पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद और प्रसिद्ध डॉक्टर शांतनु सेन को दो साल के लिए निलंबित कर दिया। उन पर अपने चिकित्सकीय अभ्यास के दौरान विदेशी मेडिकल डिग्री का प्रमाणित दावा किए बिना उल्लेख करने का आरोप है।
बता दें कि सेन को पिछले साल मेडिकल काउंसिल से नामित सदस्य के रूप में हटा दिया गया था। जब उन्होंने आरजी कर अस्पताल में हुए दुष्कर्म-हत्या मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए थे। काउंसिल के अध्यक्ष सुदीप्तो रॉय ने कहा, शांतनु सेन को निलंबित किया गया है क्योंकि वह अपनी विदेशी डिग्री के उल्लेख को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। उन्होंने केवल एक प्रमाणपत्र दिखाया लेकिन यह साबित करने के लिए कोई और दस्तावेज नहीं पेश कर सके कि क्या ऐसी डिग्रियों का इस तरह से अभ्यास के दौरान उल्लेख किया जा सकता है।
रॉय के अनुसार, सेन को 3 जुलाई को काउंसिल के सदस्यों के सामने पेश होने को कहा गया था, जिसके बाद निलंबन का आदेश जारी किया गया। जब इस बारे में शांतनु सेन से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें काउंसिल से अब तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। लेकिन उन्होंने पहले ही मीडिया को इसकी जानकारी दे दी है।
शांतनु सेन ने आरोप लगाया, राज्य मेडिकल काउंसिल का रवैया प्रतिशोधात्मक है। वे मेरे प्रैक्टिस करने के अधिकार और मेरी वैध मेडिकल डिग्री का उल्लेख करने के अधिकार को नहीं छीन सकते। कई अन्य डॉक्टर भी, जिन्होंने विदेशी संस्थानों से वैध डिग्री प्राप्त की है। सेन ने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी विदेशी डिग्री के पंजीकरण के लिए मेडिकल काउंसिल को 10,000 रुपये शुल्क के रूप में जमा किया है और एक लिखित आवेदन भी दिया है।
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उन्होंने कहा, जैसे ही मुझे निलंबन पत्र मिलेगा, मैं अपने व्यक्तिगत अधिकार, सम्मान और प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए आवश्यक कानूनी कदम ज़रूर उठाऊंगा। गौरतलब है कि शांतनु सेन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य हैं। इससे पहले उन्हें टीएमसी से निलंबित कर दिया गया था और पार्टी ने आरजी कर कांड के मामले में प्रशासन की आलोचना करने और जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन को समर्थन देने पर उन्हें फटकार भी लगाई थी।