पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची सुधार का सुनवाई चरण बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। 2025 की सूची के आधार पर 7.66 करोड़ फॉर्म में से 58 लाख फॉर्म जमा नहीं हुए, 1.34 करोड़ में विसंगतियां पाई गईं और कई नाम 2002 की सूची से मेल नहीं खाते। आइए जानते है कि इन चुनौतियों को लेकर चुनाव अधिकारी सुब्रत गुप्ता ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची सुधार का सुनवाई चरण चुनौतीपूर्ण मोड़ पर है। राज्य में चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में बताया कि सुनवाई में कठिनाइयां अब तक पूरी हुई गिनती (एन्यूमेरशन) से भी ज्यादा होंगी। उन्होंने बताया कि राज्य में जारी 2025 की मतदाता सूची के आधार पर 7.66 करोड़ एन्यूमेरशन फॉर्म वितरित किए गए थे। अभी तक इनमें से 58 लाख फॉर्म इकट्ठा नहीं किए गए हैं, क्योंकि मतदाता या तो अपने पते पर नहीं थे या स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके थे या फिर मर चुके थे या डुप्लीकेट एंट्री थी।
चुनाव आयोग के सामने कितनी कठिनाई?
बता दें कि वर्तमान में राज्य में केवल 3,300 EROs/AEROs हैं। अगर सुनवाई 45 दिनों में पूरी करनी हो, तो प्रत्येक अधिकारी को हर दिन लगभग 140 सुनवाई करनी होंगी। प्रत्येक सुनवाई केवल 10 मिनट की भी हो, तो भी दैनिक कार्यक्रम लगभग 23.5 घंटे का होगा, जो संभव नहीं है। इसलिए आयोग से 2,500-3,000 और अधिकारी नियुक्त करने की मांग की गई है। इसके बाद भी प्रत्येक अधिकारी को दिन में 50-100 सुनवाई करनी होंगी, जो चुनौतीपूर्ण कार्य है।
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