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West Bengal: बंगाल में मतदान का 2011 का रिकॉर्ड पीछे छूटा, तब ममता ने उखाड़ फेंकी थी वाम सरकार

सार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग खत्म हो चुकी है। इस बार के मतदान ने 2011 के वोटिंग रिकॉर्ड को काफी पीछे छोड़ दिया है। ऐतिहासिक वोटिंग को लेकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव - फोटो : ANI
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में पहले चरण के विधानसभा चुनाव के दौरान 92 फीसदी से अधिक मतदान ने 2011 के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। तब परिवर्तन की लहर थी और ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने वाम सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंका था।
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इस बार असल सवाल यही है कि क्या रिकॉर्ड वोटिंग सत्ता के समर्थन का संकेत है या बदलाव की इच्छा का? क्या यह केवल उत्साह है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है। इन सवालों के जवाब जानने के लिए जरूरी है कि 2011, 2016, 2021 और अब 2026 के मतदान ट्रेंड को एक साथ देखा जाए, क्योंकि बंगाल में मतदान प्रतिशत अक्सर चुनावी नतीजों की दिशा का संकेत भी देता रहा है। हालांकि, अभी यह पहले चरण का मतदान है जबकि दूसरे चरण का मतदान अभी होना है।
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डेढ़ दशक में ऐसा रहा ट्रेंड
2011 : 84% (परिवर्तन की लहर, 34 साल बाद सत्ता बदली)
2016 : 82% (स्थिरता, तृणमूल की वापसी)
2021 : 81% (भारी ध्रुवीकरण, तृणमूल बनाम भाजपा सीधी लड़ाई)
2026 : पहले चरण में 92% से ऊपर मतदान सिर्फ अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा ही नहीं है, बल्कि असामान्य रूप से भी ज्यादा है।

यह आंकड़ा क्यों है खास?
रिकॉर्ड स्तर की भागीदारी : लगभग हर पात्र मतदाता वोट देने निकला।
संवेदनशील इलाकों में भी वोटिंग : जंगलमहल, उत्तर बंगाल और सीमावर्ती क्षेत्रों में भी भारी मतदान।
महिलाओं के साथ पहली बार वोट देने वाले युवाओं की भागीदारी बढ़ी।

राजनीतिक निहितार्थ
कड़ा मुकाबला : चुनाव एकतरफा नहीं, सीधी टक्कर
समर्थन बनाम विरोध : तृणमूल ने बताया समर्थन का संकेत, भाजपा बोली-बदलाव की लहर
भय या भागीदारी : ज्यादा मतदान डर घटने का नतीजा या संगठित लामबंदी है।

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