सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारी पश्चिम मेदिनीपुर जिले के मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल पहुंचे। उन्होंने आरएमओ, दो जूनियर डॉक्टर और चार नर्सों से पूछताछ की, जो 9 जनवरी की रात को स्त्री रोग विभाग में ड्यूटी पर थे, जब यह घटना हुई।
पश्चिम बंगाल के एक सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद एक महिला की मौत और तीन अन्य के गंभीर रूप से बीमार होने के मामले में सीआईडी ने मंगलवार को जांच शुरू की। सीआईडी ने अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में वरिष्ठ डॉक्टर और जूनियर डॉक्टर से पूछताछ की। यहां कथित तौर पर एक्सपायर हो चुकी दवाई (IV द्रव) मरीजों की नसों में चढ़ा दी गई थी, जिससे वह बीमार हो गए।
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सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारी पश्चिम मेदिनीपुर जिले के मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल पहुंचे। उन्होंने आरएमओ, दो जूनियर डॉक्टर और चार नर्सों से पूछताछ की, जो 9 जनवरी की रात को स्त्री रोग विभाग में ड्यूटी पर थे, जब यह घटना हुई।
आरएमओ से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का कारण पूछा गया
वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्होंने उस शाम सर्जरी करने वाले चार स्नातकोत्तर प्रशिक्षुओं से भी बात की। आरएमओ से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का कारण पूछा गया। आरएमओ से यह भी पूछा गया कि क्या उन्होंने जूनियर डॉक्टरों को इलाज के तरीके और संबंधित रोगियों को दी जाने वाली दवाओं के बारे में निर्देश दिए थे।
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मृतक के परिवार और बीमार हुए मरीजों से भी सीआईडी ने की बात
सीआईडी ने मृतक के परिवार के सदस्यों और गंभीर रूप से बीमार हुए मरीजों से भी बात की। सूत्रों के अनुसार, सीआईडी तीन दिनों के भीतर राज्य सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपेगी।
14 और दावओं की सूची जारी, जिन्हें रोगियों को नहीं दिया जाएगा
इस बीच, राज्य के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि शहर के एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती तीन महिलाओं की हालत 'बहुत गंभीर' है। उन्होंने कहा कि विभाग ने मंगलवार को 14 और दवाओं की सूची जारी की है, जिन्हें राज्य द्वारा संचालित अस्पतालों में रोगियों को नहीं दिया जाना चाहिए।
प्रारंभिक रिपोर्ट में दवाओं के दुष्प्रभाव का संकेत मिला
उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर राज्य सरकार ने पहले मामले की समानांतर जांच के लिए 13 सदस्यीय समिति का गठन किया था। अधिकारी ने कहा कि समिति द्वारा दायर प्रारंभिक रिपोर्ट में मानवीय भूल और दवाओं के दुष्प्रभावों का संकेत मिलता है, जिसके कारण यह घटना हुई।