पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को कहा कि किसी धार्मिक समुदाय के द्वारा नहीं बल्कि दंगे लालची नेताओं की करतूत है जिनके दिमाग में गंदगी भरी होती है।
मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा, "जब जीवन की कोई गारंटी नहीं है, तो हम क्यों लड़ें? हम नफरत क्यों फैलाएं या एक दूसरे को क्यों मारें? हमें इसे समझना चाहिए। मैं किसी धर्म विशेष के बारे में नहीं, बल्कि सभी धर्मों के बारे में बात कर रही हूं। याद रखें कि यह आम लोग नहीं हैं जो दंगे करते हैं, लेकिन यह कुछ लालची नेताओं के द्वारा किया जाता है, जिनके दिमाग में काली गंदगी भरी होती है।"
बनर्जी शहर के प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर मंदिर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं जहां उन्होंने मंदिर के इतिहास पर एक किताब का विमोचन भी किया। दिल्ली से लौटने के बाद वह हवाई अड्डे से सीधे मंदिर पहुंचीं जहां जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्षी दलों की बैठक बुलाई गई थीं।
उन्होंने फिजियोलॉजी का हवाला देकर अपनी बात को पुष्ट करने की कोशिश की। बनर्जी ने कहा, हम नहीं जानते कि हमारे दिमाग के अंदर कितनी कोशिकाएं हैं और उनमें से कितनी हर रोज खराब हो जाती हैं जब लोग बुराई के बारे में सोचते हैं। जब भी लोग नकारात्मक सोचते हैं तो मस्तिष्क की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। अगर आप सकारात्म सोचते हैं तो मस्तिष्क भी आपको कुछ न कुछ देगा। यह आपको स्वस्थ और खुश रखेगा। उन्होंने युवाओं को 'रचनात्मक' सोशल नेटवर्किंग पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी निलंबित भाजपा नेताओं के द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर कथित विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर देशभर में हुई हिंसा की पृष्ठभूमि में आई है। उन्होंने 'अभद्र भाषा' को लेकर भाजपा पर निशाना साधा और इसके लिए पार्टी के दो निलंबित नेताओं नुपुर शर्मा और नवीन जिंदल की गिरफ्तारी की मांग की।
शहर के रेड रोड पर ईद-उल-फितर की नमाज के दौरान देखी गई तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने उन अफवाहों को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने नमाज अदा की। उन्होंने कहा, "मैं इफ्तार पार्टियों में शामिल होने जाती हूं, जहां सभी उपवास के अंत में इकट्ठा होते हैं। समस्या क्या है? जब मैं दुर्गा पूजा में शामिल होती हूं तो कोई भी कुछ नहीं कहता है। हमारे देश में हमारे पास विभिन्न धर्मों के लोग हैं। अगर मैं एक जैन मंदिर जाती हूं तो क्या समस्या है?"
उच्चतर माध्यमिक के असफल छात्रों के एक वर्ग द्वारा राज्य के विभिन्न हिस्सों में विरोध का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "मैंने अपने जीवन में ऐसा कभी नहीं सुना। वे मांग कर रहे हैं कि असफल होने पर भी उन्हें सफल घोषित किया जाए। यह गलती उनकी नहीं है बल्कि उनकी है जो उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं।"
पैगंबर मोहम्मद पर नुपुर शर्मा की टिप्पणी के विरोध में बंगाल के हावड़ा, मुर्शिदाबाद और नदिया जिलों के कुछ हिस्सों में हिंसक घटनाओं की बाढ़ आ गई थी जिसके चलते प्रशासन ने सीआरपीसी की धारा 144 लागू की और इंटरनेट कनेक्शन बंद कर दिया था।