सत्ता पक्ष (सरकार) को विपक्ष की कमजोर नस का अंदाजा था। विपक्ष के लिए अपने कुनबे में टीडीपी को शामिल करना मजबूरी है। टीडीपी तीन साल से अधिक समय तक सरकार के साथ थी और इसने अचानक केन्द्र सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।
वैसे भी एनडीए की पिछली सरकार के समय भी टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू इसके (एनडीए) के संयोजक थे। विपक्ष के पास वैसे भी लोकसभा में संख्या बल कम है। कम संख्या बल होने के साथ-साथ विपक्षी एकता को बनाए रखना कांग्रेस पार्टी की बसे बड़ी मजबूरी है। इसलिए कांग्रेस को इस पर साथ देनी ही है। सत्ता पक्ष को विपक्ष की इस स्थिति का भरपूर अंदाजा है। लिहाजा केन्द्र सरकार से धीरे से अपना तुरुप का पत्ता सरका दिया।
कांग्रेस का पार्ट-2
अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को मंजूर किए जाने के बाद अब इस पर चर्चा और मत विभाजन दोनों शुक्रवार 20 जुलाई को प्रस्तावित है। सात घंटे की प्रस्तावित चर्चा के जहां इससे भी अधिक समय तक चलने की पूरी संभावना है, वहीं सत्ता पक्ष और विपक्ष की तरफ से तंज, व्यंग भी खूब चलने की उम्मीद की जा रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों एक दूसरे के जहर बुझे तीरों से लहू-लुहान होने के लिए तैयार हैं।
वहीं कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव पार्ट-2 के लिए तैयारी कर रही है। पार्टी की कोशिश है कि वह अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्षी दलों में सबसे अधिक संख्याबल होने तथा राष्ट्रीय पार्टी होने के कारण अपना दबदबा बनाए रखे। साल के अंत में मिजोरम, राजस्थान, म.प्र., छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। इसलिए पार्टी के नेता मोदी सरकार को घेरने की जोरदार तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए लोकसभा से लेकर संसद भवन परिसर और बाहर पार्टी मुख्यालय तक सत्ता पक्ष और विपक्ष ने मीडिया में प्रचार-प्रसार के लिए जोरदार तैयारी कर रखी है।