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H-1B Visa: ट्रंप के फैसले से प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर सवाल; पश्चिमी-चीनी मीडिया में हो रही अलग-अलग विवेचना

Sun, 21 Sep 2025 06:09 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : अमर उजाला
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अमेरिका के इस फैसले के पश्चिमी और चीनी मीडिया में अलग-अलग व्याख्या सामने आ रही है। अमेरिकी और यूरोपीय मीडिया जहां इस फैसले को घरेलू राजनीति और अमेरिकी टेक सेक्टर पर बोझ की तरह देख रहा है, वहीं चीनी मीडिया इसे अमेरिका की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कमजोरी के संकेत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। दोनों ही नजरियों में एक बात साझा है कि यह फैसला अमेरिकी टेक सेक्टर की लंबी अवधि की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर सवाल खड़ा करता है। इस फैसले का भारतीय पेशेवरों को इसका सबसे बड़ा खामियाजा उठाना पड़ेगा।

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वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, वीजा फीस में वृद्धि से सरकार को राजस्व मिलेगा, लेकिन तकनीकी कंपनियों के लिए यह बोझिल होगा। खासकर भारतीय आईटी कंपनियों और अमेरिकी स्टार्टअप्स को इससे सबसे ज्यादा नुकसान होगा। अमेरिकी टेक सेक्टर के भविष्य पर भी पर भी यह फैसला एक बोझ की तरह होगा।

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कमजोर होगा अमेरिका
फाइनेंशियल टाइम्स (यूके) के अनुसार, यह कदम वैश्विक टैलेंट की दौड़ में अमेरिका की स्थिति को कमजोर कर सकता है। कनाडा और यूरोप जैसे देश फायदा उठाकर अधिक पेशेवर आकर्षित करेंगे। कुछ फैसले अल्पकालीन लाभ दे सकते हैं, लेकिन उनका दूरगामी असर बहुत गहरा होता है। यह फैसला भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लाभ नहीं दिला पाएगा।

नकारात्मक पड़ेगा असर
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, यह कदम ट्रंप प्रशासन की अमेरिकन जॉब्स फर्स्ट नीति की वापसी जैसा है, लेकिन इसका दीर्घकालिक असर अमेरिकी इनोवेशन पर नकारात्मक हो सकता है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

यह कदम संरक्षणवादी
फ्रांस के प्रमुख अखबार ले मोंद ने फैसले को संरक्षणवादी कदम बताते हुए लिखा कि यह अल्पकालिक रूप से अमेरिकी सरकार के लिए राजस्व लाभकारी हो सकता है, लेकिन दीर्घकाल में इसकी वजह से अमेरिका अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धा कमजोर कर सकता है। अखबार ने खास तौर पर उल्लेख किया कि भारतीय कंपनियों और पेशेवरों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि भारत इस वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी है। यूरोप खासतौर पर फ्रांस, जर्मनी और नीदरलैंड इसके चलते अधिक प्रतिभा आकर्षित करने में सक्षम होंगे, क्योंकि वे पहले से ही ब्ल्यू कार्ड जैसी नीतियों के जरिए उच्च कौशल वाले पेशेवरों को लुभा रहे हैं।
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चीनी मीडिया का नजरिया
चीनी मीडिया ने इसे अमेरिका की वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर चोट के रूप में पेश किया है। ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि अमेरिका अपनी घरेलू राजनीति और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए विदेशी टैलेंट को रोक रहा है। यह न केवल भारतीय पेशेवरों बल्कि चीन और अन्य एशियाई देशों के लिए भी बाधा है। इससे चीन को अपने घरेलू टैलेंट को रोककर नवाचार पर अधिक फोकस करने का अवसर मिलेगा।

  • चाइना डेली के अनुसार, अमेरिकी टेक सेक्टर की मजबूती विदेशी पेशेवरों पर टिकी रही है। अगर फीस इतनी बढ़ाई जाएगी तो बड़ी संख्या में टैलेंट कनाडा, यूरोप और एशिया के देशों की ओर रुख करेगा। यह अमेरिका की ग्लोबल लीडरशिप के लिए चुनौती बनेगा।
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