अब्बास सिद्दीकी फुरफुरा शरीफ दरगाह के पीरजादा हैं और बंगाल की राजनीति में खासा प्रभाव रखते हैं। इस बार उन्होंने बंगाल में चुनाव लड़ने का फैसला किया है। बंगाल में करीब 30 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी है। फुरफुरा दरगाह का असर सौ सीटों पर माना जाता है। हालांकि अपने बयानों के चलते अब्बास सिद्दीकी सुर्खियों में रहते हैं।
कट्टरता और महिला विरोध बयानों के कारण वो कई बार विवाद में फंसे, इसलिए कांग्रेस के आईएसएफ के साथ गठबंधन को लेकर कई तरह के सवाल किए जा रहे हैं। पिछले दिनों लेखिका तस्लीमा नसरीन ने अब्बास सिद्दीकी को लेकर लिखा था कि वो शरिया कानून को मानते हैं और फ्री स्पीच का समर्थन नहीं करते हैं।
दरअसल, आईएफएस कांग्रेस के हिस्से से भी सीटों की मांग कर रहा है, जबकि सीपीएम आईएफएस को 30 सीटें देने के तैयार हो गया है। कांग्रेस ने 2016 के चुनावों का हवाला दिया है और पार्टी एक भी सीट छोड़ने को तैयार नहीं है। कांग्रेस ने 92 सीटों पर चुनाव लड़कर 44 सीटें अपने नाम की थीं।
आईएफएस का कहना है कि 2016 के बाद 2019 में कांग्रेस ने जो प्रदर्शन दिखाया, वो सब जानते हैं। कांग्रेस का कहना है कि उनका गठबंधन लेफ्ट के साथ है और लेफ्ट का आईएफएस के साथ..इसलिए लेफ्ट की जिम्मेदारी बनती है कि वो आईएफएस को सीट दे।