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कैसे तय होते हैं कोरोना के सक्रिय मामले? क्या कहते हैं सरकार और WHO के नियम?

Thu, 25 Jun 2020 09:00 PM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लोगों के तापमान की जांच करते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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लॉकडाउन में ढील देने और व्यवसायों को फिर से खोलने के बाद से देशभर में कोरोना के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। रोजाना दस हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं, वहीं इस महामारी से मरने वालों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। लेकिन सरकार के आंकड़ों के मुताबिक देश में इस जानलेवा वायरस से ठीक होने वालों की संख्या भी बढ़ रही है।

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इन सबके बीच एक ऐसा आंकड़ा है जो सुनने में थोड़ा सुकून तो देता है लेकिन असलियत में ऐसा है नहीं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बृहस्पतिवार तक देश में सक्रिय (एक्टिव) मामलों की संख्या 186514 है। हालांकि सक्रिय मरीजों का मतलब यहां जांच से नहीं है बल्कि इसका संबंध कोरोना संक्रमण से ही है जो सही मायनों में चिंता का विषय है।

विश्व स्वस्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और भारत सरकार के नियमों के मुताबिक, 'सक्रिय मामलों का मतलब होता है, वे लोग जो पिछले 14 दिन में या तो कोरोना से संक्रमित रहे हैं हैं और या फिर इस दौरान किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं। इसका साफ मतलब है कि सक्रिय लोगों की 186514 संख्या वो है जो  पिछले 14 दिनों में संक्रमित हुए हैं।
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इसमें चिंता वाली बात यह है कि अगर अगले 14 दिनों तक हर दिन के लिहाज से ठीक होने वालों का आंकड़ा अभी कम है और नए मामलों की संख्या में रोजाना रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही है। 

अगर राज्यों के हिसाब से सक्रिय मामलों की देखें तो इनकी सबसे ज्यादा संख्या महाराष्ट्र में 62369, तमिलनाडु में 28839 और दिल्ली में 26588    है जो एक तरह से चिंता वाली बात है।
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आंकड़ों को देखें तो देश में अब भी रोजाना ठीक होने वालों की तुलना में संक्रमितों की संख्या अधिक है और इसमें हर दिन बढ़ोतरी हो रही है। 

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