पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एसआईआर से नाम हटाने को लेकर प्रदर्शनकारियों ने सात न्यायिक अधिकारियों को नौ से ज्यादा घंटों तक बंधक बनाए रखा था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। सुप्रीम फटकार के बाद एक्शन में आई बंगाल पुलिस ने मामले के मुख्य साजिशकर्ता को गिरफ्तार कर लिया है।
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य साजिशकर्ता मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया है। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की टीम शुक्रवार को मालदा जिले का दौरा करेगी। एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी।
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इस बीच मालदा घटना पर उत्तर बंगाल के एडीजी के. जयरामन का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, "हमने अब तक 35 लोगों को गिरफ्तार किया है और 19 मामले दर्ज किए हैं। मुख्य साजिशकर्ता मोफक्करुल इस्लाम को बागडोगरा में हिरासत में लिया गया है। उसे यहां लाया जा रहा है। एनआईए इस मामले की जांच अपने हाथ में लेगी। उसे कालियाचक मामले में गिरफ्तार किया गया है। वह खुद को वकील बताता है।"
एआईएमआईएम नेता है मुख्य साजिशकर्ता
वकील मोफक्करुल इस्लाम ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) का नेता बताया जा रहा है। मालदा में हुए विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करने के आरोप में उसे गिरफ्तार किया गया है। मालदा में भीड़ ने सात एसआईआर अधिकारियों का घेराव कर नौ घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा था।
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बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी : भाजपा
भाजपा ने मालदा की घटना को चौंकाने वाला बताया और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का आरोप लगाया। भाजपा नेता सुकांता मजूमदार ने सवाल किया कि क्या ममता बनर्जी की पार्टी द्वारा की गई उकसावे वाली कार्रवाई के कारण यह स्थिति पैदा हुई? उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले की जांच करने का आग्रह किया, जिसमें यह भी शामिल है कि मतदाता सूची से हटाए गए लोग भारतीय नागरिक थे या नहीं।
न्यायिक अधिकारियों को क्यों बनाया गया बंधक?
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहा मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया एक बड़ा मुद्दा बन गई है। एसआईआर प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची में 63 लाख से अधिक नाम हटाए गए, जबकि 60 लाख अन्य मतदाताओं को विचाराधीन रखा गया।
न्यायिक अधिकारियों को इन मामलों की समीक्षा करने का कार्य सौंपा गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ये न्यायिक अधिकारी इन मामलों की जांच कर मतदाताओं को मतदाता सूची में बरकरार रखने या हटाने का फैसला कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को अधिकारियों के साथ बैठक का अनुरोध किया, जिसे अस्वीकार करने पर उन्होंने बीडीओ कार्यालय का घेराव कर तीन महिलाओं समेत सात अधिकारियों को बंधक बना लिया।