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आरजी कर केस में संजय रॉय दोषी: दुष्कर्म की घटना के बाद कैसे पकड़ा गया, CBI ने कैसे साबित किया जुर्म, जानें

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 18 Jan 2025 03:03 PM IST

सार

यह जानना अहम है कि आखिर कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में उस दिन क्या घटना हुई थी? इस घटना का खुलासा कैसे हुआ और आरोपी की किस गलती से उसे पकड़ लिया गया? पुलिस और सीबीआई ने इस मामले में क्या-क्या किया? आइये जानते हैं...
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संजय रॉय दोषी करार। - फोटो : अमर उजाला
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक जूनियर महिला डॉक्टर की पिछले साल अगस्त में हत्या हो गई थी। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे देश में गुस्से का माहौल था। मामले की जांच में पश्चिम बंगाल पुलिस के बाद सीबीआई को भी लगा दिया गया था। घटना के बाद डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर देशभर में मेडिकल छात्रों ने प्रदर्शन किए थे। यह प्रदर्शन लंबे समय तक जारी भी रहे और मामले में दोषियों को सख्त सजा दिलाने की मांग की गई। इस घटना के करीब 162 दिन बाद सियालदाह की अदालत ने मामले में आरोपी संजय रॉय को दोषी करार दिया है। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में उस दिन क्या घटना हुई थी? इस घटना का खुलासा कैसे हुआ और आरोपी की किस गलती से उसे पकड़ लिया गया? पुलिस और सीबीआई ने इस मामले में क्या-क्या किया? आइये जानते हैं...

 
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संजय रॉय दोषी करार। - फोटो : अमर उजाला
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक जूनियर महिला डॉक्टर की पिछले साल अगस्त में हत्या हो गई थी। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे देश में गुस्से का माहौल था। मामले की जांच में पश्चिम बंगाल पुलिस के बाद सीबीआई को भी लगा दिया गया था। घटना के बाद डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर देशभर में मेडिकल छात्रों ने प्रदर्शन किए थे। यह प्रदर्शन लंबे समय तक जारी भी रहे और मामले में दोषियों को सख्त सजा दिलाने की मांग की गई। इस घटना के करीब 162 दिन बाद सियालदाह की अदालत ने मामले में आरोपी संजय रॉय को दोषी करार दिया है। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में उस दिन क्या घटना हुई थी? इस घटना का खुलासा कैसे हुआ और आरोपी की किस गलती से उसे पकड़ लिया गया? पुलिस और सीबीआई ने इस मामले में क्या-क्या किया? आइये जानते हैं...
 

1. कोलकाता के अस्पताल की घटना क्या थी?
आरजी कर मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के साथ दरिंदगी की घटना पिछले साल 8-9 अगस्त की दरमियानी रात को हुई थी। 31 वर्षीय मृतक मेडिकल कॉलेज में चेस्ट मेडिसिन विभाग की स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष की छात्रा और प्रशिक्षु डॉक्टर थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जूनियर डॉक्टर गुरुवार को अस्पताल में रात की ड्यूटी कर रही थी। रात 12 बजे के बाद उन्होंने दोस्तों के साथ डिनर भी किया। इसके बाद से महिला डॉक्टर का कोई पता नहीं चला। 

अगले दिन सुबह उस वक्त मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया जब चौथी मंजिल के सेमिनार हॉल से अर्ध नग्न अवस्था में डॉक्टर का शव बरामद हुआ। घटनास्थल से मृतक का मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद किया गया। 

पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट से पता चला कि महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। जूनियर महिला डॉक्टर का शव गद्दे पर पड़ा हुआ था और गद्दे पर खून के धब्बे मिले। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि मृतक महिला डॉक्टर के मुंह और दोनों आंखों पर था। गुप्तांगों पर खून के निशान और चेहरे पर नाखून के निशान पाए गए। होठ, गर्दन, पेट, बाएं टखने और दाहिने हाथ की उंगली पर चोट के निशान थे। 

घटना सामने आने के बाद क्या हुआ?
महिला डॉक्टर की हत्या की जानकारी होने के बाद 9 अगस्त की सुबह अस्पताल प्रबंधन ने पीड़िता के परिजन को फोन किया। जब पीड़िता का परिवार घटनास्थल पर पहुंचा तो हैरान था। मृतक डॉक्टर की मां ने कहा, 'मेरी बेटी की हत्या कर दी गई। मेरी बेटी अर्धनग्न पड़ी थी। शीशे टूटे हुए थे। उसके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। अंदर कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था सब कुछ अस्त-व्यस्त था।'

वहीं महिला डॉक्टर के पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म किया गया और उसकी हत्या कर की गई। पीड़िता के पिता ने इसी दिन स्थानीय तला पुलिस स्टेशन में दुष्कर्म और हत्या की शिकायत की जिस पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया।

घटना के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
मामले की जानकारी होने के बाद ही लालबाजार के बड़े अधिकारी अस्पताल पहुंच गए। होमिसाइड शाखा के अलावा, महिला शिकायत प्रकोष्ठ के सदस्य भी थे। घटना की जांच के लिए कोलकाता पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) भी गठित कर दी गई।

चूंकि जिस सेमिनार कक्ष में यह घटना हुई थी, वहां कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं था, इसलिए पुलिस ने आसपास से जानकारी जुटाना शुरू कर दिया। पुलिस ने यह जानने की कोशिश शुरू कर दी कि जब डॉक्टर इस कमरे में आई थीं तो उस वक्त वहां कौन था। इस कड़ी में कई लोगों से पूछताछ की गई। एसआईटी ने 9 अगस्त की रात को अस्पताल में तैनात एक सिविक वालंटियर (जो प्रशासन की सहायता करता है) को पूछताछ के लिए उठा लिया। 

10 अगस्त की सुबह महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के आरोप में संजय रॉय नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार भी कर लिया गया। तब एक अज्ञात पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया कि गिरफ्तार व्यक्ति की गतिविधियां काफी संदिग्ध हैं और ऐसा लगता है कि वह सीधे तौर पर अपराध में शामिल है।

ब्लूटूथ हेडफोन के टूटे तार से पकड़ा गया आरोपी 
इससे पहले जांच के दौरान पुलिस ने अस्पताल में सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए गए थे। उस वक्त रात करीब 2.30 बजे आरोपी को कॉरिडोर में टहलते हुए देखा गया था। संजय के शुरुआती बयान में विरोधाभास पाया गया था। पूछताछ के दौरान, आरोपी ने पहले कहा कि वह उन मरीजों के बारे में पूछताछ करने गया था जिन्हें उसने भर्ती कराया था। लेकिन जब पुलिस ने मरीजों से पूछताछ की तो पता चला कि संजय पिछले तीन दिनों से उनके पास नहीं आया। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की।

रिपोर्ट्स के अनुसार, संजय रॉय को रात ढाई बजे से तीन बजे के बीच दूसरी और तीसरी मंजिल के कॉरिडोर के सीसीटीवी में देखा गया था। चेस्ट सेक्शन के पास लगे सीसीटीवी में भी वह दिख रहा है। वहां किसी और के घूमने की कोई तस्वीर नहीं थी। सीसीटीवी तस्वीरें नर्सों और अन्य अस्पताल कर्मचारियों को दिखाई गईं। नर्सों और अन्य स्टाफ ने बताया कि यह व्यक्ति मरीजों को भर्ती करने के लिए अस्पताल आता है। 

पुलिस के हाथ टूटे हुए ब्लूटूथ हेडफोन का तार लगा। पुलिस ने सीसीटीवी में देखा कि जब संजय आरजी कर अस्पताल में दाखिल हुआ तो ब्लूटूथ हेडफोन उसके गले में था। लेकिन जब वह अस्पताल से बाहर निकला तो हेडफोन उसकी गर्दन पर नहीं था। ब्लूटूथ हेडफोन का एक टूटा हुआ तार चौथी मंजिल के सेमिनार कक्ष में गिर गया। जांच करने पर पता चला कि यह सिविक वालंटियर संजय रॉय का था।  

मामले में सीबीआई की एंट्री
जूनियर डॉक्टर की हत्या के विरोध में आरजी कर मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। इसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट में पीड़िता के माता-पिता की तरफ से दायर याचिका और कुछ अन्य जनहित याचिकाओं में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने केस को सीबीआई को सौंप दिया। 14 अगस्त को कोलकाता पुलिस ने आधिकारिक तौर पर संजय रॉय को सीबीआई की कस्टडी में भेज दिया। 

सीबीआई ने संजय रॉय के खिलाफ मामले में 45 पन्नों की चार्जशीट दायर की। केंद्रीय एजेंसी ने रॉय को मामले में इकलौता दोषी करार देने के लिए 11 सबूत मुहैया कराए।

कोर्ट में शुरू हुई कैमरे के सामने सुनवाई
12 नवंबर को जूनियर डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या के मामले की सुनवाई सियालदाह की अदालत में शुरू हुई। चार्जशीट दाखिल होने में देरी की वजह से सियालदाह कोर्ट ने मामले में आरोपी बनाए गए अभिजीत मोंडल और संदीप घोष को जमानत दे दी थी। 

एक महीने बाद यानी 13 दिसंबर को भी अभिजीत मोंडल और संजय रॉय के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं हुई, जिसके चलते उनकी जमानत बढ़ा दी गई। 

आखिरकार इस साल 9 जनवरी को आरोपी संजय रॉय को लेकर सुनवाई पूरी हुई। इसमें 50 गवाहों के बयान सुने गए। अब 18 जनवरी को कोर्ट ने मामले में संजय रॉय को दोषी ठहराया है।
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