पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और राज्य में सियासी उथल-पुथल शुरू हो गई है। हाल के समय में राज्य का सबसे बड़ा घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता सुवेंदु अधिकारी का इस्तीफा रहा है। अधिकारी ने बीते बुधवार को विधायक पद से इस्तीफा दिया था।
अधिकारी इस्तीफे के बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, शुक्रवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी ने प्रक्रियागत खामियों का हवाला देते हुए सुवेंदु अधिकारी का इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
स्पीकर की ओर से सुवेंदु अधिकारी का इस्तीफा अस्वीकार करने के बाद अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह मामला अब अदालत में जा सकता है। लेकिन, पूर्व के समय में अन्य राज्यों में पैदा हुए ऐसे हालातों को देखें तो अदालत में जाने के बाद भी विधायकों का इस्तीफा कायम ही रहा है।
मध्यप्रदेश में ऐसी बनी थी स्थिति
मध्यप्रदेश में इस साल मार्च में ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कांग्रेस के 16 विधायकों ने त्यागपत्र दे दिया था जिससे अल्पमत में आई कमलनाथ सरकार गिर गई थी। विधायकों के इस्तीफे का यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, लेकिन आखिर में सभी इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए थे।
कर्नाटक का था कुछ ऐसा हाल
वहीं, कर्नाटक में पिछले साल तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस जदएस गठबंधन के 13 विधायकों ने इस्तीफा सौंप दिया था। यह मामला भी अदालत तक पहुंचा था, लेकिन अंतत: विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए थे और राज्य में एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी।
बंगाल में ऐसे हैं राजनीतिक हालात
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा आक्रामक रूप से तैयारियां कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा लगातार राज्य का दौरा कर रहे हैं। इसके साथ ही पार्टी सत्ताधारी तृणमूल के किले में भी सेंध लगाने में पूरे जोर से जुटी है।
उधर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस चुनाव को बाहरी बनाम अंदरूनी बनाने की कोशिश में हैं। वह भाजपा को बाहरी और राज्य के लिए खतरा बता रही हैं। लेकिन, उन्हीं की पार्टी के नाराज नेताओं के इस्तीफे और पार्टी विरोधी बयान उनके लिए जरूर मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।