पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर टाटा समूह को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कारण है कि पीएम मोदी के सिंगूर में 18 जनवरी को होने वाले रैली से पहले भाजपा ने एक बयान जारी किया है। पार्टी ने राज्य में सरकार बनने पर टाटा समूह को वापस लाने की बात कही है, जिसके बाद टीएमसी ने पलटवार किया है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सिंगूर एक बार फिर केंद्र में आ गया है। करीब दो दशक पहले यहां हुए आंदोलन ने राज्य की सत्ता बदल दी थी। अब 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले यहां फिर से सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जनवरी को सिंगूर के सिंघर भेरी मौजा में रैली करने वाले हैं। यह वही जगह है जहां कभी कार फैक्ट्री के लिए जमीन तय हुई थी।
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भाजपा का बड़ा दांवा
बंगाल भाजपा ने वादा किया है कि अगर वे सत्ता में आए, तो टाटा को सिंगूर वापस लाएंगे। केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने बुधवार को रैली स्थल का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि सिंगूर बंगाल के खोए हुए औद्योगिक अवसरों का प्रतीक है। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता सुकांत मजूमदार ने बुधवार को उन्होंने टीएमसी पर लगातार राजनीतिक आंदोलन के जरिए निवेशकों को भगाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "जिस दिन टाटा को जाने के लिए मजबूर किया गया, उसी दिन बंगाल से उद्योग चला गया। अब प्रधानमंत्री मोदी आ रहे हैं और भविष्य में टाटा भी वापस आएंगे। लेकिन इसके लिए बंगाल में सरकार बदलनी होगी।" उन्होंने टाटा प्रोजेक्ट के जाने को सिंगूर पर एक 'कलंक' बताया और इसे मिटाने का वादा किया।
क्या है सिंगूर का इतिहास?
साल 2006 में वाम मोर्चा सरकार ने टाटा की नैनो फैक्ट्री के लिए यहां करीब 1,000 एकड़ जमीन ली थी। ममता बनर्जी ने इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन चलाया। विरोध इतना बढ़ा कि 2008 में टाटा ने प्रोजेक्ट गुजरात शिफ्ट कर दिया। इसी आंदोलन की बदौलत 2011 में ममता बनर्जी ने 34 साल पुरानी वाम सरकार को उखाड़ फेंका था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी किसानों को जमीन वापस करने का आदेश दिया था।
टीएमसी का जवाब
तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज कर दिया है। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि भाजपा नेता उन गांवों में नहीं गए जहां लोगों ने असल लड़ाई लड़ी थी। राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी भूमि अधिग्रहण को गलत माना था। उन्होंने सवाल किया, "जब किसानों को पीटा जा रहा था और जबरन जमीन छीनी जा रही थी, तब ये भाजपा नेता कहां थे?"
जनता की राय
स्थानीय लोगों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है। कुछ लोग पीएम मोदी की यात्रा से नौकरी और उद्योग की उम्मीद लगा रहे हैं। वहीं, कुछ लोग पुराने अनुभवों के कारण नेताओं के वादों पर शक कर रहे हैं। चुनाव नजदीक आते ही सिंगूर एक बार फिर वादों और यादों के बीच खड़ा है।