पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस।
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस बंगाल पंचायत चुनाव में हुई हिंसा को लेकर काफी मुखर हो गए हैं। वे पंचायत चुनाव के दौरान लगातार ग्राउंड जीरो पर रहे हैं और उन्होंने हिंसा को बहुत नजदीक से देखा भी है। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने मंगलवार को राज्य में राजनीतिक हिंसा पर तंज कसते हुए कहा कि बंगाल के दो दुश्मन हैं, हिंसा और भ्रष्टाचार। राज्यपाल ने चुनाव में हिस्सा लेने वाली सभी उम्मीदवारों को बधाई भी दी।
राज्यपाल का यह बयान राज्य में हाल ही में संपन्न पंचायत चुनावों के दौरान हुई हिंसा के मद्देनजर आया है, जिसकी गिनती आज जारी है। राज्यपाल आनंद बोस ने कहा कि राजनीतिक दलों को यह समझना चाहिए कि चुनाव किसी की शारीरिक ताकत मापने का आधार नहीं है। पंचायत चुनाव परिणामों पर उन्होंने कहा कि मैं भाग लेने वाले सभी लोगों को बधाई देता हूं। लोकतांत्रिक चुनाव में, कोई विजेता या हारने वाला नहीं होता है। अब आत्मनिरीक्षण का समय है। लोकतांत्रिक चुनाव मैत्रीपूर्ण ढंग से होने चाहिए न कि घृणा या हिंसा फैलाकर होने चाहिए।
बीएसएफ दो दी गई थी संवेदनशील बूथों की जानकारी...
वहीं, राज्य चुनाव आयुक्त (एसईसी) राजीव सिन्हा ने बीएसएफ के उन आरोपों को खारिज कर दिया कि राज्य चुनाव पैनल ने संवेदनशील बूथों की जानकारी मांगने वाले उसके पत्र का जवाब नहीं दिया। सिन्हा ने मंगलवार को कहा कि बीएसएफ के साथ कई बैठकों के दौरान हर जिले में संवेदनशील बूथों की जानकारी साझा की गई थी। एसईसी ने दावा किया कि बीएसएफ 10,000 से ज्यादा बूथों पर केंद्रीय बल उपलब्ध नहीं करा सका।
राजीव सिन्हा ने कहा, यह (बीएसएफ का दावा) एक कहानी है। मैंने पहले भी कहा था कि उन्होंने संवेदनशील बूथों की सूची मांगी थी। हमने उनके साथ कई बैठकें की थीं और सब कुछ रिकॉर्ड में है। हमने उन्हें संवेदनशील बूथों की जिलेवार सूची दी थी। सिन्हा ने कहा, उनके (बीएसएफ) पास संवेदनशील बूथों पर तैनाती की कोई योजना नहीं थी। उन्होंने केवल यह कहा था कि संवेदनशील बूथों के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों को दिया जाएगा। हमने उनसे कहा था कि केंद्रीय बलों की तैनाती डीएम और एसपी से बात करने के बाद की जानी चाहिए। एसईसी ने सवाल किया कि अगर बीएसएफ को संवेदनशील बूथों के बारे में जानकारी नहीं दी गई तो उन्होंने वहां केंद्रीय बलों को कैसे नियुक्त कर दिया?
आठ जुलाई को बंगाल पंचायत चुनाव के लिए वोटिंग के दिन हिंसा के बाद बीएसएफ के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) एसएस गुलेरिया ने कहा था कि बल ने संवेदनशील बूथों की जानकारी मांगने के लिए पांच जुलाई से एसईसी को कई पत्र लिखे थे, लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला।