अभिषेक बनर्जी ने बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने की मांग दोहराई है। यह मामला हस्ताक्षर विवाद और दो विधायकों के निष्कासन के बीच आया है। सीआईडी इस मामले की जांच कर रही है, जबकि भाजपा ने पत्र की वैधता पर सवाल उठाए हैं।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथिंद्र बोस को एक नया पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता (LoP) नियुक्त करने के पार्टी के फैसले को फिर से दोहराया है। यह मामला ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर हस्ताक्षर जालसाजी के आरोपों को लेकर विवाद चल रहा है।
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स्पीकर के सचिव ने पत्र लेने से किया इनकार
अभिषेक बनर्जी का यह पत्र लेकर टीएमसी विधायक कुणाल घोष और आशिमा पात्रा स्पीकर के दफ्तर पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि स्पीकर की अनुपस्थिति में उनके सचिव ने पत्र लेने से इनकार कर दिया। सचिव ने कहा कि उन्हें टीएमसी से कोई भी पत्र न लेने के मौखिक आदेश मिले हैं। कुणाल घोष ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि निर्वाचित विधायकों से पत्र न लेना लोकतंत्र का मजाक है। बाद में पार्टी ने यह पत्र ईमेल के जरिए स्पीकर को भेजा।
अभिषेक बनर्जी ने पत्र में आशिमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को उप-विपक्ष का नेता और फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनाने की सिफारिश की है। उन्होंने पत्र में 2001 से लेकर 2021 तक के कई उदाहरण दिए। उन्होंने बताया कि पहले भी स्पीकर ने पार्टियों की सिफारिश पर ही विपक्ष के नेता चुने हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 15 मई को सदन में स्पीकर ने खुद शोभनदेव को विपक्ष के नेता के रूप में स्वागत भाषण देने के लिए बुलाया था।
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भाजपा ने क्या कहा?
दूसरी ओर, भाजपा मंत्री तापस रॉय ने इस पत्र की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस पत्र पर अन्य विधायकों के समर्थन वाले हस्ताक्षर नहीं हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब टीएमसी के दो विधायकों, रितब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने आरोप लगाया कि 6 मई की बैठक का प्रस्ताव फर्जी है। उन्होंने दावा किया कि कई हस्ताक्षर जाली हैं। इसके बाद दोनों विधायकों को पार्टी ने बाहर निकाल दिया है।
मामले की हो रही जांच
सीआईडी इस मामले की जांच कर रही है। अब तक 13 विधायकों से पूछताछ हुई है। इनमें से तीन विधायकों- बहारुल इस्लाम, अरूप रॉय और सुभासिस दास ने साफ कहा है कि रजिस्टर में उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। राज्य में ऐसी चर्चाएं भी हैं कि कुछ विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं, हालांकि रितब्रत बनर्जी ने ऐसी किसी भी बैठक से इनकार किया है। शोभनदेव चट्टोपाध्याय का कहना है कि ज्यादातर विधायक ममता बनर्जी के साथ ही रहेंगे।