पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई। सड़क जाम करने से रोकने पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
संसद से पारित हुए वक्फ संशोधन कानून का लगातार विरोध हो रहा है। बताया जा रहा है कि मुस्लिम संगठन ने जंगीपुर पीडब्ल्यूडी मैदान से वक्फ बिल वापस लेने की मांग को लेकर विरोध मार्च निकाला था। राष्ट्रीय राजमार्ग-12 को जाम करने के इरादे से जैसे ही ये मार्च जंगीपुर से उमरपुर की ओर बढ़ा, पुलिस ने उन्हें रोका। इसी के बाद पुलिस के साथ उनकी झड़प हो गई।
भीड़ ने पुलिस की कई गाडिय़ों में आग लगा दी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेडऩे के लिए आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। यह भी जानकारी मिली है कि बनियापुर और उमरपुर इलाकों में कई घरों में भी तोडफोड़ की गई। इसके बाद जंगीपुर के पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक बड़ी पुलिस टीम स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पहुंची।
इसे लेकर भाजपा ने टीएमसी पर हमला बोला है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा कि पश्चिम बंगाल फिर से आग की लपटों में है। सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी है। इस बार मुर्शिदाबाद में मुस्लिम भीड़ वक्फ अधिनियम के विरोध में सड़कों पर उतर आई है। ममता बनर्जी ने बंगाल के विशाल क्षेत्रों पर नियंत्रण खो दिया है, जो अप्राकृतिक जनसांख्यिकीय बदलाव और अवैध घुसपैठ के कारण राज्य प्रशासन के लिए दुर्गम हो गए हैं। अब वह केवल उनके वोटों की प्रत्याशा में गिड़गिड़ाने के अलावा कुछ नहीं कर सकती। उन्हें 2026 में जाना ही होगा।
तृणमूल कांग्रेस चाहती है हिंसा होः दिलीप घोष
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद दिलीप घोष ने जंगीपुर में हुई हिंसा पर सीधे-सीधे तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, तृणमूल कांग्रेस चाहती है कि हिंसा हो। रामनवमी में तृणमूल कांग्रेस राज्य में कई अराजकता नहीं फैला पाई, अस इस तरह से हिंसा फैलाना चाहती है। जब बक्फ संशोधन अधिनियम संसद से कानून बन गया है तो फिर इस पर हिंसा का क्या मतलब। हिंसा फैसाने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधेयक को मंजूरी दी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ (संशोधन) विधेयक को पांच अप्रैल को मंजूरी दी थी। इसे बजट सत्र के दौरान संसद ने पारित किया था। कानून मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने दोनों विधेयकों को अपनी मंजूरी दे दी है। चार अप्रैल को राज्यसभा ने विधेयक के पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 मतों से इसे पारित किया था, जबकि लोकसभा ने लंबी बहस के बाद तीन अप्रैल को विधेयक को मंजूरी दे दी थी। यहां 288 सांसदों ने इसके पक्ष में और 232 ने इसके विरोध में मतदान किया था।
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