करीब चार महीने पहले पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर हुई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की आंतरिक लड़ाई लगातार चर्चा में है। पहले ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में तृणमूल के विधायक दल का नेता माना गया। अब ताजा घटनाक्रम में विधायक मोहम्मद कासिम सिद्दीकी ने ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट को छोड़ने की बात कही है। उन्होंने कहा कि गुट ऋतब्रत बनर्जी का था ही नहीं। हमें बताया गया था कि हम सभी दीदी (ममता बनर्जी) के साथ हैं। इसलिए हमें यह एहसास नहीं हुआ कि ऋतब्रत अलग खेमा बना रहे हैं।
जब तक सक्रिय, दीदी के साथ रहूंगा
बकौल मोहम्मद कासिम सिद्दीकी, 'चूंकि हम सभी दीदी के साथ थे, इसलिए हमने कही गई हर बात सुनने पर सहमति जताई। बाद में हमें पता चला कि इसका दीदी से कोई लेना-देना नहीं था। हमें केवल एक बार बैठक के लिए बुलाया गया था। मैंने उनके चित्र का उपयोग करके वोटों के लिए प्रचार किया था। लोगों ने उनका चित्र देखकर मुझे वोट दिया था। मैं दीदी के साथ हूं और जब तक सक्रिय रहूंगा, दीदी के साथ ही रहूंगा।'
टीएमसी में राजनीतिक खींचतान
उत्तर 24 परगना के आमडांगा से टीएमसी विधायक सिद्दीकी ने कहा कि वह हमेशा ममता बनर्जी के साथ रहे हैं और उनके नेतृत्व में ही रहेंगे। सिद्दीकी ने बागी गुट छोड़ने के अपने फैसले पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें यह समझाया गया था कि वह गुट बनर्जी के नेतृत्व में काम करेगा। हालांकि, बाद में उन्हें एहसास हुआ कि उसके कामकाज में टीएमसी प्रमुख का कोई जिक्र नहीं था। सिद्दीकी ने कहा, 'हमें दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने को कहा गया था, और बताया गया कि हस्ताक्षर दीदी तक पहुंचेंगे।'
सिद्दीकी का प्रभाव कैसा, वापसी कितनी अहम?
उन्होंने जोर देकर कहा, हम आज भी दीदी के साथ हैं और उनके साथ ही रहेंगे। उन्होंने हमें टिकट दिया और विधानसभा भेजा। 'पीरजादा' के नाम से मशहूर सिद्दीकी हुगली जिले की प्रभावशाली फुरफुरा शरीफ दरगाह से हैं। मुस्लिम समुदाय में उनका काफी प्रभाव है। वह पिछले साल टीएमसी में शामिल होकर महासचिव बने और आमडांगा से विधानसभा चुनाव जीते। उनकी वापसी पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेतृत्व को लेकर टीएमसी की राजनीतिक खींचतान के बीच हुई है। बागी गुट अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देते हुए फ्लोर टेस्ट की मांग कर रहा है।
टीएमसी का रुख और फ्लोर टेस्ट की चुनौती
टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का फैसला अस्थायी है। उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार 'मूल पार्टी' को अध्यक्ष को अपने अधिकृत प्रतिनिधि के बारे में सूचित करना आवश्यक है। घोष ने कहा कि टीएमसी फ्लोर टेस्ट की चुनौती स्वीकार करने को तैयार है। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि यह गुप्त मतदान के माध्यम से आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने बागी गुट पर राज्य सरकार के कथित समर्थन से टीएमसी को तोड़ने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया।