पकड़ लिया। इसके बाद लोग मुझ पर टूट पड़े और मुझे मारने लगे।” 

बहारहाल, डीएसपी जसवंत सिंह के आदेश पर दसवंत सिंह और कुछ पुलिस वाले नाथूराम को तुगलक रोड थाने ले गए। रात को क़रीब पौने दस बजे बापू की हत्या की एफ़आईआर लिखी गई। इसे थाने के दीवान-मुंशी दीवान डालू राम ने लिखा था।
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गांधी जी के निधन की सूचना 

नाथूराम गोडसे, महात्मा गांधी
जब शाम 5:45 बजे आकाशवाणी ने गांधी के निधन की सूचना दी और कहा कि नाथूराम गोडसे नाम के व्यक्ति ने उनकी हत्या की तो सारा देश हैरान रह गया कि मराठी युवक ने यह काम क्यों किया, क्योंकि लोगों को आशंका थी कि कोई पंजाबी या सिंधी व्यक्ति गांधीजी की हत्या कर सकता है।

बहरहाल, गांधीजी हत्या में नाथूराम के अलावा नारायाण आप्टे, मदनलाल पाहवा, गोपाल गोडसे, विष्णु करकरे, विनायक सावरकर, शंकर किस्तैया और दिगंबर बड़गे गिरफ्तार कर लिए गए। बाद में और दिगंबर बड़गे वादा माफ़ सरकारी गवाह बन गए। उनकी गवाही को आधार बनाकर नाथूराम और नाना की फ़ांसी दी गई। इस केस के सबसे चर्चित आरोपी सावरकर को अदालत ने बरी कर दिया।

नोटः  लेख में शामिल तथ्य राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की दुखद हत्या के बाद मुख्य गवाह एससी जैन की किताब- Gandhi : The Forgotten Mahatma by SC Jain (who was one of the main witness) और गांधी जी की हत्या के आरोपी नाथूराम गोड्से की मराठी किताब Gandhi Vadh aani me (गांधीवध और मैं -गोपाल गोडसे) से लिए गए हैं। दोनों ही किताबों में हत्याकांड की सुनवाई पर बनी फाइल का जिक्र है इसके अलावा लेख को गांधी हत्याकांड से संबंधित अन्य दस्तावेजों के आधार पर भी वरिष्ठ पत्रकार हरगोविंद विश्वकर्मा ने तैयार किया है।
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