पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष के बयान पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पलटवार किया है। ममता बनर्जी ने कहा कि यह शर्मनाक है। आप यह कैसे कह सकते हैं? उसका नाम लेना भी शर्म की बात है। आप फायरिंग को बढ़ावा दे रहे हैं। यह यूपी नहीं है। यहां फायरिंग नहीं होगी। समझ लें कि अगर कल कुछ अनहोनी होती है, तो आप भी उतने ही जिम्मेदार होंगे। आप विरोध के लिए लोगों को मारना चाहते हैं?
इससे पहले पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने रविवार को धमकी देते हुए कहा था कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों को उत्तर प्रदेश की तरह गोली मार दी जाएगी। बंगाल के नादिया जिले में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते हुए घोष ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला करते हुए कहा था कि ममता ने पिछले साल दिसंबर में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के दौरान रेलवे की संपत्ति और सार्वजनिक परिवहन को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ लाठीचार्ज या गोली चलाने का आदेश नहीं दिया था।
घोष ने कहा कि क्या यह उनके पिताजी की संपत्ति है? वह कैसे सरकार की संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकते हैं जो करदाताओं के पैसों से बनी है? उत्तर प्रदेश, असम और कर्नाटक की सरकारों ने ऐसे राष्ट्र विरोधी तत्वों पर गोली चलाकर बिलकुल ठीक काम किया।
वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दावा किया कि नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ संसदीय स्थायी समिति में सबसे पहले उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने आवाज उठाई थी और संशोधित नागरिकता कानून पर उनके विरोध पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। ममता ने दावा किया कि संसदीय स्थाई समिति के रिकॉर्ड साफ कहते हैं कि तृणमूल कांग्रेस ने समिति की बैठक में कैब पर सबसे पहले विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने अपने खिलाफ बोल रहे विपक्षी दलों से इसकी पड़ताल करने को कहा।
वाम दलों और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए बनर्जी ने कहा कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ संघर्ष में मेरे और तृणमूल कांग्रेस के योगदान पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। दोनों दलों ने नाम लिये बिना ममता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गुप्त समझौता होने का आरोप लगाया था।