केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को संसद में वर्ष 2016-17 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। हालांकि आगामी बजट के बारे में तो कुछ नहीं कहा गया लेकिन इसमें कुछ ऐसे तथ्यों को जरूर शामिल किया गया है, जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि इन्हें वर्ष 2017-18 के बजट में शामिल किया जा सकता है।
यूबीआई
सार्वभौमिक बुनियादी आय (यूबीआई) योजना की घोषणा वर्ष 2017-18 के बजट में हो सकती है। आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि जीडीपी की करीब आठ फीसदी राशि अभी लोगों को किसी न किसी रूप में सब्सिडी मिल रही है। इसे यदि यूबीआई के जरिये भेजा गया तो गरीबी हटाने में काफी मदद मिलेगी। इसमें सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थी के खाते में जाएगी और लालफीताशाही और बिचौलियों की छुट्टी हो जाएगी।
पारा
आर्थिक समीक्षा में पब्लिक सेक्टर एसेट रिहेबलिटेशन एजेंसी (पारा) की भी चर्चा है। इसमें कहा गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों की बड़ी राशि एनपीए हो चुकी है और इसकी वसूली के लिए एक औपचारिक एजेंसी की आवश्यकता है। इसमें बताया गया है कि कुछ ऐसी ही स्थिति पहले पूर्वी एशियाई देशों में भी थी जहां इसी तरह से निदान निकाला गया।