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अर्पिता मुखर्जी का दावा: पैसा मेरा नहीं, मेरी गैर-मौजूदगी में रखा गया

Tue, 02 Aug 2022 01:00 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

पश्चिम बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले में पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता के दो फ्लैट से 50 करोड़ से ज्यादा का कैश बरामद किया गया था। 
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अर्पिता मुखर्जी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तार अर्पिता मुखर्जी ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि मेरे घर से जब्त किया गया पैसा मेरा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह पैसा मेरी गौरमौजूदगी में वहां रखा गया था। दरअसल, कुछ दिन पहले अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों से करीब 50 करोड़ से ज्यादा रुपये बरामद हुए थे। इससे पहले पार्थ चटर्जी भी दावा कर चुके हैं कि पैसा उनका नहीं है। चटर्जी ने शुक्रवार को कहा था कि वह ‘‘साजिश का शिकार’’ हुए हैं।

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इससे पहले सोमवार को ईडी ने कहा था कि घोटाले के आरोप में गिरफ्तार पार्थ चटर्जी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। एक अधिकारी ने सोम बताया कि चटर्जी ने कथित स्कूल भर्ती घोटाले की जांच के संबंध में ईडी के ज्यादातर सवालों का जवाब नहीं दिया है। पूछताछ के दौरान ज्यादातर वक्त वे चुप ही रहे। वह गिरफ्तारी के बाद से ही हमारे साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं। वह अक्सर थकावट की शिकायत करते हैं और हमारे सवालों के जवाब देने से बच रहे हैं। हमने चटर्जी से उनके दावों के बारे में पूछा था कि छापे में बरामद नकदी उनकी है या नहीं? हम इस धन के स्रोत के बारे में पता लगा रहे हैं।

अर्पिता के आठ खाते हो चुके हैं फ्रीज
बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय को अर्पिता मुखर्जी के आठ बैंक खातों से आठ करोड़ रुपये के लेन-देन का पता चला है। ईडी इन आठ खातों को पहले ही फ्रीज कर चुका है। ईडी अधिकारी अब इन खातों के जरिये हुए लेन-देन का पता लगा रहे हैं। ईडी (ED) उन स्रोतों का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इतनी बड़ी राशि किन खातों से इनके पास आई और कहां-कहां भेजी गई। जरूरत पड़ी तो एजेंसी खातों का फोरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) भी करवा सकती है। माना जा रहा है कि फिलहाल ईडी के पास पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) और अर्पिता मुखर्जी (Arpita Mukherjee) से जानकारी निकलवाने के लिए तीन दिन ही बचे हैं, क्योंकि रिमांड की अवधि तीन ही शेष है।

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अर्पिता मुखर्जी के अलावा, पार्थ चटर्जी के दामाद कल्याणमय भट्टाचार्य और उनके मामा कृष्ण चंद्र अधिकारी भी जांच के दायरे में आई कंपनियों के निदेशक पाए गए हैं और आने वाले समय में इनकी जांच भी हो सकती है। 

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